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कोई सेल्फी ले रहा तो कोई मरोड़ रहा दशानन की मूंछ, तितारपुर की रावण मंडी में लगा पुतलों का मेला

रावण मंडी में पांच से लेकर 70 फीट तक के पुतले बनाए जाते हैं। 70 फीट का पुतला विशेष रूप से तितारपुर गांव के लिए ही बनाया जाता है।
Author नई दिल्ली | October 9, 2016 04:24 am
नोएडा के बिसरख गांव में बने रावण के मंदिर में हुई तोड़फोड़। (प्रतिकात्मक फोटो)

दिल्ली की रावण मंडी में हर साल कई तरह के रावण के पुतले बनाए जाते हैं, लेकिन इस साल पहली बार ‘आतंकवादी पाकिस्तान’ के भी पुतले बनाए जा रहे हैं। ये पुतले राजधानी की कई रामलीलाओं की समितियों ने और अन्य राज्यों की समितियों ने बनवाए हैं। इस मंडी में पहले भी आतंकवाद के पुतले बनते आए हैं, लेकिन इस बार खासतौर पर आतंकवादी पाकिस्तान के पुतले बन रहे हैं।  दिल्ली में रावण मंडी राजौरी गार्डन के करीब तितारपुर गांव में है। गांव के ज्यादातर रहने वाले पुतले बनाने के पुश्तैनी धंधे से जुड़े हुए हैं। रावण मंडी में हर साल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनते रहे हैं। बीते साल भी यहां पांच से छह हजार पुतले बने थे, लेकिन यहां के लोगों का मानना है कि इस बार यह आंकड़ा दस हजार के पार जाएगा। दशहरे के वक्त राजौरी गार्डन से लेकर सुभाष नगर तक सड़क के दोनों ओर पुतले खड़े देखे जा सकते हैं। सड़क के किनारों पर रखे ये पुतले यहां से गुजरने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। लोग अपने वाहनों को रोककर इन पुतलों के साथ सेल्फी ले रहें हैं। छोटे बच्चे हों या बड़े, कोई रावण की मूंछों को छेड़ता है, तो कोई कुंभकर्ण के मुखौटे पर हाथ फेर कर खुश हो लेता है। पश्चिमी दिल्ली के तितारपुर गांव में बरसों से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बन रहे हैं।

इस रावण मंडी में पांच से लेकर 70 फीट तक के पुतले बनाए जाते हैं। 70 फीट का पुतला विशेष रूप से तितारपुर गांव के लिए ही बनाया जाता है। एक पुतला कारीगर रोहित ने बताया कि गांव में पुतला जलाने से पहले रावण की विधिवत पूजा होती है। उस पूजा के बाद ही रावण का दहन किया जाता है। पुतले बनाने के लिए सबसे पहले बांस का ढांचा खड़ा किया जाता है। उस ढांचे को तार से बांधा जाता है और उस पर कपड़ा व रंगीन कागज चढ़ाया जाता है। इसके बाद अंत में पुतलों पर रंग किया जाता है। एक अन्य कारीगर संजय ने बताया कि वे लोग हर साल दशहरे का इंतजार करते हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर पांच हजार रुपए से लेकर 50 हजार रुपए तक के पुतले बनते हैं। उन्होंने बताया कि उनका काम सिर्फ पुतले बनाना होता है। उसके बाद उसमें बम-पटाखे रखने का काम दूसरे कारीगर करते हैं। पुतलों में लड़ी, अनार, गोला बम और आतिशबाजी रखी जाती है। रावण के पुतले में सिर्फ गोला बम ही रखा जाता हैं। पांच फीट के पुतले में करीबन 500 गोले रखे जाते हैं और 70 फीट के पुतले में करीब तीन हजार गोले रखे जाते हैं। पुतले बनाने वाले कारीगर इन दिनों बारिश नहीं होने के लिए भी पूजा करते हैं, क्योंकि इनके सभी पुतले तकरीबन तैयार स्थिति में सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं और बारिश की वजह से इनके भीगने की आशंका रहती है।

 

 

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First Published on October 9, 2016 4:24 am

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