December 08, 2016

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दिल्ली: इस दिवाली सांसों में गया ज्यादा जहर

धुंध के कारण सुबह दृश्यता 200 मीटर पर पहुंच गई।

Author नई दिल्ली | November 1, 2016 04:19 am
दिवाली पर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर को पार कर गया था।

दीपावली के पटाखों का धुआं, आर्द्रता और हवा का नामोनिशान नहीं। इस सब ने मिलकर दिल्ली में हवा को बेहद प्रदूषित कर दिया। इसकी वजह से शहर में धुंध की मोटी परत छा गई। सांस के साथ शरीर में प्रवेश करने वाले प्रदूषण तत्त्व खतरनाक स्तर पर पहुंच गए। धुंध के कारण सुबह दृश्यता 200 मीटर पर पहुंच गई। दिल्ली सरकार ने भी माना कि पिछले तीन साल के मुकाबले इस दिवाली पर सांसों में ज्यादा जहरीली हवा पहुंची। वहीं, विशेषज्ञों ने कहा कि अब जागरूकता भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि कड़े कदम उठाने का वक्त आ गया है। अगर सुरक्षित स्तर से तुलना करें तो साफ है कि दिल्ली में प्रदूषण स्तर 14 से 16 गुना ज्यादा रहा। सबसे अधिक प्रदूषित जगह आनंद विहार ही रही लेकिन शांति पथ जैसे इलाके में अमेरिकी दूतावास के पास महीन प्रदूषण कणों की मात्रा कई गुना अधिक पाई गई।

सोमवार तड़के काफी छोटे प्रदूषण तत्वों (पीएम2.5 से पीएम10) का स्तर बेहद खतरनाक हो गया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पुणे स्थित सफर (सिस्टम आॅफ एयर क्वालिटी ऐंड वेदर फोरकास्टिंग ऐंड रिसर्च) ने इसका अंदेशा पहले ही जता दिया था। सफर के प्रोजेक्ट निदेशक गुरफान बेग ने इससे पूर्व कहा था, ‘30 और 31 अक्तूबर की रात 11 बजे से तीन बजे के बीच पीएम10 और पीएम2.5 उच्चतम स्तर पर पहुंच सकते हैं। 31 अक्तूबर को हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होगी। एक नवंबर से इसमें थोड़ा-थोड़ा सुधारा आने लगेगा।’

इस दिवाली पटाखों को प्रयोग कम कर अपने फेफड़ों को राहत दें

दो साल में सबसे ज्यादा
दिल्ली सरकार के मुताबिक दिवाली वाले दिन 2016 में प्रदूषण बाकी पेज 10 पर  का स्तर दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर रहा- पीएम2.5 (महीन प्रदूषण तत्त्व)  दिवाली -2016 में शहर में औसत प्रदूषण सघनता (24 घंटे) 180 माइक्रोग्राम/एम3 से 440 माइक्रोग्राम/एम3 रही। इस बार आनंद विहार में ज्यादा और आइजीआइ एअरपोर्ट में कम प्रदूषण रहा। वहीं दिवाली 2015 में शहर में औसत प्रदूषण सघनता (24 घंटे) 184 माइक्रोग्राम/एम3 से 369 माइक्रोग्राम/एम3 रही थी। तब आरके पुरम में ज्यादा और सिविल लाइंस में कम औसत प्रदूषण सघनता थी।

पीएम10 (बड़े प्रदूषण तत्त्व)

दिवाली 2016 में औसत सघनता (24 घंटे) में 448माइक्रोग्राम/एम3 से 939 माइक्रोग्राम/एम3 रही। मंदिर मार्ग में कम और आनंद विहार में यह मात्रा अधिक रही। दिवाली 2015 में यह औसत सघनता 296 माइक्रोग्राम/एम3 से 778 माइक्रोग्राम/एम3 रही। निम्नतम एअरपोर्ट और अधिकतम आनंद विहार में प्रदूषण रहा। दिवाली 2014 में औसत सघनता 421माइक्रोग्राम/एम3 से 790माइक्रोग्राम/एम3 रही थी।
14 से 16 गुना ज्यादा

पीएम2.5 (महीन प्रदूषण तत्त्व)

तड़के दो बजे आनंद विहार में पीएम2.5 का स्तर 883 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और आरके पुरम में 748 माइक्रोग्राम था।
सुरक्षित स्तर : दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के मुताबिक पीएम2.5 का सुरक्षित स्तर 60 माइक्रोग्राम होता है। यानी तय स्तर से 14 गुना प्रदूषण रहा।

पीएम10 (बड़े प्रदूषण तत्त्व)

तड़के लगभग दो बजे पीएम10 के स्तर ने आरके पुरम और आनंद विहार समेत शहर के कई इलाकों में 1,000 माइक्रोग्राम के निशान को पार कर लिया।
सुरक्षित स्तर : पीएम10 का यह स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर माना जाता है। यानी तय सीमा से 16 गुना प्रदूषण दर्ज किया गया।
शांति पथ: शांति पथ जैसे इलाके, जहां प्रदूषण बहुत ज्यादा होने पर भी आमतौर पर वायु की गुणवत्ता मध्यम स्तर की बनी रहती है वहां भी अमेरिकी दूतावास की प्रदूषण जांच में पीएम 2.5 का स्तर अधिकतम की श्रेणी से भी कहीं अधिक का था।

दृश्यता : सफदरगंज वेधशाला में आधिकारिक दृश्यता 200 मीटर दर्ज की गई लेकिन सुबह के समय शहर के कई इलाकों में दृश्यता शून्य थी। यहां तक कि भूमिगत मेट्रो स्टेशनों में भी काफी धुआं भरा हुआ था।

बाहर निकलने से बचें
शहर की हवा पर नजर रखने वाली एजेंसी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के लगभग सभी निगरानी स्टेशनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘काफी खराब’ दर्ज किया गया। सुरक्षित स्तर से कहीं ज्यादा स्तर पर पहुंच चुके पीएम2.5 और पीएम10 के संपर्क में लंबे समय तक रहने से श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि ये कण बेहद छोटे होते हैं, फेफड़ों में गहरे तक चले जाते हैं और खून में मिल जाते हैं। सफर और सीपीसीबी ने परामर्श जारी किया है कि जब भी वायु की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब हो तो लोगों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। ये बच्चों, बुजुर्गों और हृदय व फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए घातक है।

 

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First Published on November 1, 2016 4:15 am

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