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कलमाड़ी के सहयोगियों को जमानत पर संसद की समिति ने जताई चिंता

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी के तीन सहयोगियों के संबंध में सीबीआइ की ओर से 60 दिनों में आरोपपत्र दायर नहीं करने के कारण उन्हें जमानत पर छोड़े जाने पर चिंता व्यक्त की है
Author नई दिल्ली | April 13, 2017 03:26 am
राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के आरोपों के दागी सुरेश कलमाड़ी।

संसद की एक समिति ने राष्ट्रमंडल खेल से जुड़ी अनियमितता के मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी के तीन सहयोगियों के संबंध में सीबीआइ की ओर से 60 दिनों में आरोपपत्र दायर नहीं करने के कारण उन्हें जमानत पर छोड़े जाने पर चिंता व्यक्त की है। समिति ने यह भी जानना चाहा है कि क्या अदालत ने 18 मामलों को बंद करने के संबंध में सीबीआइ की समाप्ति (क्लोजर) रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। उन्नीसवें राष्ट्रमंडल खेल 2010 पर केवी थामस के नेतृत्व वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह देखती है कि सीबीआइ ने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित 33 मामले दर्ज किए।  रिपोर्ट के अनुसार जहां तक सीबीआइ जांच के अंतर्गत कवर किए गए मामलों का प्रश्न है तो समिति यह पाती है कि वे खरीद संविदाओं, निर्माण, परामर्श, भर्ती और सुविधाओं के उपयोग से संबंधित मामले हैं। विशेषकर आयोजन समिति के खिलाफ मामलों के संबंध में समिति नोट करती है कि सीबीआइ ने खेल अधिव्यय, कार्यबल, माल बिक्री, समाचार सेवा, संविदाओं के साथ-साथ मानार्थ टिकटों से संबंधित मामले हैं। रिपोर्ट के अनुसार जहां तक जांच एजंसी की ओर से की गई प्रगति का संबंध है, समिति पाती है कि साक्ष्य के अभाव में 11 मामलों में समाप्ति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई जबकि 18 मामले अभी भी जांच के विभिन्न चारणों में हैं। इसमें कहा गया है कि यह विश्वास करते हुए कि सीबीआइ जल्द ही 18 मामलों को उनके अंतिम परिणाम तक ले जाएगी, समिति यह जानना चाहती है कि क्या न्यायालय ने सीबीआइ की ओर से दाखिल समाप्ति रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और यदि नहीं तो ब्यूरो की ओर से आगे क्या कार्रवाई करने का विचार किया जा रहा है?

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति सभी मंत्रालयों का ध्यान अपनी सिफारिशों की ओर आकर्षित करती है जिसमें सीबीआइ द्वारा जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। सीबीआइ (भ्रष्टाचार रोधी) डीआइजी ने स्पष्टीकरण दिया कि आरोपपत्र दाखिल करने में विलंब यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) में जांच के कारण हुआ। इस मुद्दे को और स्पष्ट करते हुए सीबीआइ निदेशक ने साक्ष्य दिया कि उन्हें लेटर रोगेटरिज (अनुरोध पत्र) पर कार्रवाई करने से त्वरित प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो पाती है क्योंकि अलग-अलग देशों में अलग अलग व्यवस्था है और सीबीआइ के पास वैसे विशेषज्ञ हैं जो विदेशों की पसंद के अनुरूप लेटर रोगेटरी तैयार कर सकें। रिपोर्ट के अनुसार सीबीआइ ने कहा कि इसलिए दोनों पक्षों के बीच सूचनाओं का काफी आदान-प्रदान होता है जिससे जांच-आरोपपत्र दर्ज करने में देर होती है। ब्यूरो ने सरकार को विदेश मंत्रालय के माध्यम से कुछ ऐसे विधिक जानकारों की सेवा संविदा पर लेने का सुझाव दिया है जो लेटर रोगेटरी तैयार करने में ब्यूरो को सुझाव दे सकें। समिति ने कहा है कि सीबीआइ इस मामले को उत्साहपूर्वक ले ताकि प्रस्ताव फलीभूत हों, खामियां दूर हों और जांच प्रक्रिया को तार्किक समाप्ति तक ले जाया जा सके।

 

 

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