December 08, 2016

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खाने के पैसे नहीं, घर क्या भेजें…

नोटबंदी का असर धीरे-धीरे रोज कमाने-खाने वालों की थाली तक पहुंच गया है।

Author नई दिल्ली | November 30, 2016 04:51 am
नई दिल्ली में एक एटीएम से नकद रुपए निकालने के लिए खड़े लोग। (PTI Photo by Subhav Shukla/17 Nov, 2016)

नोटबंदी का असर धीरे-धीरे रोज कमाने-खाने वालों की थाली तक पहुंच गया है। विमुद्रीकरण से दिल्ली में वजन करने वाले से लेकर झालमुड़ी बेचने वालों तक की स्थिति बेहाल है। रेहड़ी-पटरी पर बैठने वाले इन कामगारों के पास महीने भर की कमाई में से कुछ भी नहीं बचा है, जिसके कारण इस महीने कई रेहड़ी, पटरीवाले अपने घर पैसे तक नहीं भेज पाए हैं। 8 नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद कई लोगों की स्थिति ऐसी हो गई है कि वेसिर्फ दिल्ली में रहने-खाने भर के पैसे ही कमा पाए। इनका कहना है कि महीना खत्म होेने को है और इस बार बचत के 50 रुपए भी नहीं हैं।

प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन व आइटीओ के पास नई दिल्ली इलाके में कई रेहड़ी पटरीवालों से पता चला कि इस बार कमाई में कुछ भी नहीं बच सका, जबकि इससे पहले वे आठ-दस हजार रुपए तक अपने घरवालों को भेज देते थे। पुराने नोट बंद होने और लोगों के पास पैसों की तंगी होने से कमाई आधी हो गई है। अयोध्या के रहने वाले इरफान प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन के पास वजन करने की मशीन लगाकर बैठे थे। इस महीने कितना बचा लिया पूछने पर वे बिफर पड़े, कहने लगे कि साल में पहली बार घरवालों को एक रुपया भी नहीं भेजा। इससे पहले तीन-चार हजार रुपए हर महीने घर भेज देता था। घर पर दो बच्चे पढ़ते हैं। एक सातवीं और दूसरा नवीं में। जो भी यहां से कमा कर भेजता हूं उसमें से ही दोनों बच्चों की फीस भरी जाती है और घर का खर्च चलता है। तो इस बार खर्च कैसे चलेगा इस सवाल पर उन्होंने कहा कि बड़े भाई के बेटे से एक हजार रुपए उधार देने को कहा है।

शिवाजी ब्रिज के नजदीक में छोले-कुलचे बेच रहे धनंजय ने भी कहा कि उसकी कमाई आधी हो गई है। पहले जहां वो दिन भर में हजार रुपए तक की बिक्री कर लेता था, वहीं अब यह घटकर तीन चार सौ रुपए हो गई है। यह पूछने पर कि क्या बैंक या एटीएम से पैसे निकाले, उसने कहा कि इतने पैसे नहीं होते कि बैंक में जमा करूं। खाता तो है लेकिन कभी पैसे जमा नहीं करा पाया। पूरा पैसा घर-परिवार के खर्च में खत्म हो जाता है। इस महीने तो किराने वालों का दो-ढाई हजार का उधार हो गया है क्योंकि उन्हें पूरा पैसा नहीं दे पाया। प्रगति मैदान के पास झालमुड़ी बेच रहे दीपक का कहना था कि अगर घर में किसी को बुखार हो जाए तो उसकी भी दवा नहीं करा सकते। सरकार के फैसले से बाजार में पैसे दिखने ही बंद हो गए हैं। लोग बहुत संभाल-संभाल के खर्च कर रहे हैं, इस महीने में कितने ही लोगों को पैसे होने के बावजूद अपनी दुकान से लौटते देखा है।

 

नोटबंदी के कारण प्रभावित हुआ पर्यटन क्षेत्र

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First Published on November 30, 2016 4:51 am

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