December 03, 2016

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लोगों की जरूरत, एक अदद 500 रुपए का नोट

टीएम से 500 के नोट निकलने लगे हैं लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं है कि लोगों की जरूरतें पूरी हो सकें।

Author नई दिल्ली | November 22, 2016 03:34 am
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए 500 रुपए के नए नोट। (Photo: PTI)

नोटबंदी के कई दिन बाद लोगों को 2000 रुपए के गुलाबी नोट काफी संख्या में मिलने लगे हैं, लेकिन असली मुश्किल आ रही है इसे खर्च करने में। रोजमर्रा के खर्च के लिए 500 के नोट को सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है। लोगों का कहना है कि किराने की दुकान से लेकर पेट्रोल पंप तक 500 के नोट बहुत काम आते हैं। हालांकि एटीएम से 500 के नोट निकलने लगे हैं लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं है कि लोगों की जरूरतें पूरी हो सकें। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इन दिनों एटीएम में डाले जाने वाले नोटों में 500 की मात्रा सबसे कम है, जिसका आंकड़ा 30 से 40 फीसद के बीच माना जा रहा है। वहीं बैंककर्मियों और लोगों का कहना है कि 500 के नोटों की संख्या बढ़ने से एटीएम और बैंक की भीड़ थमने के साथ-साथ बाजार के लेन-देन में भी तेजी आएगी।

यूनियन बैंक आॅफ इंडिया (यूबीआइ) के एक बैंक मैनेजर विनय कुमार सिंह का कहना है कि 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद सोमवार को मेरी शाखा में पचास लाख के करीब पुराने नोट आए और 40 लाख के करीब नए नोट बैंक से लोगों को दिए गए। नए नोटों में 500 के नोटों की कमी का लेकर उनका कहना था कि अगर नए नोटों में 500 के नोट के बंडल अधिक आने लगें तो निश्चित तौर पर बैंकों में लोग कम आएंगे और उन्हें खर्च करने में भी सहूलियत मिलेगी, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि शुरू में रोजाना 3 से 4 करोड़ रुपए के पुराने नोट शाखा में आते थे, लेकिन सोमवार को मेरी शाखा में यह 50 लाख के करीब जमा हुआ है। जिसका औसत दिन पर दिन कम होता जा रहा है। उनका कहना था कि पुराने नोटों को जमा करने के साथ आज बैंक के नियमित काम भी अच्छे हुए। एटीएम में पैसे डालने वाली एक कंपनी के अधिकारी का कहना था कि नोटबंदी की शुरुआत में उन्हें अधिकतम 20 लाख रुपए के करीब नकदी एटीएम में डालने को मिलती थे, लेकिन अब यह आंकड़ा 70 से 80 लाख के बीच पहुंच गया है, जिसमें संख्या में मामले में सौ के नोट सबसे अधिक और उसी के आसपास की संख्या में 2000 के नोट हैं। हालांकि पांच सौ के नोट इनकी तुलना में 30 से 40 फीसद कम पड़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि लोगों की सहूलियत के लिए जेएनयू, साकेत, वसंत कुंज और पटेल चौक जैसे पॉश इलाकों में 2000 के नोटों के बंडल अधिक डाले जा रहे हैं और सामान्य इलाकों में सौ रुपए के बंडल अधिक डाले जा रहे हैं। खर्च करने के हिसाब से सौ के नोट ज्यादा उपयुक्त हैं, लेकिन एटीएम में सौ के नोटों की संख्या कम पड़ती है। इससे सामान्य इलाकों के एटीम जल्दी खाली हो जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि एक नोटों के एक बंडल में 10 गड्डी होती है और एक गड्डी में सौ नोट होते हैं।इस समय पॉश इलाकों में 2000 के नोटों की 7 से 8 गड्डियां डाली जा रही हैं और सौ की तीन-चार गड्डियां डाली जा रही हैं। इसी तरह सामान्य इलाकों में सौ के नोटों की 10 से 12 गड्डियां डाली जा रही हैं और 2000 के नोटों की 3-4 गड्डियां। नोएडा सेक्टर-15 में स्टेट बैंक के एटीएम से पैसे निकाल रहे देवेश का कहना था कि 2000 के नोट की जगह 500 के नोटों की संख्या बढ़ानी चाहिए। ऐसा होने से सहूलियत बढ़ने के साथ लोगों का बैंक और एटीएम आना-जाना कम होगा। लोग अपनी सामान्य दिनचर्या में लौटकर कुछ दिन तक बैंक जाने से बचेंगे।

 

 

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First Published on November 22, 2016 3:34 am

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