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पत्रकार गौरी लंकेश की बेरहमी से हत्‍या पर चुप क्‍यों हैं पीएम नरेंद्र मोदी? केंद्रीय मंत्री ने बताई वजह

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''भारत सरकार, भाजपा और हमसे जुड़ा कोई संगठन इस हत्या में लिप्त नहीं है।"
Author September 7, 2017 10:05 am
स्‍वतंत्रता दिवस समारोह के दौराल लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo: PTI)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भाजपा और पार्टी से जुड़ा कोई संगठन पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में शामिल नहीं है। गडकरी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बहुत गैर जिम्मेदाराना है कि अपराध के लिए दूसरे राजनीतिक दलों के ‘अध्यक्ष’ भाजपा को दोषी ठहरा रहे हैं। गडकरी ने हत्या पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर हो रही आलोचना पर उनका बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सभी मामलों पर प्रतिक्रिया नहीं कर सकते। गडकरी ने कहा, “हत्या की उचित जांच होनी चाहिए। दोषी को जेल में होना चाहिए। भारत सरकार, भाजपा और हमसे जुड़ा कोई संगठन इस हत्या में लिप्त नहीं है।” गडकरी ने कहा, “एक राजीनितक दल के अध्यक्ष ने इस घटना पर गैर जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वह आरोप आधारहीन है और झूठा है। यह लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।” गडकरी ने उन लोगों की भी आलोचना की, जो इस हत्या पर मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। गडकरी ने कहा कि मोदी देश से बाहर हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने प्रतिक्रिया नहीं दी और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्रधानमंत्री हर चीज पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।”

गडकरी ने कहा, “कर्नाटक की कानून-व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जो कांग्रेस के हाथों में है। इसके लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया जाना गलत है।” बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हत्या की निंदा करते हुए कहा था कि यह एक जीता जागता उदाहरण है कि समाज में असहिष्णुता और कट्टरता अपना बदसूरत सिर उठा रही है।

जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि जो भी भाजपा के खिलाफ बोलेगा, उसे चुप करा दिया जाएगा। मंगलवार रात 55 साल की वरिष्ठ कन्नड़ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की अज्ञात बदमाशों ने उनके घर के सामने ही गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी।

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  1. K
    Kiran Prakash Gupta
    Sep 7, 2017 at 10:52 am
    हत्या एक निंदनीय घटना है चाहे यह किसी की हो।लेकिन दुर्भाग्य से हत्याओ का वर्गीकरण हो जाता है।नेता और पत्रकार की हत्या का एक वर्ग और सुरक्षा वलो की हत्या का एक वर्ग बना दिया जाता है स्वयं को लिबरल कहने वालो द्वारा।इसी कारण किसी हत्या पर दो वर्ग बन गया है।
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    1. जीवन लाल यादव
      Sep 6, 2017 at 9:11 pm
      सत्ता और व्यवस्था को उंगलियों पर नचाने का खेल शुरू हो चुका है!ऐसी हत्याओं के विरोध को हम दाभोलकर पंसारे कल ्गी की तरह भुला देंगे तो कड़ी चलती रहेगी!भगतसिंह की ओर से उनके जन्मदिवस पर सरकारों से पूछना चाहिए कि उन्हें सरकार में बने रहने का अधिकार कैसे यदि वे नागरिक सुरक्षा नहीं दे सकते!न हत्यारों का पता लगा सकते!
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      सबरंग