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स्कूल सील करते वक्त पुलिस की मौजूदगी पर सवाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में गैर सरकारी सहायता प्राप्त एक निजी स्कूल की दो शाखाओं को सील करने की प्रक्रिया के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी पर सवाल उठाया।
Author नई दिल्ली | August 11, 2016 01:37 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में गैर सरकारी सहायता प्राप्त एक निजी स्कूल की दो शाखाओं को सील करने की प्रक्रिया के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी पर सवाल उठाया। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के पीठ ने कहा, ‘क्यों पुलिस की बल के रूप में जरूरत थी। यह बच्चों का स्कूल है और आप वहां एसडीएम और पुलिस के साथ जाते हैं जब आपके पास अदालत का आदेश है। किसने इसके लिए अधिकृत किया’।

अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि शिक्षा निदेशालय के वकील को संभवत: विभाग ने गलत निर्देश दिया क्योंकि अदालत को सूचित किया गया था कि मैक्सफोर्ट स्कूल के सिर्फ रिकॉर्ड रूम को सील किया जा रहा है जबकि पीतमपुरा शाखा में प्रक्रिया की वीडियो के अनुसार, ‘ऐसा लगता है कि समूचे स्कूल को सील किया जा रहा है’।

न्यायाधीश ने कहा, ‘वीडियो (पीतमपुरा शाखा) इस बात का संकेत देता है कि समूचे स्कूल को सील किया जा रहा है’। अदालत ने साथ ही कहा कि स्कूल जाने के लिए उसके द्वारा नियुक्त दो स्थानीय आयुक्तों में से एक ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि डीओई के अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया और उनके साथ बदसलूकी की और मैक्सफोर्ट स्कूल की रोहिणी शाखा की वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रति भी उन्हें प्रदान नहीं की।

डीओई ने अपने बचाव में कहा कि पुलिस को एहतियात के तौर पर ले जाया गया क्योंकि स्कूल अधिकारियों की तरफ से आक्रामक बर्ताव की आशंका थी। पीठ ने हालांकि इससे असहमति जताई और कहा कि पीतमपुरा शाखा की वीडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार किसी भी तरफ से आक्रामकता नहीं थी और इसलिए पुलिस की कोई आवश्यकता नहीं थी। अदालत ने इसके बाद डीओई को निर्देश दिया कि वह स्कूल की रोहिणी शाखा की सीलिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड में पेश करे।

उसने विभाग को यह भी निर्देश दिया कि वह स्कूल द्वारा दायर याचिकाओं पर जवाब दाखिल करे जिसमें उसने स्कूल का अधिग्रहण करने के सरकार के कदम को चुनौती दी है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 23 अगस्त तय कर दी। अदालत ने स्कूल द्वारा दायर दो अवमानना याचिकाओं पर भी उसी दिन सुनवाई की तारीख तय की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सीलिंग अभियान तीन अगस्त को कई घंटे तक चला जबकि अदालत ने ऐसा नहीं करने का आदेश दिया था।

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