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‘आप’ सरकार के कानून मंत्रियों का सुर्खियों में बने रहना जारी

वर्तमान में केजरीवाल मंत्रिमंडल के पूर्व कानून मंत्री कपिल मिश्र सुर्खियों में बने हुए हैं।
Author नई दिल्ली | May 8, 2017 02:43 am
दिल्ली के पूर्व जल संसाधन मंत्री कपिल मिश्रा ।

सुशील राघव

आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार में कानून मंत्री हमेशा सुर्खियों में बने रहे हैं। पार्टी की पहली 49 दिनों की सरकार में कानून मंत्री सोमनाथ भारती हों या अब पिछले दो वर्षों से चली रही मौजूदा सरकार में पहले जितेंद्र तोमर या कुछ समय तक कानून मंत्रालय संभालने वाले कपिल मिश्र हों, सभी किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बने रहे हैं।  दिसंबर 2013 में जब अरविंद केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने मालवीय नगर से विधायक सोमनाथ भारती को कानून मंत्रालय का जिम्मा सौंपा था। 15-16 जनवरी की रात सोमनाथ ने अपने कुछ साथियों और टीवी वालों के साथ खिड़की एक्सटेंशन में विदेशी नागरिकों के यहां ड्रग्स रखने के आरोप में छापा मारा और मालवीय नगर थाने के एसएचओ को उन नागरिकों को गिरफ्तार करने के लिए कहा लेकिन एसएचओ ने ऐसा नहीं किया। इस मामले में विदेशी महिला नागरिकों की शिकायत पर साकेत कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने को कहा था। इस दौरान भारती पर विदेशी नागरिकों के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणी करने के भी आरोप लगे थे।

इसके अलावा वह अपने घरेलू झगड़े को लेकर भी काफी सुर्खियों में रहे। 14 फरवरी 2015 में जब केजरीवाल ने दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री की शपथ ली तो उन्होंने इस बार सोमनाथ भारती की जगह त्रिनगर के विधायक जितेंद्र तोमर को कानून मंत्री बनाया। नकली डिग्री मामले के चलते तोमर को जून 2015 में इस्तीफा देना पड़ा। तोमर पर आरोप था कि उन्होंने अवध विश्वविद्यालय से बीएससी की नकली डिग्री हासिल की है जिसके आधार पर उन्होंने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री हासिल की। तोमर के इस्तीफा देने के बाद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी कपिल मिश्र को दी गई, हालांकि जल्द ही उनसे यह जिम्मेदारी लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दे दी गई। वर्तमान में केजरीवाल मंत्रिमंडल के पूर्व कानून मंत्री कपिल मिश्र सुर्खियों में बने हुए हैं।

 

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