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NGT ने पिकलिंग इकाइयों को बंद करने का दिया निर्देश

पिकलिंग इकाइयों के 2021 के मास्टर प्लान के अनुसार प्रतिबंधित उद्योगों की सूची में आने की बात पर गौर करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस तरह के उद्योगों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया है।
Author नई दिल्ली | October 7, 2016 04:37 am
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)।

पिकलिंग इकाइयों के 2021 के मास्टर प्लान के अनुसार प्रतिबंधित उद्योगों की सूची में आने की बात पर गौर करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस तरह के उद्योगों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया है। पिकलिंग धातु सतह प्रशोधन प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल धब्बा, गैर कार्बनिक प्रदूषकों, लौह और बेशकीमती धातुओं, तांबा और एल्यूमीनियम के मिश्र धातुओं से जंग या स्केल्स जैसी अशुद्धियों को हटाने में होता है। एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार और न्यायमूर्ति आरएस राठौर की पीठ ने कहा कि इन इकाइयों द्वारा खतरनाक कचरों को लापरवाही से फेंकना अनंतकाल तक नहीं चल सकता क्योंकि इसका पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हाई कोर्ट और अधिकरण के आदेशों के साथ-साथ 2021 के मास्टर प्लान में पिकलिंग उद्योगों को नकारात्मक उद्योगों की श्रेणी में रखे जाने की बात पर गौर करते हुए हरित अधिकरण ने कहा कि इस तरह की इकाइयों को दिल्ली में संचालित करने की अनुमति नहीं है और इसे दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और दिल्ली सरकार समेत संबद्ध अधिकारियों को लागू करना चाहिए।


यह निर्देश तब आया जब डीपीसीसी ने पीठ से कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार पिकलिंग गतिविधि उद्योगों की नकारात्मक सूची में आती है और इसलिए इस साल 23 सितंबर से उसे दिल्ली में संचालित करने की अनुमति नहीं है। अधिकरण अशोक विहार मित्र मंडल द्वारा खतरनाक कचरा पैदा करने वाले उद्योगों के समूह के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में कहा गया है कि उद्योग कचरा फेंकने के लिए जिम्मेदार हैं जिससे धरती और पानी में क्रोमियम, सीसा, आर्सेनिक, तांबा, निकेल, कोबाल्ट और लोहे की मात्रा काफी बढ़ गई है।

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First Published on October 7, 2016 4:36 am

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