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केजरीवाल पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा

शिक्षकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और भाषण का बहिष्कार करते हुए बाहर निकलने लगे।
Author नई दिल्ली | December 22, 2016 01:27 am
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बीजेपी और एबीवीपी पर लगाया देश विरोधी नारे लगवाने का आरोप। (PTI File Photo)

दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर झूठा होने का आरोप लगाते हुए छत्रसाल स्टेडियम में उनके भाषण का बहिष्कार किया। नाराज शिक्षकों ने स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन भी किया और छत्रसाल स्टेडियम की ओर जाने वाले रिंग रोड लिए जाम भी कर दिया। हालात कुछ वक्त के लिए इतने खराब हो गए कि वहां पुलिस बल बुलाना पड़ा। लोगों भीड़ को तिरबितर करने के लिए पानी की बौछारों का भी प्रयोग करना पड़ा।  यह वाकया तब हुआ जब स्टेडियम में दिल्ली सरकार की ओर से अतिथि शिक्षकों के सम्मेलन का कार्यक्रम शुरू हुआ। दिल्ली के शिक्षक उनके वेतन वृद्धि और छुट्टियों संबंधी प्रस्ताव लागू किए जाने का समय जानने को उतावले थे। लगभग 11 हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों और स्कूल प्रमुख इस सम्मेलन में सुबह से सारे काम छोड़ कर इसमे शामिल होने आए थे। घोषणाओं की उम्मीद के बीच अरविंद केजरीवाल का भाषण शुरू हुआ लेकिन थोड़ी ही देर शिक्षकों का सब्र जवाब दे रहा था। लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री केजरीवाल ने यह कहा कि दिल्ली कैबिनेट से पारित प्रस्ताव को मंजूरी के लिए उपराज्यपाल को भेजा है तो शिक्षकों के सब्र का बांध टूट गया।

शिक्षकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और भाषण का बहिष्कार करते हुए बाहर निकलने लगे। इसके बाद केजरीवाल ने राजनीतिक पैतरा बदला और हुए तुरंत मंच से ही आश्वासन दिया कि शिक्षकों का हक लड़कर लेंगे। इस मामले में तेजी दिखाते हुए मामले को संभालने की कोशिश की और यह भी कहा कि खुद एलजी से मिल कर अतिथि शिक्षकों के हित में बिल पास करवाएंगे। लेकिन अतिथि शिक्षकों का सब्र टूट चुका था। हालात और ज्यादा बिगड़ते उससे पहले मुख्यमंत्री ने वहां चुप होना ही बेहतर समझा। इधर अतिथि शिक्षकों का गुस्सा उबाल पर था। उन्होंने मुख्यमंत्री पर झूठा होने का आरोप लगाते लगाया और बीच में भाषण का बहिष्कार कर जाने लगे। अतिथि शिक्षकों के एक झुंड ने कहा, ‘इन घोषणाओं को तो दो साल हो गए हैं, केवल वादों और बातों से क्या होता है, झूठा सीएम है।’ रीना, महेश, विजेद्र, वंदना और विपिन ने अपने स्कूल का नाम न लेते हुए कहा, ‘केजरीवाल ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया, दो साल से यही बात कह रहे हैं, बात तो तब होती जब एलजी से फाइल साइन करवा कर यहीं ले आते, यह सीएम का बड़बोलापन है।’ एक अन्य गेस्ट टीचर अनिल कुमार ने कहा, ‘पहले दिवाली पर तोहफा दे रहे थे, अब नए साल पर, लेकिन तारीख नहीं बता रहे। 5092 सेवानिवृत शिक्षकों की 42 हजार पर बहाली कर दी क्या उसके लिए एलजी की मंजूरी नहीं चाहिए।’

बकौल अतिथि शिक्षक बुधवार को स्कूल का कामकाज छोड़कर स्टेडियम 12 बजे पहुंचने का मेमो जारी किया गया था। वहीं सुबह की पाली के शिक्षक क्लास लेने के बाद आए थे। एक शिक्षक ने बताया, ‘यह छात्रों के हितों से खिलवाड़ है, निठारी के एक स्कूल को आज बंद करना पड़ा क्योंकि वह स्कूल अतिथि शिक्षकों के कंधे पर ही चल रहा है।’ इससे पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और अतिथि शिक्षकों के संबंध में कई लुभावनी घोषणाएं की। उन्होंने कहा, ‘अब अतिथि शिक्षक का स्टेटस बदलकर अनुबंध शिक्षक हो जाएगा, वेतन बढ़ जाएगा, सुविधाएं बढ़ जाएंगी, स्थायी करने की फाइल पर भी काम हो रहा है, तब तक अनुबंध पर आप काम करेंगे, यह देश में एकमात्र सरकार है जो शिक्षकों को सम्मान और अधिकार देती है।

 

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