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दिल्ली: ओला-उबर में हड़ताल जारी, पीछे हटने को तैयार नहीं कैब चालक,

परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन के घर तक आज निकालेंगे मार्च, 28 फरवरी को अदालत में होनी है मामले की सुनवाई
Author नई दिल्ली | February 21, 2017 02:05 am
एप्प आधारित टैक्सी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी ओला। (फोटो: ओला फेसबुक पेज)

दिल्ली-एनसीआर के ऐप आधारित कैब चालकों की हड़ताल सोमवार को 11वें दिन भी जारी रही। हड़ताल टूटने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जंतर-मंतर पर हड़ताल कर रहे कैब चालकों के संगठन की ओर से कहा गया है कि 28 फरवरी को अदालत में हड़ताली चालकों की मांगों को लेकर सुनवाई होनी है। उससे पहले हमारी कोशिश होगी कि ओला-उबर हमारी मांगों पर बातचीत करें, नहीं तो मामला अदालत में तो है ही और हमारी हड़ताल भी जारी रहेगी।  सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन आॅफ दिल्ली के पदाधिकारी गोपाल मेहरा ने बताया कि वे मंगलवार को मजनू का टीला से लेकर परिहवन मंत्री सत्येंद्र जैन के आवास तक मार्च निकालेंगे। जैन के आवास का घेराव करेंगे और अपनी मांगों को लेकर पूरा दिन वहीं बैठेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने अपने मन की टीस जताते हुए कहा कि कुछ मीडिया वाले कैब चालकों की हड़ताल खत्म होने का प्रचार कर रहे हैं जबकि हड़ताली कैब चालक 10 फरवरी से लगातार अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर संघर्ष कर रहे हैं। इसका उनकी हड़ताल पर बुरा असर पड़ा है।

वहीं सोमवार को दिल्ली की सड़कों पर कैब ज्यादा दिखीं। ऐसे में कई जगहों पर हड़ताली कैब चालकों ने गाड़ियों को रोका। जंतर-मंतर के रास्ते से गुजर रही एक कैब को हड़ताली कैब चालकों के एक झुंड ने रोका और उसे गाड़ी से बाहर निकालकर समझाया। कैब संचालन को लेकर गोपाल का कहना था कि इसमें कोई दो राय नहीं 30 फीसद गाड़ियां सड़कों पर चल रही हैं, लेकिन अभी भी 70 फीसद कैब चालक हड़ताल पर हैं। उनका कहना था कि अब तो देश में कई जगहों पर कैब चालकों की हड़ताल शुरू हो गई है। सभी जगहों पर हड़ताली कैब चालक दाम बढ़ाने और सुविधाएं मुहैया कराने की मांगों को लेकर आगे आए हैं। यह ओला-उबर के शोषण को दिखाता है। उनका कहना था कि कब तक कोई शोषण सहन करता रहेगा।

गोपाल का कहना था कि अभी उन्हें दो रुपए प्रतिकिलोमीटर की बचत होती है, जिसमें घर खर्च से लेकर गाड़ी की किस्त तक भरनी होती है। इतने पैसे में लोग कैसे सब कुछ कर लेंगे, जबकि इन कंपनियों ने लाखों रुपए कमाने का सपना दिखाकर लोगों से गाड़ी खरीदवाई है। अब ये कंपनियां जब पूरी तरह देश में स्थापित हो गई हैं, तो मनमाने तरीके से पेश आने लगी हैं। सबसे पहले तो सभी तरह की सुविधाओं को खत्म कर दिया जोकि शुरूआती कुछ महीने तक कैब चालकों को मिली। इसके बाद प्रतिकिलोमीटर दाम कम कर दिया और फिर राइड भी अपने हिसाब से देने लगे। .

 

 

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