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हड़ताली शिक्षकों की सैलरी काटे जाने के विवाद पर अब फैकल्टी मेंबर्स और जेएनयू प्रशासन आमने-सामने

'काम नहीं तो पगार नहीं' के सिद्धांत पर यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन उन शिक्षकों का उस दिन का वेतन और भत्ता काटेगा जो 17 जनवरी को एक दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए थे।
जेएनयू विश्वविद्यालय (express File Pic)

देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक बार फिर माहौल गर्म है। इस बार जेएनयू प्रशासन और फैकल्टी मेंबर्स के बीच तनातनी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक नोटिस जारी कर कहा है कि जिन-जिन शिक्षकों ने 17 जनवरी को आयोजित एक दिवसीय हड़ताल में अपनी उपस्थिति दी थी उनका एक दिन का वेतन काट लिया जाएगा। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने एक नोटिस जारी कर कहा है, काम नहीं तो पगार नहीं के सिद्धांत पर यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन उन शिक्षकों का उस दिन का वेतन और भत्ता काटेगा जो 17 जनवरी को एक दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए थे।

यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस आदेश का जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (जेएनयूटीए) ने विरोध किया है। एसोसिएशन ने कहा है कि हमलोग सरकारी सिविल सर्वेंन्ट नहीं है कि इसलिए हम पर सेंट्रल सिविल सर्विस रूल लागू नहीं होता है। जेएनयूटीए अध्यक्ष अजय पटनायक ने कहा, “पहले तो उन्होंने हमें इसलिए नोटिस भेजा कि हमलोगों ने छात्रों को संबोधित किया और अब हमें धमकी दे रहे हैं कि सैलरी काट लेंगे। यूनिवर्सिटी टीचर सेंट्रल सिविल सर्विस रूल के तहत नहीं आते हैं जिसे वो हम पर लागू करना चाहते हैं।”

इस बीच जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि जहां यूनिवर्सिटी में इस तरह के नियम पहले से नहीं हैं वहां सेंट्रल सिविल सर्विस रूल लागू होता है। यूनिवर्सिटी ने पांच प्रोफेसर्स को नोटिस जारी किया है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के नियमों की अनदेखी की है और प्रशासनिक भवन के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित किया है। प्रशासनिक भवन के बाहर किसी तरह का प्रदर्शन प्रतिबंधित है।

गौरतलब है कि 17 जनवरी को जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने यूनिवर्सिटी द्वारा फैकल्टी मेंबर्स को जारी उन नोटिसों के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था जिसमें कहा गया था कि शिक्षकों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को क्यों संबोधित किया? इससे पहले यूनिवर्सिटी के छात्रों ने काउंसिल की मीटिंग में लिए गए फैसले के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया था जिसे शिक्षकों ने भी संबोधित किया था।

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