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दिल्ली: मां की हत्या, बेटा आरोपी और खिंचती पुलिसिया जांच

पुलिस 15 दिन बाद भी यह तय नहीं कर पा रही कि बेटे को कानून के मुताबिक गिरफ्तार कर हत्यारोपी बनाएं या फिर उसे इसी तरह हिरासत में लेकर पूछताछ जारी रखा जाए।
Author नई दिल्ली | October 12, 2016 03:43 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

राजधानी दिल्ली में दिनदहाड़े एक बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हुई हत्या की गुत्थी नहीं सुलझ रही। राजधानी की आधुनिक पुलिस 15 दिन बाद भी यह तय नहीं कर पा रही कि बेटे को कानून के मुताबिक गिरफ्तार कर हत्यारोपी बनाएं या फिर उसे इसी तरह हिरासत में लेकर पूछताछ जारी रखा जाए।  इस बीच, पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अपनी मां की हत्या से जितना दुखी नहीं हैं उससे ज्यादा पुलिसिया रवैए से परेशान हैं। उनका आरोप है कि मां की हत्या का संदेह उनके बेटे पर है तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दे पर उसे 15 दिनों से थाने में पूछताछ के बहाने प्रताड़ित करने का क्या मतलब? पीड़ित परिवार ने कोर्ट से भी अर्जी लगाई है। रेंज के संयुक्त आयुक्त दीपेंद्र पाठक से भी आपबीती सुनाई गई पर वहां से भी उन्हें कोई सटीक जवाब नहीं मिला। इस बाबत जब दक्षिण-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र कुमार से ‘जनसत्ता संवाददाता’ ने पूछा तो उनका कहना था कि सुनैना अग्रवाल की हत्या में उसके बेटे तरुण अग्रवाल उर्फ अंश पर संदेह है। उसके बयान विरोधाभासी हैं। उसे पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। सीसीटीवी सहित सारे रेकार्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस हत्या के खुलासे के लिए कानून के मुताबिक कार्रवाई कर रही है और आगे भी करेगी।


मामला द्वारका दक्षिण थाने के पालम एक्सटेंशन का है। 26 सितंबर को दिन में 58 साल की सुनैना अग्रवाल की पालम एक्सटेंशन के उसके किराए के घर में ही संदिग्ध रूप में लाश मिली थी। सुनैना के पति रवींद्र पाल अग्रवाल की मौत करीब पांच साल पहले हो गई है। सुनैना का बड़ा बेटा विकास अग्रवाल उत्तमनगर के राजापुरी जबकि बेटी श्वेता शारश्वत द्वारका में परिवार के साथ रहती है। छोटा बेटा तरुण ही मां के साथ रहता था और द्वारका के रिवांता स्मार्ट सिटी निवेश ग्रुप में काम करता है। तरुण की कमाई के अलावा उसके बड़े भाई और बड़ी बहन भी समय-समय पर मां का खर्चा वहन करते थे। सुनैना के मुंह में प्लास्टिक ठूंसकर फिर उनकी गला दबाकर हत्या की गई थी। सुनैना के बड़े बेटे विकास ने बताया कि हम मां की हत्या से जितना सदमे में नहीं हैं उससे ज्यादा छोटे भाई तरुण की पुलिस हिरासत से परेशान हैं। हत्या को सिलसिलेवार तरीके से बताते हुए कहा कि तरुण 26 सितंबर की सुबह साढ़े दस बजे द्वारका स्थित अपने दफ्तर चला गया। उसके दफ्तर में बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज होती है।

दोपहर करीब सवा दो बजे उसने मां से फोन पर बात कर खाना खाने के लिए आने की बात कही। मां ने कहा कि वह अपना खाना बाहर से ही ले आए उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही। शाम करीब चार बजे मोटरसाइकिल से घर आया। दूसरी मंजिल के अपने कमरे पर गया तो गेट लगा हुआ था। उसने ही सबसे पहले मां का शव देखा। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में रखवाने के बाद चश्मदीद के नाम पर तरुण से पूछताछ कर जांच शुरू कर दी। दूसरे दिन सुनैना के अंतिम संस्कार के लिए तरुण को छोड़ा गया और फिर उससे पूछताछ शुरू की गई। विकास का कहना है कि पिछली 28 सितंबर से तरुण से लगातार पूछताछ हो रही है। लेकिन पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। उसकी प्रताड़ना से परेशान परिजन द्वारका कोर्ट में गए तो दूसरे दिन पुलिस ने जवाब दिया कि तरुण को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। उसके बयान विरोधाभासी हैं। लिहाजा पुलिस हत्या की सच्चाई का पता लगाने के लिए उससे पूछताछ कर रही है।

 

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