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विश्व शांति और स्वच्छता अभियान का संदेश देते दुर्गा पूजा पंडाल, गुजरात से लेकर बंगाल तक की दिखी झलक

दिल्ली का मिनी बंगाल कहे जाने वाले चितरंजन पार्क में भी दुर्गा पूजा की धूम है।
Author नई दिल्ली | October 10, 2016 04:37 am
नवरात्रि।

यूं तो राजधानी में शारदीय नवरात्र का अवसर पारंपरिक रूप से रामलीला के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन रोजगार और अन्य कारणों से दिल्ली आए दूसरे राज्यों के लोगों ने इस त्योहार पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। राजधानी में जहां एक ओर कुछ जगहों पर गुजराती गरबा की धूम होती है तो वहीं दूसरी ओर बंगाल की संस्कृति को दर्शाते भव्य पंडाल लोगों का ध्यान खींचते हैं। रविवार को बंगाल की परंपरा की छटा बिखेरते मां दुर्गा के पंडालों में महाअष्टमी की पूजा धूमधाम से संपन्न हुई। विशिष्ट संधि-पूजा के समय श्रद्धालुओं की भीड़ रही, साथ ही उन्हें कला, संस्कृति, साहित्य, देश-काल की झलक भी दिखाई गई।

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पंडालों के जरिए खेल, साहित्य, कला, दर्शन, वेशभूषा, देशकाल और समकालीन राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक मुद्दों को दर्शाने की एक समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन दिल्ली में रह रहा बंगाली समुदाय इस परंपरा को यहां भी काफी पहले ही स्थापित कर चुका है। इसकी झलक हर साल यहां की अलग-अलग जगहों में बनाए जाने वाले भव्य पंडालों में देखी जा सकती है। रवींद्रनाथ टैगोर के साहित्य को जानना हो या फिर बंगाल के मंदिरों की झलक देखनी हो, या मदर टेरेसा से विश्व शांति का संदेश पाना हो, मां दुर्गा के पंडालों में आप इन सबसे रूबरू हो सकते हैं। इसी परंपरा के तहत मशहूर है मिंटो रोड पूजा समिति की ओर से पं. दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित काली बाड़ी मंदिर में आयोजित दुर्गा पूजा।

समिति के सचिव संजीव चौधरी ने बताया, ‘कश्मीरी गेट और नई दिल्ली काली बाड़ी मंदिर की दुर्गा पूजा के बाद मिंटो रोड का आयोजन तीसरा सबसे पुराना आयोजन है, जो 1940 से किया जा रहा है।’ यहां के दुर्गा पंडाल को कोलकाता के अन्नकूट मंदिर का आकार दिया गया है और इसकी थीम पर्यावरण पर रखी गई है। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा के निर्माण में इस्तेमाल रंग सहित हर चीज बायो-डिग्रेडेबल है। इसके साथ ही पंडाल के अंदर स्वच्छता अभियान और अन्य सामाजिक संदेश के पोस्टर लगाए गए हैं। समिति के महासचिव एसएस बसक ने कहा कि पिछले दो साल से स्वच्छता की थीम किसी न किसी रूप में पंडाल में शामिल की जा रही है और पूजा के फंड या पूजा स्थल का उपयोग सामाजिक कार्यों में किया जा रहा है। बंगाल की संस्कृति का एक और जीवंत दर्शन मयूर विहार फेज-1 के सुप्रीम एन्क्लेव में दुर्गा पंडाल में देखा जा सकता है। बांग्लादेश में स्थित रवींद्रनाथ टैगोर के मकान ‘कुथी बाड़ी’ की हूबहू झलक इस पंडाल में देखी जा सकती है। इसके साथ ही इस पंडाल की थीम टैगोर के प्रसिद्ध गीत-नाटक ‘तासेर देश’ पर रखी गई है। पूजा समिति के महासचिव मृणाल विश्वास ने कहा, यह बांग्ला संस्कृति का संपूर्ण उत्सव है।

दिल्ली का मिनी बंगाल कहे जाने वाले चितरंजन पार्क में भी दुर्गा पूजा की धूम है। यहां किसी पंडाल में आप ग्रामीण बंगाल की झलक देख सकते हैं तो किसी में समसामयिक विषय से रूबरू हो सकते हैं। दुर्गा पूजा का बेसब्री से इंतजार करने वाली मयूर विहार फेज-1 की महुआ ने कहा, ‘संधि पूजा सबसे अहम पूजा मानी जाती है। उस बेला में मां को साक्षात रूप में देखा जा सकता है।’ दिल्ली में दुर्गा प्रतिमा से लेकर पंडाल और साज-सज्जा तक ज्यादातर पश्चिम बंगाल से आए कलाकार कर रहे हैं।

 

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