December 06, 2016

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नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर बरसे हरीश रावत, जेटली को चिट्ठी लिख कहा- राज्य में उद्योग-धंधे हो रहे हैं चौपट

रावत ने कहा कि नोटबंदी से किसान भी बहुत ज्यादा परेशान है। सब्जियों और अनाज की बिक्री भी 40 से 45 फीसद तक कम हुई है।

Author देहरादून | November 28, 2016 04:36 am
हरीश रावत

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नोटबंदी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। रावत ने कहा कि नोटबंदी से उत्तराखंड को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हमने नोटबंदी से राज्य को होने वाले नुकसान का जो आकलन किया था और अब जो आकलन किया है, उसमें जमीन आसमान का अंतर है। नए आकलन के अनुसार राज्य को बहुत अधिक आर्थिक नुकसान होने वाला है।  रावत रविवार को यहां अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। रावत ने कहा कि नोटबंदी का नुकसान राज्य को हर क्षेत्र में झेलना पड़ रहा है। हमें पहले उम्मीद थी कि नोटों की समस्या एक हफते में निपट जाएगी। परंतु केंद्र सरकार की अदूरदर्शी आर्थिक नीतियों के चलते यह समस्या अब जल्द समाप्त होने वाली नहीं है। जिस तरह से बाजार ठप पड़े हैं और टैक्स पर असर पड़ रहा है, उसे देखते हुए राज्य का पर्यटन भी भारी नुकसान उठा रहा है। रावत ने कहा कि राज्य के उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। चारधाम यात्रा भी नोटबंदी के चलते अत्यधिक प्रभावित हुई है। वरना चारधाम यात्रा के आखिरी दिनों में एक-दो लाख श्रद्धालु उत्तराखंड में और आ सकते थे। रावत ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दो हजार रुपए का नोट भी एक पहेली बना हुआ है। क्योंकि यह नोट ऐसा कौन सा विमान है जो देश को ऊपर ले जाएगा। दो हजार के इस नोट ने खरीददारों को पंगू बना दिया है।

रावत ने कहा कि नोटबंदी से किसान भी बहुत ज्यादा परेशान है। सब्जियों और अनाज की बिक्री भी 40 से 45 फीसद तक कम हुई है। किसानों को सब्जियों का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। रावत ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री राज्य के पैसे पर कुंडली मार कर बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पुराने माल को केंद्र के मंत्री बेचने में लगे हुए हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गैरसैंण में भी कोई नई घोषण नहीं की। केंद्रीय रेल मंत्री प्रभु पर कटाक्ष करते हुए रावत ने कहा कि वे कम से कम गैरसैंण में एक गैस्ट हाउस बनाने की घोषणा ही कर जाते।
रावत ने कहा कि केंद्र के कई मंत्री उत्तराखंड के दौरे पर आए ओर झूठी घोषणाएं करके चले गए और भाजपा के नेता गाली गलौच की भाषा पर उतर आए हैं। उन्होंने भाजपा का नया नामकरण करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी अब गाली गलौच वाली पार्टी हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री उत्तराखंड में आकर बड़ी-बड़ी योजनाओं के लिए धन की स्वीकृति की बात तो कर जाते है, परंतु धनराशि रिलीज नहीं करते। उमा भारती ने नमामि गंगे योजना के नाम पर सात सौ करोड़ रुपए उत्तराखंड को आज तक नहीं दिए। इसी तरह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी 132 करोड़ रुपए दबाए बैठे हैं और धर्मेंद्र प्रधान ने भी 50 करोड़ रुपए भी राज्य को नहीं दिए।

रावत ने कहा कि भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की देहरादून और अल्मोड़ा की रैली की नाकामी से बुरी तरह बौखलाई हुई है। भाजपा के नेताओं में झूठ बोलने की प्रतियोगिता लगी हुई है। उन्होंने भाजपा के इन आरोपों खारिज किया कि मैंने राज्य को लूटा है। उन्होंने कहा कि 2007 से अब तक के कोई भी मुख्यमंत्री के साथ वे अपनी संपत्ति की अदला-बदली करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को उत्तराखंड की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में सबक सिखाएगी।जेटली को पत्र लिखा रावत ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर आरबीआइ की ओर से सहकारी बैंकों पर लगाई गई वित्तीय पाबंदियों से राहत दिलाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि पर्वतीय राज्यों में एक बडी आबादी सहकारी बैंकिंग प्रणाली पर निर्भर है। वहां सरकारी बैंकों पर तमाम वित्तीय पाबंदियों से जनजीवन, कृषि गतिविधियों पर खासा असर पड़ा है। कालेधन को लेकर नोटबंदी एक अच्छा कदम है, लेकिन इसके लिए पूर्व में तैयारियां भी उसी होनी चाहिए थी।

रावत ने लिखा है उत्तराखंड पर नोटबंदी के कारण पर्यटन, राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। राज्य के ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों में ज्यादातर किसान सहकारी बैंकों पर निर्भर है। जिन किसानों के पास नकदी थी, वे इस नकदी को अपने खाते में जमा नहीं कर पा रहे हैं। और अब रबी की फसल लगाने का समय आ गया है। और सहकारी बैंकों से बीज, खाद के लिए भी किसान कर्जा नहीं ले पा रहे हैं। यदि उन्हें कर्जा नहीं मिला तो फसलों के उत्पादन पर इसका सीधा असर पडेÞगा। साथ ही रावत ने राष्टÑीय कृषि और ग्रामीण बैंक नाबार्ड से निर्धारित 900 करोड़ के अलावा 300 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराने को कहा। इस धन का इस्तेमाल राज्य में सड़क, सिंचाई, पेयजल, कृषि, बागवानी, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए किया जाएगा। उन्होंने 1400 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता अगले वित्तीय वर्ष के लिए प्रमुख विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

उन्होंने नाबार्ड के अधिकारियों से कहा कि अगले वित्तीय वर्ष के प्रास्पेक्टिव प्लान की रूप रेखा तय करने में संबंधित विभागों का सहयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से नाबार्ड से अतिरिक्त धनराशि से संबंधित प्रस्तावों, अगले वर्ष की योजनाओं पर व्यापक रूप से चर्चा कर इस दिशा में प्रभावी पहल सुनिश्चित करने को कहा। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डीएन मगर ने राज्य हित से जुडी योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत को सभी आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

 

 

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First Published on November 28, 2016 4:36 am

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