March 25, 2017

ताज़ा खबर

 

दिल्ली मेरी दिल्ली: नाकारेपन पर सफाई

ऐसे हो गए कि जो काम इस महामारी के शुरू होने पर नहीं हुए वे सुप्रीम कोर्ट की फटकार से शुरू हो गए।

Author October 10, 2016 03:52 am
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

उद्घाटन का प्रेशर

वाहवाही लूटने कोशिश में कई बार पूरा महकमा ही हास्य का पात्र बन जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ बीते दिनों जंतर-मंतर पर। यहां एनडीएमसी ने एक नया सार्वजनिक शौचालय बनाया है। दो अक्तूबर को आनन-फानन में इसका उद्घाटन कर दिया गया। वहां प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान वाला एक बड़ा सा पोस्टर भी लगा दिया गया। फूलों से सजाए गए इस शौचालय को निर्धारित तारीख (2 अक्तूबर) को जनता के लिए खोल भी दिया गया, लेकिन शौचालय शुरू हुआ बिना पानी के! किसी ने बताया कि उद्घाटन का प्रेशर था और समय कम था, इसलिए मोटर नहीं लग पाई, लेकिन जल्द ही लग जाएगी। फिर कैसे प्रबंधन हो रहा है? बेदिल के इस सवाल पर जवाब मिला- ‘अंदर लिखा हुआ है न! ध्यान दें, पानी नहीं है।’

उल्टा पड़ा दांव

इस बार आम आदमी पार्टी (आप) के सर्वेसर्वा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दांव उल्टा पड़ गया। केंद्र सरकार को घेरने के लिए पिछले हफ्ते उन्होंने दिल्ली विधानसभा की विशेष बैठक बुलाई। संयोग से उसके ठीक पहले भारतीय सेना ने सीमा पार के आतंकवादियों को मारने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की। इसके बाद केजरीवाल ने विधानसभा की बैठक का एजंडा बदल दिया और प्रधानमंत्री व भारतीय सेना की दिल खोल कर तारीफ की। बाद में उन्हें लगा कि समीकरण बदल रहे हैं शायद इसी के कारण उन्होंने दूसरे ही दिन हमले का सबूत मांगना शुरू कर दिया। केजरीवाल को इस बात का अंदाजा नहीं था उनकी यह मांग कि देश, खास करके पंजाब के लोगों को नागवार गुजरेगी, जहां हर घर में सैनिक हैं। इसके बाद वे इस मुद्दे पर सफाई देने लगे। सफाई के अलावा वे दनादन सेना के पक्ष में बयान देकर डैमेज कंट्रोल में जुट गए। देशभक्ति की बात करने वाले केजरीवाल के इस बयान की पाकिस्तान में भले ही तारीफ हुई हो, लेकिन आप की तो फजीहत ही हुई है।

नाकारेपन पर सफाई

दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के आतंक पर सुप्रीम कोर्ट की डांट से बचने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त स्वास्थ्य सचिव की गर्दन फंसाने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को उनकी बात में दम नहीं लगा और उसने उन पर ही जुर्माना ठोंक दिया। हालात ऐसे हो गए कि जो काम इस महामारी के शुरू होने पर नहीं हुए वे सुप्रीम कोर्ट की फटकार से शुरू हो गए। अब तो सत्येंद्र जैन की आवाज रेडियो पर भी सुनाई पड़ रही है और दिल्ली में इन रोगों से बचाव वाले होर्डिंस भी लगे दिख रहे हैं। दिल्ली सरकार को सहयोग न करने वाले अधिकारियों के नाम बताने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का भी जैन ने फायदा उठाना चाहा लेकिन जिस तरह से दिल्ली सरकार ने डेंगू-चिकनगुनिया पर नकारापन दिखाया, उससे सुप्रीम कोर्ट को उनकी बात जरा भी रास नहीं आई।

शांति की तलाश

केजरीवाल बनाम मोदी, केजरीवाल बनाम नजीब जंग, आप बनाम भाजपा…। दिल्ली के सत्ता के गलियारों में मचे इस शोर से केवल जनता ही निराश नहीं है, बल्कि दिल्ली सचिवालय के अधिकारी भी हैरान हैं। वे भी इस इंतजार में हैं कि राजनीतिक दंगल की धूल हटे तो कामकाज पर थोड़ा ध्यान दे पाएं। जहां जनता इस शोर-शराबे के बीच विकास की बातें सुनने को तरस रही है, वहीं अधिकारी भी अपने कामों के निपटारे के लिए थोड़ी सी शांति की तलाश में हैं, लेकिन डेंगू-चिकनगुनिया के मच्छरों के डंक से घायल जिस दिल्ली को चंद दिनों के लिए मिले सुर मेरा तुम्हारा सुनने को मिला था, उसे फिर से राजनीतिक तू-तू मैं-मैं सुनने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जुगाड़ जिंदाबाद

पुलिस आयुक्त धड़ाधड़ फेरबदल कर रहे हैं तो वहीं जुगाड़ू पुलिस अधिकारी अपने तबादले रुकवाने में भी लगे हुए हैं। दो सौ से ज्यादा पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादले में कुछ ने अपनी मनमाफिक जगह पर रहने का जुगाड़ निकाल भी लिया है। बेदिल को मिली जानकारी के मुताबिक सब कुछ जुगाड़ पर निर्भर है। दरअसल जिनका अपने आला अधिकारी से सीधा संबंध है वे मुख्यालय में अनुरोध भेजकर यह कहलवाने में सफल हो जाते हैं कि अभी इनकी जरूरत इसी थाने में है। अनुरोध के बाद पुलिस मुख्यालय भी यह मानने लगता है कि जब जिले के उपायुक्त अनुरोध कर रहे हैं तो बात पक्की होगी। पर उसके उलट क्या होता है यह तो पुलिस वाले ही जानते हैं।
-बेदिल

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 10, 2016 3:52 am

  1. No Comments.

सबसे ज्‍यादा पढ़ी गईंं खबरें

सबरंग