December 09, 2016

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लाभ के पद के दायरे में अपने नाम पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष गोयल ने उठाए सवाल

राष्ट्रपति ने बिना जांच किए याचिका को चुनाव अयोग के पास भेज दिया और चुनाव आयोग ने बिना विचार किए नोटिस जारी कर दिया।

Author नई दिल्ली | November 10, 2016 02:38 am
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का बड़ा आरोप। (ANI Photo)

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने बुधवार को कहा कि वह किसी भी सरकारी अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष पद पर आसीन नहीं हैं, फिर उनका नाम चुनाव आयोग में दायर लाभ का पद संबंधी याचिका में कैसे है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने बिना जांच किए याचिका को चुनाव अयोग के पास भेज दिया और चुनाव आयोग ने बिना विचार किए नोटिस जारी कर दिया। याचिका की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि बिना किसी दबाव में आए इस याचिका की मेरिट पर विचार करे और न्याय की जरूरी प्रक्रिया का पालन करे। राष्ट्रपति और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष के नेता ने विधानसभा अध्यक्ष की कड़ी आलोचना की है।

दो नवंबर को चुनाव आयोग ने युवा वकील विभोर आनंद की याचिका पर आम आदमी पार्टी के 27 विधायकों को कारण बताओ नोटिस भेजकर 11 नवंबर तक जवाब मांगा था। इस याचिका ने विधायकों की सूची में विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल का भी नाम शामिल था। गोयल ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर जानकारी दी कि वे वर्तमान सरकार में किसी भी सरकारी अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष नहीं बनाए गए, इस संबंध में दिल्ली सरकार ने कभी कोई सूचना नहीं भेजी।

गोयल ने कहा, ‘राष्ट्रपति सबसे बड़े संवैधानिक पद पर हैं। कोई टिपण्णी नहीं करूंगा, पर बिना जांच के चुनाव आयोग के विचारार्थ यह याचिका कैसे भेजी गई। किस आधार पर यह याचिका स्वीकार किया गया। चुनाव आयोग ने विचार तक नहीं किया कि मैं रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष हूं या नहीं’। उन्होंने कहा कि पूरे भारत की जितनी भी विधानसभाएं हैं, मैंने सब विधानसभाओं से जानकारी ली कि वहां क्या चल रहा है। लेकिन, दिल्ली की तरह संविधान से खिलवाड़ कहीं नहीं हो रहा है, जैसा दिल्ली में, खासकर चुनाव आयोग की तरफ से’।

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चुनाव आयोग के नोटिस के जवाब दिए जाने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि चूंकि वे संवैधानिक पद पर बैठे हैं, इसलिए दुविधा में हैं कि उत्तर दें या नहीं, इस पर कानूनी सलाह ले रहे हैं। उन्होंने कहा, मेरा चुनाव आयोग से आग्रह है कि शिकायत में मेरिट नहीं है, आयोग इसका अध्ययन कर रद्द करे।  गोयल ने संसदीय सचिव बनाए गए 21 विधायकों और रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष बनाए गए 27 विधायकों के मामले में चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्याय की प्राकृतिक प्रक्रिया में याचिका पर फिर से एफिडेविट मंगाने की कवायद नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को अतिरिक्त अवसर देना संविधान का उल्लंघन है, इस मामले में प्राकृतिक न्याय की धज्जियां उड़ाते हुए कार्रवाई हो रही है।

वहीं दिल्ली राज्य स्वास्थ्य मिशन की विभिन्न सरकारी अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति अध्यक्ष पद पर नियुक्त किए गए विधायकों की सूची के अनुसार राम निवास गोयल के अतिरिक्त कुछ और ऐसे नाम हैं जो इस सूची में नहीं हैं, लेकिन उनके नाम चुनाव आयोग के समक्ष दायर याचिका में शामिल हैं। ऐसे लगभग आठ नाम हैं।विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष ने भारत के राष्ट्रपति, मुख्य चुनाव आयुक्त और मीडियाकर्मियों से उनकी बुद्धिमता, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को कलंकित करने के लिए उनसे माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज निवास गोयल ने इन तीनों स्तंभों की आधारहीन कड़ी भर्त्सना की।

 

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First Published on November 10, 2016 2:38 am

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