ताज़ा खबर
 

जानें विवादों से घिरे धौैलपुर महल का सच

इस तथ्य से बहुत कम लोग ही परिचित होंगे कि दिल्ली स्थित संघ लोक सेवा आयोग की इमारत धौैलपुर हाउस (यूपीएससी) और धौलपुर स्थित राजनिवास पैलेस में एक बड़ी समानता यह है...
Author June 30, 2015 13:44 pm
हाल ही में ललित मोदी प्रकरण के चलते धौलपुर स्थित जो राजनिवास पैलेस होटल विवाद में आया है, यह कभी उनकी संपत्ति हुआ करती थी।

इस तथ्य से बहुत कम लोग ही परिचित होंगे कि दिल्ली स्थित संघ लोक सेवा आयोग की इमारत धौैलपुर हाउस (यूपीएससी) और धौलपुर स्थित राजनिवास पैलेस में एक बड़ी समानता यह है कि दोनों के पूर्व मालिक एक ही हैं। यह दोनों ही भवन कभी राजा हेमंत सिंह की संपत्तियां हुआ करती थीं, जो कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूर्व पति व सांसद दुष्यंत सिंह के पिता हैं।

हाल ही में ललित मोदी प्रकरण के चलते धौलपुर स्थित जो राजनिवास पैलेस होटल विवाद में आया है, यह कभी उनकी संपत्ति हुआ करती थी। हैरीटेज होटल होने का दर्जा हासिल कर चुके इस होटल में दुष्यंत सिंह, उनकी पत्नी निहारिका, मां वसुंधरा राजे व पारिवारिक मित्र रहे ललित मोदी के शेयर हैं। यह होटल उस नियंत हैरीटेज होटल की संपत्ति है जिसके 10 रुपए के शेयर को ललित मोदी ने 96180 रुपए की दर से खरीदा था। इस होटल का इतिहास काफी रोचक है। जिस धौलपुर में यह स्थित है वह इलाका भी पारिवारिक विवादों का शिकार रहा।

Read Also: कांग्रेस ने लगाया ‘धौलपुर महल’ हड़पने का आरोप, भाजपा ने दुष्यंत की निजी संपत्ति बताया

इतिहास में दर्ज है कि मध्यकाल में मुगल राज्य के संस्थापक बाबर को यह स्थान काफी रमणीक लगता था। बाद के भी मुगल बादशाह इस पर निसार रहे। जहांगीर से उसकेयुवराज बेटे शाहजहां ने अनुरोध किया था कि वह इसे सौंप दें। उसे लगा कि दरखास्त मंजूर हो ही जाएगी इसलिए स्वीकृति मिलने के पहले ही उसने अपने अफसरों को वहां भेज दिया।

मगर जहांगीर की प्रिय बेगम मलिका नूरजहां को भी यह जगह बहुत पसंद थी। वह भी इस बारे में बादशाह से अपनी इच्छा प्रकट कर चुकी थी। वह शहजादा शहरयार के लिए यह जगह चाहती थीं। उसने शरीफ उल मलिक को वहां का प्रशासक बनाकर भेज दिया। धौलपुर पर कब्जे को लेकर दोनों ही गुटों में खूनी संघर्ष हुआ और नौ लोग मारे गए। इससे बादशाह जहांगीर बहुत नाराज हुआ व उसने युवराज को वहां से बहुत दूर भेज दिया। पेशवा और मराठों के काल में भी यह महल चर्चा में रहा।

लाल पत्थर से बने इस महल के अंतिम राजा उदयभान थे। उनकी बहुत जल्दी ही मौत हो गई। हेमंत सिंह नाभा के महाराज प्रतापसिंह के बेटे थे। उदयभान की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने हेमंत सिंह को गोद लेकर उनका वारिस बना दिया। धौलपुर राज के भारत में विलय के बाद उस पर सरकार का अधिकार हो गया। हालांकि 1957 में कुछ संपत्तियों के बदले में सरकार ने उसे हेमंत सिंह को वापस लौटा दिया।

हेमंत सिंह जाट थे। उनकी ग्वालियर के महाराजा की तीसरी बेटी वसुंधरा राजे से 1972 में शादी हुई थी। यह शादी ज्यादा लंबी नहीं चली और दोनों का तलाक हो गया। जब यह तलाक हुआ तब वे गर्भवती थीं। वसुंधरा की मां व भाजपा की वरिष्ठ नेता राजमाता विजयराजे सिंधिया ने अपनी बेटी को हक दिलवाने के लिए हेमंत सिंह के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया।

भरतपुर की अदालत में यह मुकदमा तीन दशक तक चला। अंतत: दोनो पक्षों ने अदालत के बाहर आपस में समझौता कर लिया। इसके तहत दुष्यंत को यह धौलपुर का महल, शिमला का घर, एक दर्जन विंटेज कारें व धौलपुर के खजाने के जवाहरात मिले, जबकि हेमंत सिंह को दिल्ली में पंचशील मार्ग स्थित घर व दूसरी संपत्ति मिली। वे यहीं अपनी दूसरी पत्नी व गुजरात के वाना राजघराने की इंद्राणी सिंह के साथ रहते हैं। संयोग से यह समझौता वसुंधरा राजे के राजस्थान की मुख्यमंत्री बनने के बाद हुआ।

दुष्यंत ने इसका नाम बदल कर राजनिवास पैलेस रख दिया और उनकी कंपनी नियंत हैरीटेज होटल्स ने उसे होटल में बदल दिया। यहां सात सुइट व अनेक कॉटेज हैं। यह इलाका काफी हरा-भरा है। यह राज्य के प्रतिष्ठित हैरिटेज होटलों में गिना जाता है।

(विवेक सक्सेना)

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.