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HRD ने किया ISBN संख्या लेने के लिए अब नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने हाल ही में किताबों के लिए आइएसबीएन देने की प्रक्रिया में सुधार किया है।
Author नई दिल्ली | August 8, 2017 03:42 am
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने हाल ही में किताबों के लिए आइएसबीएन देने की प्रक्रिया में सुधार किया है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह प्रक्रिया अब इतनी आसान हो गई है कि जिस संख्या को लेने में पहले महीनों लग जाते थे, वह जुलाई से 2-3 दिनों में मिल जा रही है।  आइएसबीएन किसी किताब के पीछे छपी 13 अंकों की विशिष्ट संख्या होती है। इसे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबरिंग या अंतरराष्टÑीय मानक पुस्तक क्रमांकन भी कहा जाता है। इसमें किताब के प्रकाशक और कॉपीराइट जैसी जरूरी जानकारी कोड नंबरों में दी जाती है। इस नंबर को लेने के लिए प्रकाशकों को अब तक खासा इंतजार करना पड़ता था। पिछले साल अप्रैल में आॅनलाइन की गई प्रक्रिया के बाद यह इंतजार और बढ़ गया था। अंतरराष्ट्रीय आइएसबीएन एजंसी ने इस साल मई में एमएचआरडी को इस बाबत चेतावनी भी दी थी।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘पहले लोगों को डिजिटल प्रक्रिया की आदत नहीं थी, जिससे देर होती थी। डिजिटल प्रक्रिया में सुधार की जरूरत थी जो अब कर लिया गया है। आॅनलाइन प्रक्रिया को उपभोक्ताओं के अनुकूल बनाया गया है और अब 2-3 दिनों में ही आइएसबीएन नंबर मिल जाता है जिसमें पहले 3-4 महीने लग जाते थे।’ अधिकारी ने कहा कि अब लोगों से अनावश्यक दस्तावेज भी नहीं लिया जा रहा है, केवल आज की तारीख में मान्य कोई एक फोटो पहचान पत्र लिया जा रहा है। अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि इस प्रक्रिया के लिए आधार अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जुलाई से सरलीकृत प्रक्रिया लागू है और अप्रैल 2016 से अब तक कुल 117260 आइएसबीएन नंबर आबंटित किए जा चुके हैं, जिसमें से केवल 49198 इस्तेमाल में आए हैं।

इसी साल फरवरी में कुछ प्रकाशकों ने एमएचआरडी को पत्र लिखकर आइएसबीएन देने की प्रक्रिया में देरी संबंधी शिकायत की थी। उसके बाद 29 मार्च को लंदन स्थित अंतरराष्ट्रीय आइएसबीएन एजंसी ने एमएचआरडी को चेतावनी दी थी कि ये शिकायतें अस्वीकार्य हैं और एजंसी मंत्रालय से आइएसबीएन प्रदान करने का अधिकार वापस ले सकती है। भारत में आइएसबीएन संख्या प्रदान करने का अधिकार एमएचआरडी के तहत आने वाली राजा राममोहन राय नेशनल एजंसी को है।  जेपी प्रकाशक के प्रोडक्शन प्रमुख सुनील डोगरा ने इस बात की पुष्टि की कि प्रक्रिया अब आसान हो गई है। उन्होंने कहा कि वे पिछले नौ साल से अपनी प्रकाशनकंपनी का आइएसबीएन देख रहे हैं, लेकिन आज यह बेहद सरल है, सुबह आवेदन करते हैं तो शाम तक मिल जाता है। जब डिजिटल नहीं हुआ था तो 1000 संख्याएं मिल जाती थीं, लेकिन डिजिटल होने पर 100 ही मिल पाती थीं। लेकिन इस बार 300 संख्याएं मिली हैं और शृंखला जारी रहने से अब पुन: आवेदन और दस्तावेज देने से मुक्ति मिल गई है।’ राजा राममोहन राय नेशनल एजंसी के मुताबिक, आबंटित आइएसबीएन संख्या के 90 फीसद खत्म हो जाने के बाद पुन: आवेदन कर सकते हैं।

हालांकि, आइएसबीएन संख्या कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह प्रकाशकों, विक्रेताओं और पुस्तकालयों के लिए सुविधाजनक संख्या है और आज के समय में इस संख्या के बगैर किसी किताब की कल्पना थोड़ी मुश्किल है। लोगों में पठन-पाठन की रुचि में कमी की प्रवृत्ति के बावजूद देश में प्रकाशन के कारोबार में बढ़ोतरी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में यह सेक्टर 6.76 बिलियन डॉलर का है और 2020 तक इसमें 19.3 फीसद की औसत यौगिक वार्षिक वृद्धि का आकलन है, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में अगले पांच साल में केवल 2 फीसद बढ़ोतरी की संभावना है। ऐसे में भारतीय प्रकाशकों के लिए आइएसबीएन संख्या का महत्त्व समझा जा सकता है।

 

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