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दो साल की ‘उड़ान’ में चार छात्राओं का आइआइटी प्रवेश

स्कूली शिक्षा और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की पढ़ाई के अंतर को कम करने के लिए सीबीएसई ने वर्ष 2014-15 में ‘उड़ान’ योजना की शुरुआत की थी।
Author नई दिल्ली | August 30, 2017 02:34 am
प्रतीकात्मक तस्वीर (Source: Agency)

केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘उड़ान’ के माध्यम से दो सालों (2014-15 और 2015-16) में सिर्फ चार छात्राओं ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) में दाखिला लिया। इन दो सालों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने प्रति वर्ष एक हजार छात्राओं के हिसाब से दो हजार छात्राओं को देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई थी लेकिन आइआइटी में दाखिला लेने वाली छात्राओं का आंकड़ा 0.2 फीसद को ही छू पाया। जबकि इन दो सालों में उड़ान योजना पर 21.72 करोड़ रुपए खर्च हुए। ये तथ्य सूचना अधिकार कानून के तहत मांगी जानकारी में सामने आए हैं।

आरटीआइ के जवाब में सीबीएसई ने बताया कि ‘उड़ानह्ण योजना के तहत इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाली छात्राओं में से पहले साल यानी वर्ष 2014-15 में 341 छात्राओं ने इंजीनियरिंग की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)-मुख्य पास की। इनमें से 114 छात्राओं ने आइआइटी में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा जेईई-एडवांस में क्वालीफाई किया लेकिन इस वर्ष सिर्फ एक छात्रा ने आइआइटी में दाखिला लिया। इसी तरह वर्ष 2015-16 में 376 छात्राओं ने जेईई-मुख्य परीक्षा पास की और इनमें से 143 ने जेईई-एडवांस परीक्षा में क्वालीफाई किया लेकिन आइआइटी में दाखिला लिया केवल तीन छात्राओं ने। 2016-17 में जेईई-मुख्य परीक्षा को पास करने वाली ‘उड़ान’ की छात्राओं की संख्या वर्ष 2015-16 के मुकाबले 68 फीसद बढ़कर 632 हो गई लेकिन जेईई-एडवांस में क्वालीफाई होने वाली छात्राओं की संख्या कम होकर 135 हो गई।  हालांकि आरटीआइ के जवाब में वर्ष 2016-17 के दौरान आइआइटी में प्रवेश लेने वाली छात्राओं की संख्या नहीं बताई गई है।

2014-15 में शुरू हुई ‘उड़ान’
स्कूली शिक्षा और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की पढ़ाई के अंतर को कम करने के लिए सीबीएसई ने वर्ष 2014-15 में ‘उड़ान’ योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत कक्षा 11 और 12 की लड़कियों को आॅनलाइन और आॅफलाइन माध्यम से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्राओं की संख्या को बढ़ाना इसका प्रमुख मकसद है। ‘उड़ान’ के लिए हर वर्ष देश भर से 1,000 छात्राओं का चयन योग्यता और आवश्यकता के आधार पर किया जाता है। चयनित छात्राओं की तैयारी के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।इन छात्राओं को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए वीडियो और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। छात्राओं को टैबलेट खरीदने में सीबीएसई वित्तीय सहायता भी देता है। इन टैबलेट के जरिए छात्राएं परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर पाती हैं। इन लड़कियों के अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए बोर्ड समय-समय पर उनका मार्गदर्शन भी करता है। ‘उड़ान’ की कक्षाओं में 75 फीसद उपस्थिति वाली छात्राएं यदि केंद्र सरकार के इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रौद्योगिकी संस्थान, आइआइटी, एनआइटी में प्रवेश के लिए चुनी जाती हैं तो उनका प्रवेश शुल्क, फीस और छात्रावास व्यय सरकार देती है।

 

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