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रक्षा सौदों में विदेशी कंपनियां नियुक्त कर सकेंगी एजंट

मनोहर पर्रीकर ने कहा है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द ही विदेशी कंपनियों को एजंट नियुक्त करने की अनुमति देगी, लेकिन कंपनियों..
Author नई दिल्ली | November 16, 2015 01:04 am
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (पीटीआई फाइल फोटो)

रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द ही विदेशी कंपनियों को एजंट नियुक्त करने की अनुमति देगी, लेकिन कंपनियों को पहले से उल्लेख करना होगा कि वे उन्हें ‘उचित’ पारिश्रमिक का भुगतान किया करेंगी और उन्हें खैरात में कोई बोनस या सफलता शुल्क प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

एजंटों और बिचौलियों में अंतर को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ‘धोखाधड़ी’ के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ेगी । पर्रीकर ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘एजंटों का मतलब बिचौलिया नहीं है। इस बात की गुंजाइश होगी कि कंपनी अपना प्रतिनिधित्व करने या तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए उचित शुल्क का भुगतान कर एजंट की नियुक्ति कर सके जिसका उल्लेख पहले से करना होगा।’ उन्होंने कहा कि नई रक्षा खरीद प्रक्रिया पूरी होने के अंतिम चरण में है और यह एजंटों की भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगी।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर सहमति जताई कि एजंटों के लिए कानूनी रूप से पहले से ही एक प्रावधान मौजूद है, लेकिन कहा, ‘लघु रूप में, एजंट शब्द वहां था, किन्तु यह स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं था कि उसकी भूमिका क्या होगी । यह अच्छी तरह से परिभाषित नहीं था। उसे उचित तरह से परिभाषित किया जा रहा है।’

रक्षामंत्री ने कहा कि एजंटों की नियुक्ति का मतलब यह नहीं है कि कमीशन या ऐसी कोई चीज देने के लिए रक्षा कंपनियों को अनुमति दी जाएगी। पर्रीकर ने कहा, ‘कई बार आप कार्यालय नहीं खोल सकते क्योंकि व्यवसाय का अनुपात कार्यालय रखने को उचित नहीं ठहराता। इसलिए आप यहां कैसे काम करेंगे? आप हर समय यहां विदेश से किसी व्यक्ति को नहीं भेज सकते। इसलिए यह प्रावधान है, लेकिन यह किसी धोखेबाजी की अनुमति नहीं देता।’ उन्होंने कहा कि एजंट के शुल्क के बारे में पहले से उल्लेख करना होगा और सफलता शुल्क, बोनस या इस तरह के किसी अन्य भुगतान की इजाजत नहीं दी जाएगी।

पर्रीकर ने कहा, ‘यहां तक कि विफलता के लिए कोई अर्थदंड भी नहीं होगा। कई बार पहले से आप कुछ दे देते हैं और फिर काम नहीं होने पर जुर्माने के जरिए उसे वापस ले लेते हैं।’ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के कदम से बहुप्रतीक्षित पारदर्शिता आएगी।

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