May 25, 2017

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जेएनयू में ‘दशानन दहन’ की जांच का आदेश, PM मोदी का जलाया गया था पुतला

दशानन बनाकर जिन पुतलों को परिसर में जलाया गया उनमें से एक पर विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश कुमार का मुखौटा भी लगाया गया था।

Author नई दिल्ली | October 14, 2016 02:36 am
विजयदशमी के अवसर पर जेएनयू कैंपस स्थित साबरमती ढाबे पर एनएसयूआई स्टूडेंट्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामदेव समेत अन्य भाजपा नेताओं के पुतले जलाए।

दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं के पुतले एनएसयूआइ की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में जलाए जाने की घटना की जांच के आदेश जेएनयू प्रशासन ने दिए हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। उधर, अखिल भारतीय विधार्थी परिषद (एबीवीपी) सहित कई नेताओं को दशानन बनाकर प्रधानमंत्री सहित दस लोगों का पुतला दहन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उत्तम नगर के पूर्व निगम पार्षद अचल शर्मा ने विदांपुर थाने में एक शिकायत देकर जेएनयू के एनएसयूआइ नेता सनी धीमान व अन्य के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

मंगलवार देर रात को दशानन बनाकर जिन पुतलों को परिसर में जलाया गया उनमें से एक पर विश्वविद्यालय  के कुलपति जगदीश कुमार का मुखौटा भी लगाया गया था। जगदीश कुमार ने कहा कि पुतले जलाने की घटना की जांच का आदेश दे दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को देख रहा है। इससे एक हफ्ते पहले विश्वविद्यालय ने गुजरात सरकार और गौरक्षकों के पुतले जलाए जाने के मामले में प्रॉक्टर से जांच करवाने के आदेश दिए थे। इससे संबंधित छात्रों व उनके संगठन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

इससे पहले गुरुवार को जेएनयू कैंपस उबलता रहा। परिषद ने इस कृत्य के खिलाफ प्रदर्शन किया। परिषद के जेएनयू विंग के छात्रों ने कहा कि विजयादशमी के दिन जेएनयू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया जाना ओछी राजनीति व घटिया मानसिकता को दर्शाता है। परिषद के नेताओं ने एनएसयूआइ पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस छात्र संगठन को नोटा से भी कम वोट मिले होंं, जिसका कोई वजूद न हो वह इस तरह की हरकतों से सुर्खियां बटोरना चाहता है।

बता दें कि देशभर में दशहरे पर जहां ज्यादातर स्थानों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और विभिन्न आतंकी संगठनों के मुखियाओं के चेहरे लगाए गए थे वहीं कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ ने प्रधानमंत्री और भाजपा प्रमुख अमित शाह के पुतले रावण के तौर पर जलाए। हालांकि उन्होंने इसे दशहरे व रावण से न जोड़ने की अपील की और दावा किया कि यह पुतला दहन असत्य पर सत्य की जीत को आगे बढ़ाने का नजरिया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा केंद्र की ओर से विश्वविद्यालय का सम्मान नहीं करने और देश भर के शैक्षणिक संस्थानों पर लगातार किए जा रहे हमलों के विरोध में किया गया है। प्रधानमंत्री और अमित शाह के अलावा जलाए गए पुतलों पर योग गुरु रामदेव, साध्वी प्रज्ञा, नाथूराम गोडसे, आसाराम बापू और विश्वविद्यालय के कुलपति की तस्वीरें भी थीं।

इसी साल नौ फरवरी को जेएनयू के वाम छात्र संगठनों के एक समूह ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के सह संस्थापक मकबूल भट की याद में एक कार्यक्रम कर उनका महिमामंडन किया था। इस दौरान हुई देश विरोधी नारेबाजी और वाम-परिषद झड़पों ने देश में नई बहस छेड़ दी थी। इतना ही नहीं नारेबाजी का वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था। जेएनयू छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार, व उमर खालिद और अनिर्बान समेत कुछ लोगों की देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी हुई और बाद में जमानत मिले।

 

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First Published on October 14, 2016 2:36 am

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