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दिल्ली मेट्रो: हड़ताल का खतरा टला पर असंतोष बरकरार

दिल्ली मेट्रो में हड़ताल का खतरा भले ही टल गया हो, लेकिन महकमे में असंतोष अभी भी बरकारार है और इसकी जड़ें काफी गहरी हैं।
Author नई दिल्ली | August 2, 2017 04:07 am
दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन

दिल्ली मेट्रो में हड़ताल का खतरा भले ही टल गया हो, लेकिन महकमे में असंतोष अभी भी बरकारार है और इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। भ्रष्टाचार, भेदभाव व तानाशाही के आरोपों से घिरे मेट्रो प्रशासन की ओर से अभी तक कोई लिखित आदेश न मिलने से भी कर्मचारियों में बेचैनी है। प्रशासन की ओर से तमाम मुद्दों पर अभी तक लिखित आदेश जारी न होने व आश्वासनों पर कार्रवाई न होने से दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) प्रशासन व कर्मचारियों के बीच चल रहा गतिरोध भले ही पूर्व महानिदेशक ई श्रीधरन व केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव डीएस मिश्र के दखल के बाद खत्म हो गया है, लेकिन समस्या पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है।  मांगे पूरी होने की समयसीमा तय न किए जाने से कर्मचारी असमंजस में हैं। कर्मचारियों ने बताया कि कर्मचारी यूनियन की मान्यता बहाल करने की मांग पर भी कोई सहमति नहीं बनी। जबकि प्रशासन के अनुकूल रुख रखने वाली कर्मचारी परिषद के महासचिव अनिल महतो और रवि भारद्वाज के खिलाफ आरोपपत्र तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए गए। वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण बाहर किए सुनील कुमार व विनोद कुमार सहित करीब 18 कर्मचारियों को वापस लेने का अश्वासन तो दिया गया, लेकिन इस पर अभी तक आदेश जारी नहीं हुए।

कर्मचारी यूनियन का कहना है कि दिल्ली मेट्रो प्रशासन और इसके कर्मचारी परिषद व यूनियन के पदाधिकारियों के बीच दो दिन तक चली कई दौर की बैठकों के बाद किया गया फैसला अभी तक लागू नहीं होने से कई कर्मचारी विभागीय परीक्षा में बैठने और प्रोन्नति के अधिकार से भी महरूम रह गए। कुछ कर्मचारियों ने परीक्षा में बैठने की अलग से अनुमति मांगी थी, लेकिन वह भी नहीं दी गई। जबकि इसी परीक्षा के चलते कर्मचारी परिषद की मांग पर 27 जुलाई को प्रस्तावित कर्मचारी परिषद क ी बैठक भी टाल दी गई ताकि कर्मचारी परीक्षा में ब्ौठ सकें। सूत्रों के मुताबिक, मेट्रो में चल रही धांधली व तानाशाही से नाराज कर्मचारियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही, जबकि उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों ने एक बार फिर कहा कि जो भी कर्मचारी भ्रष्टाचार के मामले को उठाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।कर्मचारियों ने आरोप लगाया है किअसली मुद्दा भ्रष्टाचार व कर्मचारियों के उत्पीड़न का है। इसके खिलाफ जो भी बोलता है उसे निशाना बनाया जाता है।

कर्मचारियों के मुताबिक, यहां एक महकमे में दो तरह के कायदे-कानून चलते हैं। डीएमआरसी में परिचालन से जुड़े कर्मचारियों को हफ्ते में छह दिन काम करना पड़ता है और कई बार साप्ताहिक अवकाश भी दस दिन पर मिल पाता है। जबकि डीएमआरसी मुख्यालय और परियोजना से जुड़े कर्मचारियों को हफ्ते में पांच दिन काम करना होता है। एक लिखित आदेश का हवाला देते हुए कर्मचारियों ने बताया कि डीएमआरसी प्रशासन नॉन एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों को अपने कार्यक्रमों से दूर रहने को कहता है। चाहे स्थापना दिवस समारोह हो या फि र कोई अन्य कार्यक्रम, आम कर्मचारियों के साथ प्रशासन का रवैया भेदभावपूर्ण रहता है। डीएमआरसी के मुख्य प्रवक्ता अनुज दयाल ने एक बयान में कहा था कि कर्मचारियों के मामले का आपसी सहमति से हल निकाल लिया गया है, लेकिन अभी तक उस पर अमल न होने से प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं कर्मचारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और वे प्रशासन के रवैये के हिसाब से अपना अगला कदम तय करने वाले हैं।

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