June 26, 2017

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दिल्ली: 50 साल के व्यक्ति ने की मेट्रो के सामने कूद कर आत्महत्या

मरने से पहले उसने एक पत्र लिखकर छोड़ा है। जिसमें अपनी कंपनी के मालिक पर परेशान करने का आरोप लगाया है।

Author नई दिल्ली | March 21, 2017 03:37 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

आजादपुर मेट्रो स्टेशन पर सोमवार सुबह 50 साल के एक व्यक्ति ने मेट्रो ट्रेन के सामने कूदकर खुदकुशी कर ली। मृतक की पहचान ईश्वर शर्मा के रूप में हुई है। मरने से पहले उसने एक पत्र लिखकर छोड़ा है। जिसमें अपनी कंपनी के मालिक पर परेशान करने का आरोप लगाया है। मेट्रो पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना के बाद इस रूट पर मेट्रो की सर्विस डेढ़ घंटे बाधित रही। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और सीआइएसएफ के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। मेट्रो पुलिस उपायुक्त जितेंद्रमणि के मुताबिक ईश्वर परिवार सहित मॉडल टाउन इलाके में रहता था। वह आजादपुर स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी करता था। सोमवार सुबह साढ़े सात बजे हूडा सिटी सेंटर की ओर जाने वाली ट्रेन आजादपुर मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-एक पर पहुंच रही थी। तभी अचानक प्लेटफॉर्म पर खड़े शर्मा ने मेट्रो के आगे छलांग लगा दी। स्टेशन पर चीख पुकार मच गई।

चालक ने इमरजंसी ब्रेक लगाकर मेट्रो को रोकने का प्रयास किया लेकिन तब तक वह मेट्रो की चपेट में आ चुका था। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे मेट्रो के नीचे से निकलकर अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस को मृतक की जेब से उसका पहचान पत्र मिला जिससे उसकी पहचान की गई। पुलिस को उसके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला। इसमें उसने कंपनी के मालिक द्वारा परेशान करने की बात लिखी है। उसने अपनी मौत के लिए कंपनी के मालिक को जिम्मेदार ठहराया है। मणि ने बताया कि सुसाइड नोट में यह साफ नहीं लिखा है कि उसे किस तरह से परेशान किया जा रहा था। पुलिस इस मामले में कंपनी के मालिक और कर्मचारियों से पूछताछ करेगी। इसके अलावा मृतक के परिवार से भी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे कायर्वाही की जायेगी।  मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौके से मिले सीसीटीवी फुटेज में ईश्वर का मेट्रो के सामने कूदते हुए दिखाई देना प्रतीत हुआ है।

नाबालिग से बलात्कार के जुर्म में सजा

दिल्ली की एक अदालत ने 26 साल के एक व्यक्ति को एक नाबालिग से बलात्कार के जुर्म में 10 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि कोई भी अभिभावक इतना नीचे नहीं गिर सकता कि यह आरोप लगाए कि उनकी बच्ची का यौन उत्पीड़न हुआ है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा ने यह टिप्पणी आरोपी की अर्जी खारिज करते हुए की जिसमें उसने कहा था कि नाबालिग लड़की की मां ने उससे कुछ पैसे उधार लिए थे और जब उसने यह वापस मांगे तो उसने उसे इस मामले में फंसा दिया।

अदालत ने कहा कि चूंकि बचाव पक्ष की ओर से धनराशि देने के बारे में कोई सबूत नहीं दिया गया और न ही उसकी ओर से राशि या तिथि बताई गई, इस दलील पर विश्वास या उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी किशोरी का कोई अभिभावक इतना नीचे नहीं गिर सकता कि वह ऐसे गंभीर आरोप लगाकर उसका नाम खराब करे। इसलिए बचाव की यह दलील स्वीकार नहीं की जा सकती, न ही मानी जा सकती है। अदालत ने कहा कि यह साबित हो गया है कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी दोषी सोनू अपनी पड़ोसी नाबालिग लड़की को जून 2014 में अपने कमरे पर ले गया और उसका यौन उत्पीड़न किया। अदालत ने कहा कि उसने पहले भी उसके साथ ऐसा ही कृत्य किया था।

 

 

 

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First Published on March 21, 2017 3:37 am

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