December 09, 2016

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दिवाली के बाद के प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर में करोड़ों लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में भी मुश्किल, सैकड़ों स्कूल बंद

देश की राजधानी दिल्‍ली इन दिनों गहरे धुएं के आगोश में है। दिवाली के बाद से फैले इस स्‍मॉग को लगभग एक सप्‍ताह होने को आया लेकिन अभी तक इसमें कोई कमी देखने को नहीं मिली है।

दिल्ली की हवा में इस समय पीएम 2.5 यानि छोटे कणों की मात्रा 700 माइक्रोग्राम पर क्‍यूबिक मीटर है। (Photo:PTI)

देश की राजधानी दिल्‍ली इन दिनों गहरे धुएं के आगोश में है। दिवाली के बाद से फैले इस स्‍मॉग को लगभग एक सप्‍ताह होने को आया लेकिन अभी तक इसमें कोई कमी देखने को नहीं मिली है। यह स्‍मॉग इतना जहरीला और गंदा है कि कुछ मिनट के लिए बाहर निकलते ही आंखें जलने लगती हैं और गले में खराश के साथ ही सांस लेने में दिक्‍कत होती है। सरकारी डाटा के अनुसार दिल्‍ली में 17 साल में सबसे खराब स्‍मॉग की स्थिति है। प्रदूषण की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने सोमवार को एनसीआर राज्‍यों के पर्यावरण मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई है। इसमें समस्‍या से निपटने के लिए त्‍वरित, शॉर्ट टर्म और लॉन्‍ग टर्म कदम उठाए जाने पर चर्चा होगी।

वहीं दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल नजीब जंग ने भी हाईलेवल की बैठक बुलाई है। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पड़ोसी राज्‍यों में फसलें जलाए जाने के कारण प्रदूषण का स्‍तर बढ़ा है। फसलों को जलाए जाने से उठा धुआं एक जगह ठहर गया है। उन्‍होंने फसलों को जलाए जाने से रोकने के लिए किसानों को इंसेंटिव दिए जाने की मांग की।

घने धुंए केे आवरण में दिल्‍ली ले रही सांस, देखें वीडियो:

दिल्ली की हवा में इस समय पीएम 2.5 यानि छोटे कणों की मात्रा 700 माइक्रोग्राम पर क्‍यूबिक मीटर है। यह आंकड़ा सरकारी नियम से 12 गुना और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के नियमों से 70 गुना अधिक है। पीएम 2.5 से फेंफड़ों को सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचता है। हजारों लोगों ने स्‍मॉग के चलते आंखों में जलन और खांसी की शिकायत की है। दिल्‍ली में 17 हजार से अधिक स्‍कूलों को बंद कर दिया गया है। डॉक्‍टर्स का कहना है कि लोग बाहर निकलने से बचें और घर के अंदर ही रहें।

विज्ञान व पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक (शोध) अनुमिता राय चौधरी ने कहा है कि अब हालात ऐसे हैं कि सरकार को तुरंत हालिया व दूरगामी परामर्श जारी करने के साथ त्वरित व स्थाई उपाय करने की दरकार है। हृदय व सांस की दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों के अलावा बच्चों को बचाने के लिए इमरजेंसी स्तर पर तुरंत उपाय करने की दरकार है। साथ ही सरकार को ऐसा निर्देश भी जारी करना चाहिए कि लोग ज्यादा बाहर न निकलें, घरों में ही रहे। धुएं की जगह पर व्यायाम न करें।

दिवाली के बाद राजधानी में इतना धुआं, धूल व कुहासा छाया रहा कि दिन में भी गाड़ियों की हेडलाइट जलानी पड़ रही है। गुरुवार (4 नवंबर) को हालात थोड़े ठीक हुए थे लेकिन पांच नंवबर को धुएं का असर फिर से बढ़ गया। इस दौरान विजिबिलिटी 100 मीटर के करीब ही रही। दिल्‍ली में स्‍मॉग के लिए डीजल इंजन, कोयले के पॉवर प्लांट और फैक्ट्रियों ने निकलने वाले धुंए से हालात खराब होते जा रहे हैं। इसके अलावा पंजाब और बाकी आसपास के इलाकों में जलने वाली फसल से भी दिल्ली प्रदूषित होती है। वहीं लड़कियों की मदद से खाना बना रहे लोग भी प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

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First Published on November 5, 2016 8:50 pm

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