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दिल्ली: सरकारी स्कूलों में 9 हजार से ज्यादा टीचरों की कमी, पर अरविंद केजरीवाल स्वीमिंग पूल पर दे रहे जोर

शिक्षकों की अनुपस्थिति पर जब छात्रों से बात की गई तो उनका कहना था कि अगर हम स्कूल के भरोसे बैठे रहे तो कभी भी बोर्ड परीक्षा में पास नहीं हो पाएंगे।
Author नई दिल्ली | April 7, 2017 16:10 pm
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

एक तरफ दिल्ली की केजरीवाल सरकार सरकारी स्कूलों में स्वीमिंग पूल बनवाने पर जोर दे रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों से शिक्षक ही गायब हैं। दिल्ली के स्कूलों में सुधार का दावा ठोकने वाली केजरीवाल सरकार की शिक्षा सुधार नीति की पोल करावल नगर के एक सरकारी स्कूल ने खोल दी है। करावल नगर के इस सरकारी हाई स्कूल में करीब 5 हजार बच्चे पढ़ते हैं लेकिन जब स्कूल में जाकर देखा गया तो 9 शिक्षक अनुपस्थित थे। ईटीवी में छपी खबर के अनुसार यह स्कूल चार शिफ्टों में चलता है, जिसमें दो-दो बार लड़के- लड़कियों की कक्षा लगती है। सभी शिफ्टों में तीन घंटे से भी कम समय में बच्चों को पढ़ाया जाता है। इस स्कूल के बच्चों का कहना है कि वह स्कूल केवल मिड डे मील के लिए आते हैं।

इस स्कूल से शिक्षकों की अनुपस्थिति पर जब छात्रों से बात की गई तो उनका कहना था कि अगर हम स्कूल के भरोसे बैठे रहे तो कभी भी बोर्ड परीक्षा में पास नहीं हो पाएंगे। यह कहानी केवल एक स्कूल की नहीं है। दिल्ली के ज्यादातर सरकारी स्कूलों का यही हाल है। दिल्ली की आप सरकार की बात करें तो उन्होंने वादा किया था कि दिल्ली को शिक्षा और स्वास्थ्य में एक आदर्श राज्य बनाया जाएगा लेकिन शिक्षकों की अनुपस्थिति सब बयां कर रही है। वहीं सरकार का कहना है कि ऐसा नहीं है कि स्कूलों में शिक्षक और प्रिंसिपल की कमी है। जहां पर प्रिंसिपल नहीं है वहां पर कोई अन्य व्यक्ति स्कूल के संयोजक की भूमिका निभा रहा है।

सरकार की इस बात का खंडन करते हुए समाजिक कार्यकर्ता अशोक अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को हाई कोर्ट में दायर की गई एक याचिका द्वारा उठाया है। उन्होंने आप सरकार से पूछा है कि राज्य में 50 प्रतिशत स्थायी शिक्षकों की जगह खाली है, फिर कैसे बिना शिक्षकों के शिक्षा प्रणाली काम कर रही है। दिल्ली सरकार द्वारा हाई कोर्ट में जमा कराए गए हलफ़नामे के मुताबिक सरकार को स्कूलों में 59,796 शिक्षकों की बहाली की अनुमति मिली हुई है। इसमें 27,142 स्थायी शिक्षकों की जगह है। इस शिक्षा प्रणाली में करीब 17 हजार अस्थायी शिक्षक हैं जिनकी योग्यता की क्षमता संदिग्ध बनी हुई है। स्कूलों में 9 हजार पद अभी भी खाली हैं।

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