December 09, 2016

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दर्द सहने के बाद थोड़ी राहत का मरहम

दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के चेहरे तब चमक उठे जब गोल डाकखाना जीपीओ के कर्मचारी उनके नोट बदलने के लिए वार्ड में ही पहुंचे।

Author नई दिल्ली | November 17, 2016 03:28 am
सरकार ने बंद किए 500 और 1000 रुपए के नोट। (PTI Photo)

बुधवार को अस्पतालों में बीमारों व उनके तीमारदारों को राहत देने के कुछ नए प्रयास नजर आए। मसलन सफदरजंग अस्पताल और राममनोहर लोहिया अस्पताल में बैंको की विशेष पहल मरीजों के लिए राहत लेकर आई। उधर नोटबंदी के बाद नोटों को बदलने की बारंबारता रोकने के लिए मतदान सरीखे की स्याही लगाने का फैसला कई शाखाओं में लागू नहीं हो सका। बताया जा रहा कि बुधवार को कई जगह उंगलियों पर लगाए जाने वाली स्याही नहीं पहुंच पाई। बिना स्याही लगाए नोट बदलवा पाने में सफल लोगों को दोहरी खुशी का इजहार किया।

सफदरजंग अस्पताल की ओपीडी पार्किंग में एक कार से एक व्यक्ति निकल जैसे ही धन पाने की सूचना देता पोस्टर वाहन के आगे लगाया लोगों की खासी भीड़ जमा हो गई। दरअसल, उस कार में न तो कोई एटीएम जैसी मशीन थी और ना ही नोट बदले की सुविधा का एलान। दोपहर के करीब 11 बजे थे, कार की डिग्गी से दो-तीन कार्टून निकाल मौजूद अधिकारी ने नोट देने की प्रक्रिया शुरू की। दरअसल अधिकारी दुकानों और मॉलों में इस्तेमाल होने वाली स्वाइप मशीन लिए कार में बैठे दिखे। जो लोग नगदी या खुले पैसे चाहते थे, उनसे एटीएम या डेबिट-क्रेडिट कार्ड मांगा जाता। तय राशि स्वीप की जाती। और उस राशि के बदले उन्हें नगदी (10-20 के नोटों के बंडल) दे दी जाती। लोगों ने इस पहल को शानदार बताया। क्योंकि इसमें एटीएम से छुटकारा मिला। अपनी मां का इलाज करवाने आई माया ने कहा कि उनकी मां 4 नवंबर से अस्पताल में है, उनके अलावा कोई भी देखभाल करने वाला नहीं है। खर्च के पैसे भी खत्म हो गए थे। हमें एक गार्ड ने बताया कि पार्किंग में खुले नोट मिल रहे हैं। उन्होंने मुझसे एटीएम मांगा और दस-दस की गड्डी दिलाई।

इसी तरह दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के चेहरे तब चमक उठे जब गोल डाकखाना जीपीओ के कर्मचारी उनके नोट बदलने के लिए वार्ड में ही पहुंचे। डाकघर इंचार्ज कैलाश चंद्र शर्मा अपने दो साथी कर्मचारियों के साथ नई बिल्डिंग के वार्डों में हर बेड पर जाकर लोगों से फार्म के साथ आइडी और भर्ती स्लिप का ब्योरा लिया। 4500 तक के पुराने नोटों को बदला। डाकघर के कर्मचारियों ने न सिर्फ पुराने नोट बदले बल्कि 1000 और 500 के नोट के बदले 100-100 के खुल्ले भी दिए। हालांकि अस्पतालों में पुराने नोट अभी भी लिए जा रहे हैं, लेकिन दवाई और अस्पताल के खर्चे के अलावा दूसरी रोजमर्रा की जरूरत के लिए परेशानी हो रही थी। तीमारदारों का कहना है कि वो एक दिन पहले ही दो घंटे बैंक की लाइन में लगकर भी नोट नहीं बदल पाए थे लेकिन डाकघर के कर्मचारियों ने उनके मरीज के पास आकर ही नोट बदल दिए।

बुधवार को बैंकों ने कतार में खड़े लोगों को राहत देने के लिए अपनी रणनीति में कुछ सुधार किए। दरअसल, कई बैंकों के बाहर अब कूपन व्यवस्था लागू कर दी गई है। लोगों को एक नंबर दे दिया जा रहा है। नंबर आने पर ही उन्हें बैंक के अंदर जाने दिया जा रहा है। इसकी वजह से अब भूखे-प्यासे घंटों कतार में खड़े रहने से कुछ राहत मिली। बता दें कि इससे भीड़ कम नहीं हुई लेकिन कतार छोटी हुई। लोग कतार से हटकर इधर-उधर घूमते और अपनी बारी पर नजर लगाए दिखे। शुरुआत में लोगों की कतार काफी लंबी हो जा रही थी। कहीं पर पांच सौ मीटर तो कहीं पर एक किलोमीटर तक लंबी कतार हो रही थी। इसकी वजह से सड़कों पर जाम लग रहा था। इसके साथ ही लाइन छोड़कर हट भी नहीं पा रहे थे। इसे दूर करने के लिए अब टोकन दिया जा रहा है। बुधवार को दिलशाद गार्डन, दिलशाद कालोनी, कालकाजी और सूरजमल विहार आदि इलाकों में कई बैंकों के बाहर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी लोगों को एक कागज के टुकड़े पर नंबर लिखकर दे रहे हैं।

बता दें कि इन तमाम उपबंध भी नकदी की समस्या से लोगों को पूरी तरह राहत नहीं दे सके। इतना ही नहीं लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के नकदी चाहते हैं और चलन से बाहर किए गए 500 और 1000 के नोटों के बदले मान्य नोट लेने के लिए कतारों में खड़े रहे। बैंकों के अधिकतर ग्राहक एटीएम के जल्द खाली हो जाने की वजह से परेशान नजर आए। इसके अलावा अभी हजारों एटीएम ने काम करना शुरू नहीं किया है। कुछ एटीएम में नकदी है लेकिन वे भी तकनीकी खामी के चलते लोगोें की परेशानी का सबब बने रहे।

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First Published on November 17, 2016 3:28 am

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