December 06, 2016

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जेएनयू : पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल

नजीब की मां फातिमा के साथ धक्का-मुक्की की गई और जबरन घसीटकर गाड़ी में बैठाया गया।

Author नई दिल्ली | November 8, 2016 04:07 am
जेएनयू के छात्र नजीब की मां।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से 15 नवंबर से लापता छात्र नजीब अहमद की मां के साथ रविवार को इंडिया गेट पर हुई पुलिसिया कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। कुछ इसी तरह पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल की खुदकुशी मामले में उनके परिजनों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस की जमकर किरकिरी हो चुकी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इंडिया गेट पर लगी धारा 144 के उल्लंघन पर छात्रों के साथ नजीब की मां को गाड़ी में बैठाकर मायापुरी ले जाया गया था जबकि ग्रेवाल के मामले में राममनोहर लोहिया अस्पताल के पास राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए परिजनों को वहां से अलग किया गया था। इन दोनों ही मामले में पुलिस ने कहा है कि कानून सम्मत कार्रवाई की गई है।

सोमवार को भी नजीब की मां ने छात्रों के साथ पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन कर बेटे की तलाश करने की मांग की। नजीब के बारे में सूचना देने वालों को दो लाख रुपए के इनाम की घोषणा के बाद भी नजीब का अब तक कोई पता नहीं चलना पुलिस के लिए मुसीबत बन गई है। इसी के साथ रोज-रोज का राजनीतिक दलों का धरना -प्रदशर््ान और पुलिसिया जांच पर सवालिया निशान खड़े करना भी पुलिस के गले नहीं उतर रही। जेएनयू में लगातार इस मामले पर प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को जब छात्रों ने इंडिया गेट के सामने प्रदर्शन किया तब पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने नेशनल म्युजियम के पास ही छात्रों और नजीब की मां और बहन को रोक दिया और सभी को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई।

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आरोप है कि नजीब की मां फातिमा के साथ धक्का-मुक्की की गई और जबरन घसीटकर गाड़ी में बैठाया गया। इस दौरान उन्हें चोटें आई हैं। छात्रों पर लाठीचार्ज भी की गई। यहां प्रदर्शनकारियों व पुलिस की धक्कामुक्का में नजीब की मां गिर गईं। चौतरफा हो रहे निंदा को देखते हुए पुलिस प्रवक्ता ने रविवार रात ही स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इंडिया गेट पर धारा 144 लागू होने से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को रोका गया था और उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए कहा गया लेकिन वे इन बातों को अनसुना कर इंडिया गेट की ओर बढ़ने लगे। इसमें नजीब की मां भी शामिल थीं। पुलिस नजीब की मां फातिमा के साथ जेएनयू के छात्रों के एक समूह को बस से मायापुरी पुलिस स्टेशन ले गई। नजीब की मां के साथ चार महिला पुलिसकर्मी मौजूद थी।

बाद में उन्हें घर छोड़ दिया गया। इस दौरान किसी भी प्रकार की बदसलूकी नहीं हुई। पुलिस की ओर से कोई बल प्रयोग व किसी से कोई हाथापाई नहीं की गई है। ध्यान रहे कि रामकिशन ग्रेवाल की खुदकुशी के मामले में भी इस तरह की स्थिति देखने को मिली थी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपने समर्थकों के साथ राममनोहर लोहिया अस्पताल जैसे ही पहुंचे पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और मंदिर मार्ग थाने ले आई। वहां बढ़ती भीड़ को देखते हुए उन्हें संसद मार्ग थाने ले जाया गया। इस बीच कार्यकर्ताओं के साथ पुलिसिया कार्रवाई जारी रही। तब भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की और लाठी चार्ज हुई है जिससे कई नेताओं को गंभीर चोटें आईं। सवाल उठाए गए कि सैनिक की खुदकुशी के बाद उनके परिजनों से मिलना लोकतांत्रिक अधिकार है, ऐसे में इस दौरान पुलिसिया कार्रवाई की क्या जरूरत थी। जबकि तब भी पुलिस प्रवक्ता का कहना था कि यह कार्रवाई बढ़ती भीड़ को देखते हुए की गई थी। किसी को कोई चोटें नहीं पहुंचाई गई। जो भी हुआ कानून सम्मत कार्रवाई हुआ था।

 

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First Published on November 8, 2016 4:07 am

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