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प्रवासियों को पुराने नोट बदलने के लिए मोदी से मदद की आस

भारतीय मूल के लोगों के वैश्विक संगठन (जीओपीआईओ) ने मोदी से अपील की है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रवासी भारतीय को पुराने नोट बदलने की अनुमति नहीं दे रही है, इसलिए वे इसमें मदद करें।
Author नई दिल्ली | January 24, 2017 03:56 am
वैसे तो इस स्मृति भवन को बसपा सुप्रीमों और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बनवाया था लेकिन अब इसनें बीजेपी द्वारा चुना गया मुख्यमंत्री शपथ लेगा।

भारतीय मूल के लोगों के वैश्विक संगठन (जीओपीआईओ) ने मोदी से अपील की है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रवासी भारतीय को पुराने नोट बदलने की अनुमति नहीं दे रही है, इसलिए वे इसमें मदद करें। जीओपीआईओ ने दुनिया भर के भारतीय प्रवासियों को एक मंच के तले इकट्ठा किया है। इस संगठन ने एक बयान जारी कर कहा कि विदेशी नागरिक और ओसीआई/पीआईओ कार्ड होल्डरों को आरबीआई अपने पुराने नोट जमा करने की अनुमति नहीं दे रहा है, जबकि प्रवासी भारतीय के लिए अंतिम समय सीमा 30 जून 2017 तय की गई है।

जीओपीआईओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि आरबीआई की शाखा के बाहर लाइन में घंटों खड़े रहने के बाद भारतीय और विदेशी नागरिकों को कहा जा रहा है कि केवल भारतीय पासपोर्ट रखने वाले ही पुराने नोट बदलने के लिए अंदर जा सकते हैं।

संस्था ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि विदेश नागरिकता, भारतीय मूल का नागरिक (पीआईओ) और भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) कार्ड रखने वालो को भी वही मौका मिलना चाहिए जो प्रवासी भारतीय (भारतीय पासपोर्ट रखनेवालों) को मिल रहा है। उन्हें आरबीआई ने 2,50,000 रुपये की रकम तक के पुराने नोट बदलने की अनुमति दी है, जबिक अधिसूचित राशि 25,000 रुपये ही है।

लंदन के लॉ फर्म जाइवाला एंड कं. सोलिसिटर्स के संस्थापक और वरिष्ठ भागीदार सरोश जाइवाला का कहना है, “विभिन्न देशों के भारतीय आप्रवासियों का कहना है कि सरकार को दुनिया भर के दूतावासों में उन्हें पुराने नोट बदलने की सुविधा देनी चाहिए। ज्यादातर आप्रवासी भारतीय ने नोटबंदी के कदम का स्वागत किया है।”

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