December 06, 2016

ताज़ा खबर

 

नोटबंदी के बाद नाउम्मीदी का तीसरा हफ्ता

बड़े नोट बंद होने के बाद मॉल में आने वाले लोगों की संख्या में करीब 60 फीसद की कमी आ गई है।

Author नोएडा | November 28, 2016 04:07 am
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए 500 रुपए के नए नोट। (Photo: PTI)

500 और 1 हजार रुपए की नोटबंदी के तीसरे रविवार के बाद मॉल और मल्टीप्लेक्स संचालन अब नुकसान का आकलन करने पर मजूबर हो गए हैं। शुरुआती दो सप्ताह के भीतर सब कुछ जल्द सामान्य होने की उम्मीदों पर उन्हें अब पानी फिरता दिखाई दे रहा है। आलम यह है कि शहर के मॉल में खरीदारी और खरीदारों की कमी के कारण पिछले तीन शनिवार एवं रविवार पर किसी भी नए उत्पाद की लांचिंग तक नहीं हुई हैं। जबकि मॉल आदि में खासतौर पर रविवार वाले दिन ही नए उत्पाद जारी किए जाते थे।  शनिवार और रविवार वाले दिनों में भीड़ से गुलजार रहने वाले शहर के सभी मॉल, 26 और 27 नवंबर को खरीदारों का इंतजार करते नजर आए। इन दो दिनों में सुबह से ही भर जाने वाली पार्किंग में शाम तक भी गाड़ियां खड़ी करने की जगह खाली रहीं। मॉल के दुकानदारों के अनुसार नोटबंदी से पहले युवा जोड़े और कॉलेजों में पढ़ने वाले चहेते खरीदार हुआ करते थे लेकिन अब जो बिक्री हो रही है, उन्हें ज्यादातर परिवार के साथ आने वाले खरीद रहे हैं, जो नकदी के बजाए प्लास्टिक मनी (क्रेडिट या डेबिट कार्ड) का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, मॉल के बाहर लगने वाली दुकानों पर छोटे रुपयों (20, 50 रुपए आदि) का संकट है। दो हजार रुपए का नोट देने वालों को ये दुकानदार सामान नहीं दे रहे हैं।

नोएडा में करीब आधा दर्जन मॉल हैं। ज्यादातर मॉल में मल्टीप्लेक्स भी हैं। सप्ताह के आखिरी दिन, शनिवार और रविवार को सिनेमा देखने और खरीदारी करने वालों की बहुत ज्यादा भीड़ रहती थी। सेक्टर- 38 स्थित जीआइपी मॉल और सेक्टर- 18 स्थित सेंटर स्टेज मॉल व डीएलएफ मॉल में ना केवल नोएडा बल्कि दिल्ली, फरीदाबाद और गुड़गांव तक से लोग खरीदारी करने पहुंचते थे। मॉल प्रबंधकों के अनुसार सप्ताहांत पर ही कंपनियां अपने नए उत्पादों का प्रदर्शन लोगों के बीच करती थी। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के खेल और म्यूजिक व डांस के कार्यक्रम भी आयोजित होते थे। पुराने बड़े नोट बंद होने के बाद नए उत्पाद और ऐसे कार्यक्रम ही बंद हो गए हैं। जीआइपी मॉल में सैकड़ों शोरूम हैं, जहां कपड़े, परचून, खानपान, लेदर, जूते, घड़ी समेत किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय कंपनी के उत्पाद खरीदे जा सकते हैं। मॉल में रोजाना 5-6 हजार लोग पहुंचते थे, जबकि सप्ताहांत के दौरान संख्या करीब 50 फीसद ज्यादा हो जाती थी।

पार्किंग दोपहर तक ही भर जाने की वजह से सुरक्षा गार्डों और खरीदारों के बीच कहासुनी तक हो जाती थी। लेकिन बड़े नोट बंद होने के बाद मॉल में आने वाले लोगों की संख्या में करीब 60 फीसद की कमी आ गई है। आने वाले ज्यादातर लोग केवल घूमफिरकर वापस लौट रहे हैं। कुछ फीसद ही क्रेडिट या डेबिट कार्ड से खरीदारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मॉल संचालक लगातार गिरते बाजार की वजह से अब नुकसान का आकलन करने को मजबूर हो गए हैं। रोजाना बिजली, एसी, सुरक्षा गार्डों आदि पर होने वाले खर्च में कटौती करने की योजना बनाई जा रही हैं। उधर मॉल के दुकानदारों में भी हताशा है। उनके अनुसार खरीदारों की कमी के कारण सेल्समैनों की संख्या घटानी मजबूरी होगी। साथ ही किराए में कमी के लिए भी संचालकों से बातचीत करने का दावा किया है।

 

 

पंजाब के मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने पुलिस के साथ की बदतमीज़ी; दी गालियां

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 28, 2016 4:07 am

सबरंग