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दिल्ली मेरी दिल्ली: ठंड का आगाज, दूबे बन कर लौटे

अरविंद केजरीवाल जब से सक्रिय राजनीति में आए हैं, तब से मफलर उनकी पहचान का हिस्सा बन गया है।
Author December 12, 2016 03:57 am
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

ठंड का आगाज

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब से सक्रिय राजनीति में आए हैं, तब से मफलर उनकी पहचान का हिस्सा बन गया है। ठंड के मौसम में गले में लटका मफलर केजरीवाल के व्यक्तित्व में ऐसा घुल-मिल गया है कि लोगों ने उन्हें ‘मफलर मैन’ का खिताब तक दे डाला। हद तो तब हो गई कि जब लोग, खासकर सोशल मीडिया के क्रिएटिव लोग ठंड की आधिकारिक शुरुआत मुख्यमंत्री के मफलर लगाने से मानने लगे। अब लगता है कि केजरीवाल ने भी उदारता का परिचय देते हुए इस खिताब को स्वीकार कर ही लिया है। तभी तो दो दिन पहले उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘ठंड आ गई है। मफलर निकल गया है। आप भी अपना खयाल रखें।’
दूबे बन कर लौटे

दिल्ली में सालों से पंजाबी और वैश्य मतदाताओं के बूते चुनाव जीतने वाली भाजपा को अब समझ आ गया है कि वोटों का औसत बढ़ाए बिना वे भविष्य में सत्ता में आ नहीं पाएंगे। इसी कारण पार्टी ने नया प्रयोग करते हुए भोजपुरी गायक और सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली भाजपा की बागडोर सौंप दी। माना जा रहा है कि दिल्ली की राजनीति में अहम बन चुके पूर्वांचल के प्रवासियों को पार्टी से जोड़ने में वे कामयाब होंगे। मनोज तिवारी के दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनने के बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि राजधानी में रहने वाले प्रवासी भाजपा को ज्यादा समर्थन देंगे। हालांकि प्रवासियों से दूरी बना कर चलने वाले भाजपा के परंपरागत नेताओं को पार्टी में अपने बजाए किसी और को महत्त्व मिलना जरा भी रास नहीं आ रहा है और दबी जुबान में ही सही, पार्टी के नेता यह कहने लगे हैं कि कहीं नए वोटर जोड़ने के चक्कर में पुराने न छूट जाएं और पार्टी का वही हाल हो जाए कि चौबे जी छब्बे बनने गए थे दूबे बनकर लौटे।
आमदनी का मोह
आप सरकार ने एक साहसी कदम उठाकर सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों और शराब पी कर हंगामा मचाने वालों पर कार्रवाई करके आम लोगों खासतौर पर महिलाओं का समर्थन हासिल कर लिया है। इसका एक कारण पंजाब में होने वाला चुनाव भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में आप का मुख्य मुद्दा नशाबंदी ही है। आलोचना से बचने औक खुद को सही साबित करने के लिए आप सरकार ने दिल्ली में शराबबंदी करने के बजाए सार्वजनिक रूप से शराब पीने पर रोक लगा दी। हालांकि दिल्ली में पैसे की कोई कमी न होने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब से होने वाली आमदनी का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं, जबकि वे बिना कोई काम किए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह केवल शराब बंद करके सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बन सकते हैं।
एक और मौका
दिल्ली की सत्ता की लड़ाई में हाई कोर्ट का फैसला उपराज्यपाल के पक्ष में आने के बाद दिल्ली सरकार बेचारी बन कर रह गई और सुर्खियों में छाए रहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खबरों से दूर होने लगे। संयोग कुछ ऐसा गड़बड़ाया कि नोटबंदी पर दिल्ली में हुए आंदोलनों की अगुवाई भी उनके हाथों से फिसल गई। इस मुद्दे को लेकर देशभर में सभा करने की शुरुआत वे भले ही कर चुके हों, लेकिन दिल्ली का मोह उनसे छूटता ही नहीं। संयोग से उनकी शिष्या और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अलका दीवान को महिला आयोग का सदस्य सचिव बनाने के उपराज्यपाल के फैसले को मुद्दा बना लिया। वे इस पद पर सीपी ढल को रखना चाहती थीं। उपराज्यपाल ने ऐसा नहीं होने दिया और दीवान के रिटायर होने पर दलजीत कौल को सदस्य सचिव बना दिया। वहीं मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उपराज्यपाल के आदेश को दरकिनार कर ढल को फिर से सदस्य सचिव बना कर सुर्खियां बटोर लीं। इसी के साथ कई और मुद्दे भी सामने आ गए, यानी आप और केजरीवाल को कुछ दिन तक मीडिया में बने रहने का एक और मौका मिल गया।
-बेदिल

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