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‘नर्सरी दाखिले का सर्कुलर अभिभावकों के लिए मुसीबत’

जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण ऐसे इलाके में मकान लेने में असमर्थ हैं।
Author नई दिल्ली | December 22, 2016 01:45 am
नर्सरी में बच्चों के दाखिले के लिए कतार में खड़े अभिभावक। (फाइल फोटो)

दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स के मैनेजमेंट एसोसिएशन ने कहा है कि दिल्ली सरकार के 19 दिसंबर 2016 के नर्सरी दाखिले को ले कर जारी किया गया सर्कुलर स्कूलों के लिए बड़ी समस्या का कारण बनने जा रहा है। उन्होंने कहा यह अभिभावकों के लिए मुसीबत खड़ी करेगा। क्योंकि अधिकतर स्कूल जिनको दिल्ली विकास प्राधिकरण ने जमीन आवंटित की है उनमें ही हर माता-पिता बच्चे का दाखिल करना चाहता है। स्कूलों को जमीन आबंटित किए गए इलाके के ही बच्चों को दाखिले में प्राथमिकता दे कर उन तमाम अभिभावकों का सपना कुचल दिया है। जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण ऐसे इलाके में मकान लेने में असमर्थ हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने कहा कि सरकार को पता होना चाहिए पुरानी दिल्ली, पुनर्वास बस्तियां, गांव-देहात व अनधिकृत-नियमित कॉलोनियों में दिल्ली की 60 से 70 फीसद जनता रहती है। ऐसे में इन क्षेत्रों के बच्चे तो किसी भी स्थिति में इन दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित जमीनों पर चलने वाले स्कूलों में दाखिल नहीं ले पाएंगे जहां पर खेल के मैदानों की समुचित व्यवस्था है। ऐसे अभिभावक अपने दूसरे या तीसरे बच्चे को एक ही स्कूल में दाखिला नहीं दिला पाएंगे। दिल्ली के बाहर से आने वाले बच्चे, गर्ल चाइल्ड, सिंगल पैरेंट इस फॉर्मूले से दोयम दर्जे के अभिभावक बन कर रह जाएंगे। सरकार में बैठे हुए लोग कोई ऐसा सर्वमान्य फार्मूला नहीं बना सके जो सभी को संतुष्ट कर सके 2007 में दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से गठित अशोक गांगुली समिति (तत्कालीन चेयरमैन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने 100 पॉइंट फॉर्मूले का सभी संबंधित पक्षों के विचारों का समावेश करके ही न्यायालय को सौंपा था जिसमें भी कुछ लोगों ने अपना स्वार्थ देखते हुए जब तब न्यायालय में चुनौती देकर समस्याओं को बढ़ाने का प्रयास किया है जो हर साल और उलझन भरा होता जा रहा है।

 

 

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