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डूटा: तैयारी पूरी, अब शिक्षकों की बारी

करीब एक महीने के कैंपस-कॉलेजों में प्रचार के बाद तमाम शिक्षक नेताओं ने अखिरी समय में खुद को जिताने की अपील की है।
Author नई दिल्ली | August 31, 2017 03:15 am
दिल्ली विश्वविद्यालय

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) चुनाव में अब शिक्षक मतदाताओं की बारी है। करीब एक महीने के कैंपस-कॉलेजों में प्रचार के बाद तमाम शिक्षक नेताओं ने अखिरी समय में खुद को जिताने की अपील की है। लेकिन डीयू के शिक्षक मतदाताओं ने किसकी सुनी इसका फैसला 31 अगस्त को होगा। वोट को लेकर डीयू प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। ज्यादातर कॉलेजों ने मतदान को लेकर कक्षाएं निलंबित रखने का फैसला किया है।  डूटा चुनाव अधिकारी उज्जवल कुमार सिंह ने कहा-मतदान फीसद बढ़ाने के लिए आखिरी दिन दो फैसले लिए गए हैं। कॉलेजों व विभाग के अध्यक्षों से कक्षाएं निलंबित रखने की अपील की गई। साथ ही यह तय किया गया कि किसी वजह से अगर नए शिक्षक मतदाताओं को परिचयपत्र नहीं मिल पाया तो भी उन्हें दूसरी वैकल्पिक व्यवस्थाओं (प्राचार्य व विभागध्यक्ष से सत्यापित पत्र) के आधार पर वोट डाल सकेंगे। उन्होंने डूटा चुनाव में सभी शिक्षक सदस्यों से इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर लोकतंत्र को मजबूत बनाने की अपील की है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक डूटा की नई टीम के लिए मतदान गुरुवार सुबह 10 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय (उत्तरी परिसर) में होगा। उसी दिन शाम साढ़े छह बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। परिणाम देर रात तक आने की संभावना है।

इस बार डूटा अध्यक्ष पद पर चार और कार्यकारिणी के लिए 19 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के 9685 शिक्षक वोटर, डूटा अध्यक्ष व 15 कार्यकारिणी सदस्यों के लिए वोट करेंगे। मतगणना के समय मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत नहीं है। चुनाव प्रचार पूरी तरह से मंगलवार शाम को बंद हो गया था।शिक्षक नेता व विद्वत परिषद के सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा-मजबूर डूटा नहीं बल्कि मजबूत डूटा चुनें। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचकर मतदान करें। वामपंथी शिक्षक संगठन डीटीएफ से अध्यक्ष पद के दावेदार किरोड़ीमल कॉलेज के राजीव रे ने चुनाव पूर्व जारी अपील में कहा कि सरकार की कैंपस विरोधी नीतियों को रोकने में साथ देने के लिए अब समर्थन का वक्त आ गया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सोचना होगा कि वह कैसा वातावरण चाहते हैं? शिक्षक तय करें कि क्या वे सरकार के विश्वविद्यालय में मनमाना हस्तक्षेप को डीयू में रोके रखना चाहते हैं या नहीं? भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा वाले डीयू के शिक्षक संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) से डॉक्टर वीएस नेगी ने मतदाताओं से अपील कि शिक्षक ऐसी टीम लाएं जो सरकार से बेहतर तालमेल बैठाकर उनके तमाम लंबित मुद्दों का सार्थक हल निकाल सकें। वह तय करें कि ‘केवल विरोध चाहिए या समाधान’। जबकि एएडी और युटीएफ के अध्यक्ष पद के साझा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में डटे एसएस राणा की शिक्षक मतदाताओं से अपील है कि वे इस बार मतदान को केवल रस्मअदायगी नहीं बल्कि प्रगति के नजरिए से देखें।

 

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