December 08, 2016

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नोटबंदी से फीकी हुई ‘ग्रे मार्केट’ की चकाचौंध

करोल बाग स्थित गफ्फार मार्केट में जहां तिल रखने की जगह नहीं होती थी वहां आज सन्नाटा पसरा है।

हजार रुपए का नोट।

नोटबंदी के फैसले ने यूं तो हर खासो आम को प्रभावित किया है। दिल्ली में स्थित देश का सबसे बड़ा ‘ग्रे मार्केट’ (विदेशी सामानों का बाजार) भी इससे अछूता नहीं है। करोल बाग स्थित गफ्फार मार्केट में जहां तिल रखने की जगह नहीं होती थी वहां आज सन्नाटा पसरा है। यह बाजार देश के ग्रे मार्केट की सबसे बड़ी मंडी है। जहां पेन से लेकर बड़े से बड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलता है। 8 नवंबर से पहले जहां सामान के बारे में जानकारी और दाम पूछने के लिए इंतजार करना पड़ता था, वहां आज दुकानदार पूरे-पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं। इस मंडी में ज्यादातर चीन, थाईलैंड, सिंगापुर, श्रीलंका, मलेशिया, जापान, कोरिया के अलावा यूरोपीय देशों का वह सामान भी मिलता है जो देश के अन्य स्थानों पर शायद बड़ी मुश्किल से मिलता हो। 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से दिल्ली आए लोगों को सरकार ने अपना धंधा जमाने के लिए यहां दुकानें आबंटित की थीं जिसका नाम गफ्फार मार्केट था। यहां करीब 550 दुकानें हैं जिनमें से ज्यादातर दुकानदारों के दादा-परदादा को सरकार ने यहां बसने के लिए दुकानें आबंटित की थीं। मौजूदा समय में यहां दुकानदारों की तीसरी-चौथी पीढ़ी धंधा कर रही है।

गफ्फार मार्केट में क्रॉकरी, कपड़ा, रंग रसायन, कॉस्मेटिक व ज्वैलरी का सामान मिलता है। इससे सटी एमसीडी मार्केट में ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक का सामान और ठीक सामने टिपटॉप मार्केट में क्रॉकरी और मोबाइल व उससे जुड़ा सामान मिलता है। इन तीनों मार्केटों को ग्रे मार्केट कहा जाता है। बाजार में ग्रे सामान उसे कहते हैं, जो विदेशी होता है। यहां पर जितनी कम कीमत पर मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक का सामान व क्रॉकरी मिल जाती है, उसी सामान की करीब दोगुनी कीमत राजधानी की दूसरी दुकानों पर देखी जा सकती है। करोल बाग मेट्रो स्टेशन पर जहां पहले रिक्शा, बैटरी रिक्शा व थ्रीव्हीलर के जरिए गफ्फार मार्केट जाने वालों का तांता लगा रहता था, वहीं अब वहां जाने वाली सवारियों की संख्या में काफी कमी आई है।गफ्फार मार्केट में क्रॉकरी का सामान बेचने वाले दुकानदार सरदार सतेंद्र सिंह मंगलवार सुबह से ही दुकान खोलने के बाद ग्राहकों का इंतजार करते दिखे। उन्होंने बताया कि ये दुकान उनके परदादा ने खरीदी थी, जब वे पाकिस्तान के रावलपिंडी से दिल्ली आए थे। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के बड़े बुजुर्ग बताते थे, कि जब यहां पर व्यापार शुरू किया, तो दिनभर खरीदारों का इंतजार करना पड़ता था। बरसों पहले यहां पर खरीदार ही नहीं होते थे। सिंह ने कहा कि नोटबंदी के बाद भी स्थिति कमोबेश वैसी ही है। यहां पर करीब 95 फीसद व्यापार खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि सुबह काफी उम्मीदों से वे लोग दुकान खोलते हैं और देरशाम मायूस होकर बंद कर देते हैं।

यहां पर रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाने वाले दलजीत सिंह भी काफी निराश दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह शादियों का मौसम होने के कारण यह समय उनके धंधे का था। उन्होंने कहा कि सरकार को यह कदम फरवरी के आसपास उठाना चाहिए था। पहले से ही वैट और जीएसटी के चक्रव्यूह में फंसा व्यापारी अब नोटबंदी में उलझकर रह गया है। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान पर ज्यादातर खरीदार पुरानी करंंसी से सामान खरीदने आ रहे हैं, लेकिन उनके एसोसिएशन ने किसी को भी पुरानी करंसी पर सामान बेचने से मना कर दिया है।
गफ्फार मार्केट के ही व्यापारी विवेश ने कहा कि बाजार में ज्यादातर दुकानदार विदेशी सामानों का व्यापार करते हैं। इन सामानों की खरीद-फरोख्त बिना किसी बिल के होती है। सरकार ने जिस तरह की सख्ती से यह कदम उठाया है उन्हें अब सारी खरीद-फरोख्त बिल पर्चे से ही करनी पड़ेगी। विवेश बताते हैं कि इस बाजार में आने वाले ग्राहक बिलिंग सिस्टम से बचना चाहते हैं ताकि उन्हें वैट का भुगतान न करना पड़े। गफ्फार मार्केट से सटा एमसीडी मार्केट मोबाइल एक्सेसरीज की बड़ी मंडी है, जहां ज्यादातर लोग मोबाइल कवर, बैटरी चार्जिंग केबल खरीदने आते हैं। यहां के दुकानदारों के एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश चित्तकारा ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उनके धंधे में अब उठान कब आएगा। उन्होंने कहा कि 20 दिन पहले उनके पास खाना खाने का भी समय नहीं होता था, लेकिन अब सभी दुकानदारों के पास समय ही समय है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर दुकानदार प्रधानमंत्री के नोटबंदी को लेकर उठाए गए कदमों में उनके साथ हैं, लेकिन सरकार को व्यापारियों के बारे में भी सोचना चाहिए था।

 

नोटबंदी के कारण प्रभावित हुआ पर्यटन क्षेत्र

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First Published on November 30, 2016 5:15 am

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