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प्रगति मैदान पुस्तक मेले: किताबों की दुनिया में अध्यात्म की तलाश

इन दिनों कथित धर्मगुरुओं की करतूतों से लोगों की आस्था आहत हुई हो लेकिन धर्म को लेकर लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं है।
Author नई दिल्ली | August 30, 2017 04:39 am
भगवान कृष्ण सही मायने में पहले और सबसे मशहूर परामर्शदाता थे, जिनका अपने मरीज अर्जुन के साथ वाले सत्र में न सिर्फ उनकी स्थिति बेहतर हुई, बल्कि 700 श्लोकों वाले भगवद गीता नाम के प्राचीन ग्रंथ की रचना हुई ।

मीना 

इन दिनों कथित धर्मगुरुओं की करतूतों से लोगों की आस्था आहत हुई हो लेकिन धर्म को लेकर लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं है। ऐसे में जब वैज्ञानिक सोच विकसित करने की बात आती है तो सारे तर्क और विवाद धरे के धरे रह जाते हैं।  ऐसा ही कुछ नजारा राजधानी के प्रगति मैदान में लगे पुस्तक मेले में नजर आया। जहां पाठकों की ज्यादातर संख्या धार्मिक पुस्तकों के स्टॉल पर नजर आई या फिर उन स्टॉल्स पर जहां भगवान से मिलाने की गारंटी के साथ योग की किताबें उपलब्ध हैं। पुस्तक मेले के चौथे दिन मंगलवार को गीता प्रेस के स्टॉल पर पाठकों की सबसे ज्यादा भीड़ नजर आई। यहां आने वाले ज्यादातर लोगों के हाथों में गीता और रामचरितमानस जैसी किताबें नजर आ रही थीं। न्यू अशोक नगर की रहने वाली दीक्षा कहतीं हैं कि आध्यात्म के जरिए मानव जीवन को बेहत बनाया जा सकता है बशर्त उसकी सही व्याख्या की जाए। वहीं एक बुजुर्ग महिला की प्रकाशक से बहस हो रही थी महिला का कहना था कि इन किताबों में बहुत कुछ झूठ लिखा होता है। 23वें दिल्ली पुस्तक मेले में इस बार 200 से अधिक प्रकाशकों ने भागीदार की है। यह संख्या पिछले सालों से कम है। पिछली बार पुस्तक मेले में 300 से अधिक प्रकाशक आए थे।

इसके अलावा ज्यादातर पाठक सम्यक, गीता प्रेस, अखिल भारतीय संस्था व श्रीश्री पब्लिकेशन पर भी दिखे। रोहित शुक्ला बताते हैं कि उन्हें इस बार के पुस्तक मेले में भड़ नजर नहीं आई। रोहित की मानें तो इसका कारण हरियाणा में मचा बवाल हो सकता है। वहीं हौज खास से आईं ऋचा रस्तोगी कहती हैं कि हर बार पूरी तरह किताबों से भरा रहने वाला प्रगति मैदान इस बार खाली खाली सा लग रहा है। ऋचा ने बताया कि 8, 9, 10 और 11 नंबर हॉल में ही सारे स्टॉल्स लगाए गए हैं। केवल स्टेशनरी मेले के लिए हॉल नंबर 12 दिया गया है।
खाने के स्टॉल्स भी पुस्तकों के साथ ही एक कोने में लगाए गए हैं। बाबा साहब आंबेडकर को सम्यक प्रकाशन ने भगवान की तरह पेश किया है, लेकिन विडंबना यह थी कि लोग आंबेडकर की पुस्तकें खरीदने केबजाए उसी स्टॉल से आंबेडकर की मूर्तियांं खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे थे। सहज योग के संत प्रीतम बताते हैं कि बाबा राम रहीम ने लोगों को भटकाया है। आध्यात्म लोगों के अंदर होता है उसकी प्राप्ति के लिए सहज योग आवश्यक है।

डायमंड या टाइम्स आॅफ इंडिया लगभग सभी प्रकाशकों ने धर्म की एक न एक पुस्तक रखी हुई है। मसलन अगर आप पुस्तक मेले में जाते हैं तो आपको वचनावृत, सत्संग की पद्धति, ध्यान के चमत्कार, नो योर चाइल्ड, हिस्टोरिकल कृष्णा, राजयोग, दिव्य स्पर्श, कर्मयोग, पारमार्थिक सत्संग व गुरु दर्शन जैसी पुस्तकें खरीद सकते हैं। पुस्तक मेले में साधना पब्लिकेशन में लोगों ने अधिक दिलचस्पी दिखाई। वहीं हॉल नंबर 12 में लगे स्टेशनरी मेले में भी बहुत अधिक लोग नहीं दिखे।

 

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