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दिल्ली मेरी दिल्ली: आप को राहत, समय का फेर

400 फाइलों में से दो सौ ही वापस दिल्ली सरकार को लौटाने से यह संदेश जा रहा है कि इनमें काफी गड़बड़ी मिली है।
Author December 26, 2016 03:50 am
अरविंद केजरीवाल

आप को राहत
आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के चेहरे आजकल खिल से गए हैं। उपराज्यपाल नजीब जंग ने आप सरकार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों से जुड़ी 400 फाइलों की जांच के लिए पूर्व सीएजी वीके शुंगलू की अगुवाई में जांच कमेटी बनाई। उस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंप दी। 400 फाइलों में से दो सौ ही वापस दिल्ली सरकार को लौटाने से यह संदेश जा रहा है कि इनमें काफी गड़बड़ी मिली है। उस कमेटी ने आप की सरकार और उसके नेताओं को असहज कर दिया था। रिपोर्ट सार्वजनिक करने से पहले ही जंग के इस्तीफा देने से आप को बड़ी राहत मिली है। भले ही कांग्रेस के इस आरोप में दम न हो कि उसे कमजोर करने के लिए भाजपा ने आप के साथ समझौता किया, लेकिन जरूरी नहीं है कि नया उपराज्यपाल वही करेगा जो पहले वाले ने किया। मुमकिन है कि वह आप के संबंधों की नए सिरे से व्याख्या कर दे। खैर जो होना है वह तो होगा ही, लेकिन तब तक के लिए तो आप को फौरी राहत मिल ही गई है।
समय का फेर
राजनीति भी क्या चीज है, जिसको आप जी भर पर गालियां देते हैं, एक समय आता है कि उसकी तारीफ करने के लिए नए-नए शब्द गढ़ने पड़ते हैं। साढेÞ तीन साल तक दिल्ली के उपराज्यपाल रहे नजीब जंग के लिए अब तक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर उनकी पार्टी के छुटभैये नेता तक ऐसे-ऐसे अपशब्द कहते थे कि कोई भी सभ्य समाज शरमा जाए। लेकिन दो दिन पहले नजीब जंग के उपराज्यपाल के पद से इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सारे गिले-शिकवे भुलाकर या कहें कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए उनके सरकारी आवास राजनिवास पर पहुंच गए और अब तक के सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। जिस जुबान से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री अब तक उपराज्यपाल के लिए बयानों के बाण छोड़ते थे, उसी जुबान से उन्होंने जंग को जाते-जाते भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

उलटा पड़ा दांव
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरे दिसंबर देश के अलग-अलग राज्यों में नोटबंदी के खिलाफ अलख जगाते नजर आए। कभी उत्तर प्रदेश, कभी झारखंड, कभी मध्यप्रदेश, तो कभी राजस्थान, लेकिन अपने ही प्रदेश दिल्ली में एक बड़ी रैली को छोड़ केजरीवाल और कहीं नजर नहीं आए। जनता से इस असहज दूरी के बीच हाल ही में उन्होंने सोचा क्यों न गेस्ट टीचरों से सीधा संवाद कर उन्हें सैलरी बढ़ाने की खुशखबरी भी दे दी जाए और अपना समर्थन भी आंक लिया जाए। लेकिन दांव उलटा पड़ा, जैसे ही उन्होंने उपराज्यपाल का नाम लिया, गेस्ट टीचर न केवल भाषण के बीच से ही लौटने लगे, बल्कि नारेबाजी और प्रदर्शन भी किया। जनता के सामने उपराज्यपाल की दुहाई देते रहने से काम नहीं चलेगा, यह अहसास उन्हें हुआ या नहीं, यह तो समय के साथ ही पता चलेगा, लेकिन उपराज्यपाल के इस्तीफे पर उनकी बेहद संतुलित और संवेदनशील प्रतिक्रिया काफी कुछ बयान कर रही है।

आमदनी का जरिया
खुले में कूड़ा फेंकने या जलाने पर रोक की आड़ में प्राधिकरण के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लोगों को परेशान करने लगे हैं। आरोप है कि सड़क के किनारे रेहड़ी या दुकान लगाने वालों से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने महीनेवार शुल्क लेना शुरू कर दिया है और शुल्क नहीं देने पर वे मनमाने तरीके से चालान काट रहे हैं। नोटबंदी के बाद कम दुकानदारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मनमानी के कारण काफी लोगों ने सड़क किनारे दुकान लगाना बंद कर दिया है। ऐसे मामलों की शिकायतों पर प्राधिकरण के उच्चाधिकारी भी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। खास बात यह है कि रेहड़ी-पटरी वाले ही नहीं, बल्कि बड़ी दुकान चलाने और खुले में कूड़ा नहीं फेंकने वालों से भी जबरदस्ती उगाही की जा रही है। राष्ट्रीय हरित पंचाट (एनजीटी) ने खुले में कूड़ा फेंकने और जलाने पर रोक लगा रखी है। इसकी रोकथाम की जिम्मेदारी प्राधिकरण के स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन उसने इसे आमदनी का जरिया बना लिया है।

बहादुरी पर सवाल
दिल्ली पुलिस यूं तो चालान काटने में देश के अन्य राज्यों की पुलिस से ज्यादा तेज है और बात अगर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की हो तब तो पुलिस वाले किसी को भी नहीं छोड़ते। पुलिस के इस बर्ताव की दिल्ली वाले तारीफ करते नहीं अघाते। लेकिन वही पुलिसवाले सड़क पर जाम लगने के वक्त अंतर्ध्यान हो जाते हैं तो उनकी बहादुरी पर सवाल उठना तो लाजमी है। ऐसे में दिल्ली वालों को आए दिन जाम से दो-चार होना पड़ता है। बीते दिनों पूर्वी दिल्ली के धर्मशिला अस्पताल के पास जाम के दौरान एक व्यक्ति ने इस वाकए को बेहतरीन तरीके से बयां किया। सामान्य कद-काठी के उस व्यक्ति ने ट्रैफिक पुलिस के चालान काटने के साहसिक कदम की तारीफ की, लेकिन लगे हाथ उसने जाम को लेकर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समय कोई पुलिसवाला नहीं मिलेगा क्योंकि उन्हें पता है कि अभी उनके साहसिक कदम की अग्नि परीक्षा होने वाली है। जाम में फंसे और लोग कुछ और तो कर नहीं सकते थे, तो बस मुस्कुरा कर रह गए।
-बेदिल

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