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हिंदी मेरी मातृभाषा नहीं, पर बोलने में गर्व: रिजीजू

हिंदी मेरी मातृभाषा नहीं है, लेकिन इस भाषा को बोलने में मुझे गर्व की अनुभूति होती है। यह बात केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही।
Author नई दिल्ली | September 15, 2017 00:21 am
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू

हिंदी मेरी मातृभाषा नहीं है, लेकिन इस भाषा को बोलने में मुझे गर्व की अनुभूति होती है। यह बात केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा – मेरे राज्य (अरुणाचल प्रदेश) में बड़े पैमाने पर हिंदी बोली जाती है और सभी वर्गों के लोग इस भाषा का प्रयोग करते हैं। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को हिंदीभाषी लोगों से कहा कि देश में हिंदी को और लोकप्रिय बनाने के लिए वे क्षेत्रीय भाषाओं और उन्हें बोलने वालों को और जगह दें और सम्मान दें। उन्होंने कहा कि हिंदी कई दशक पहले आधिकारिक भाषा बन चुकी है। इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में हिंदी को आज भी लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

इस कार्यक्रम में गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। सिंह ने कहा कि हिंदी को और समृद्ध बनाया जा सकता है बशर्ते इसे बोलने वाले अन्य भाषाओं के शब्दों का भी इस्तेमाल करें। उन्होंने बंगलुरु मेट्रो की हाल की घटना का जिक्र किया जिसमें रेलवे सेवा में हिंदी भाषा के संकेतकों का कन्नड़ समर्थक समूहों ने विरोध किया था। इसके अलावा तमिलनाडु
में हिंदी के विरोध में प्रदर्शन भी हुए थे। इनका जिक्र करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि उन पर हिंदी थोपी जा रही है। कोविंद ने कहा – गैर हिंदीभाषी लोग चाहते हैं कि हम (हिंदीभाषी) उनकी भाषाओं की ओर समुचित ध्यान दें। हिंदीभाषी लोगों को अन्य भाषाओं को भी जगह देनी चाहिए। गैर हिंदीभाषी लोगों और क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान देना हम सबकी जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि हिंदीभाषी लोगों को किसी तमिलभाषी व्यक्ति का अभिवादन ‘वड़क्कम’ कहकर, किसी सिख का अभिवादन ‘सत श्री अकाल’ कहकर और किसी मुसलिम का अभिवादन ‘आदाब’ कहकर करना चाहिए। उन्हें किसी तेलगुभाषी व्यक्ति को ‘गारू’ कहकर संबोधित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं और संस्कृतियों को अपनाने से देश और लोगों को एकजुट करने में मदद मिलेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि हाल में बेलारूस के राष्ट्रपति एजी लुकाशेंको के सम्मान में आयोजित भोज में अपने संबोधन को समाप्त करते हुए उन्होंने धन्यवाद के लिए रूसी शब्द ‘स्पासिबा’ का प्रयोग किया था। अतिथि इससे इतने खुश हुए कि उन्होंने इसका जवाब ‘जय हिंद’ कहकर दिया। लुकाशेंको ने घोषणा की है कि इस महीने से देश के सरकारी विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाएगी। कोविंद ने वकीलों और चिकित्सकों से भी कहा कि वे कामकाज की भाषा के तौर पर हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि भारत में लोग वकीलों और चिकित्सकों की भाषा नहीं समझते। अदालतों में अब धीरे-धीरे हिंदी और अन्य भाषाएं बोली जाने लगी हैं। इसी तरह यदि चिकित्सक अपने परचे देवनागरी और अन्य भाषाओं में देने लगें तो चिकित्सक व मरीज के बीच की दूरी कम हो जाएगी। इस अवसर पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदी देश को जोड़ने वाली भाषा है और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को साथ लाने में इस भाषा ने मदद दी है।

उन्होंने कहा – हमें (हिंदीभाषी लोग) क्षेत्रीय भाषाओं के लोकप्रिय शब्दों को स्वीकार करना चाहिए और उनका इस्तेमाल करना चाहिए। हम ऐसा करेंगे तो इससे भाषा समृद्ध होगी। हिंदी को देश की आधिकारिक भाषा बनाने में महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक जैसे गैर हिंदीभाषी लोगों का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने ऐसे लोगों पर भी सवाल उठाए जो कहते हैं कि भारत को आर्थिक शक्ति बनाने के लिए अंग्रेजी जरूरी है। सिंह ने कहा – जो लोग यह कहते हैं कि अंग्रेजी के बगैर भारत आर्थिक शक्ति नहीं बन सकता है, ऐसे लोगों से मैं पूछना चाहता हूं कि मेंडेरिन भाषा बोलने वाला चीन आर्थिक शक्ति कैसे बन गया।

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