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दिल्ली मेरी दिल्ली: पंजाब चुनाव के नतीजे आने से पहले जश्न मनाने में जुटी आम आदमी पार्टी

पंजाब में जिस तरह से साल भर आप का प्रचार चला और दिल्ली की केजरीवाल सरकार पूरी तरह वहां डटी रही।
Author February 13, 2017 01:37 am
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और आप नेता भगवंत मान। (फोटो- PTI)

नोटिस का शतक

जेएनयू में इन दिनों ‘नोटिस-नोटिस’ की चर्चा है। दरअसल जब यहां एक विवाद थमने के करीब होता है, तब तक दूसरा विवाद शुरू हो जाता है। हर विवाद में छात्र संघ और विश्वविद्यालय आमने-सामने होते हैं,। छात्र अड़ जाते हैं और विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाता है। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन विरोध रोकने की अपील करता है, लेकिन छात्र कहां मानने वाले! फिर क्या? नोटिस दर नोटिस। किसी ने चुटकी लेते हुए कहा, नोटिस के शतक पूरे हो चुके हैं। इस पर दूसरे ने कहा, रिकॉर्ड टूटने के लिए ही तो बनते हैं! वो नोटिस के शतक बनाएं न बनाएं, हम प्रदर्शन की बरसी जरूर मनाएंगे।

जीत की उम्मीद

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही जीत का जश्न मनाने में जुट गए हैं, जबकि नतीजे आने में अभी महीने भर की देरी है। मतदान के बाद नतीजों पर अटकलें लगना आम बात है, लेकिन जीत का जश्न तो तभी मनाया जाता है जब इसका फायदा अगले चुनाव में लेना हो या फिर जीत का पक्का यकीन हो। पंजाब में जिस तरह से साल भर आप का प्रचार चला और दिल्ली की केजरीवाल सरकार पूरी तरह वहां डटी रही, उससे तो शुरू से ही माना जा रहा था कि आप इस चुनाव में बेहतर करने वाली है। जाहिर है ऐसा हुआ तो आप का पूरे देश में प्रभाव बढ़ेगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी को एक बड़ा झटका लगेगा। पंजाब में जीत के जश्न के साथ-साथ दिल्ली सरकार के दो साल पूरे होने के आयोजन भी पूरे जोशो-खरोश से होने वाले हैं। इसी के साथ आप ने गुजरात के चुनावी मैदान में कूदने की भी तैयारी शुरू कर दी है।

जंग की बलि

केंद्र की यूपीए सरकार ने 2013 में नजीब जंग को दिल्ली का उपराज्यपाल बनाया था, जिनकी दिल्ली की केजरीवाल सरकार से कभी नहीं बनी। सरकार की हर फैसले को लेकर उपराज्यपाल से तकरार हो ती रही। इस चक्कर में अनेक फैसले फाइलों की धूल फांक रहे हैं और समय बीतता जा रहा है। विधानसभा चुनाव में आप को समर्थन देने वाले लोगों को अब लगने लगा है कि आप के नेता काम करने के बजाए लफ्फाजी करने में लगे रहते हैं। नजीब जंग के बाद भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने अनिल बैजल को उपराज्यपाल बनाया। तब माना गया कि हालात वैसे ही बने रहेंगे, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा, उपराज्यपाल बैजल ने जंग के फैसले को पलटते हुए दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक खोलने के फैसले को मंजूरी दे दी। इसके बाद तो यह चर्चा आम हो गई कि आप से रिश्ते सुधारने के नाम पर कहीं भाजपा ने जंग की बलि तो नहीं ले ली। इसके बाद कांग्रेस के इस आरोप ने इस चर्चा को और पुख्ता कर दिया कि भाजपा कांग्रेस को कमजोर करने के लिए आप को बढ़ावा दे रही है।

चुनाव के दिन
राजधानी के निगम अस्पतालों में इन दिनों दवाओं की खेप व जांच की तमाम सुविधाएं मिलने लगी हैं। पिछले दिनों आर्थिक संकट की मार झेल रहे इन अस्पतालों में आजकल स्वास्थ्य सुविधाएं व दवाइयां मिलते देख एक मरीज ने तंज किया कि दवा मिलने लगी है। इस पर यहीं अपनी बारी के इंतजार में बैठे एक बुजुर्ग मरीज ने कहा कि निश्चित ही चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं क्योंकि गलियों में खडंÞजे भी बिछते दिख रहे हैं। सो हम भी इलाज की उम्मीद में अस्पताल आ गए।

सरकार का हिसाब
दिल्ली सरकार 14 फरवरी को अपने दो साल पूरे करेगी। इस मौके पर सरकार के सभी मंत्री अपने दो साल के कामों की रिपोर्ट भी पेश करेंगे। लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी आम आदमी पार्टी जनता से सीधे संवाद करेगी, इसकी कहीं से कोई सुगबुगाहट नहीं है। यह वाजिब भी है कि दिल्ली की जनता पिछले साल की तरह इस बार भी सरकार की दूसरी सालगिरह पर उसके कामों का हिसाब-किताब मांगे। खैर, यह तो दिल्ली सरकार को तय करना है कि वह जनता को अपने दो साल के कामों का लेखा-जोखा देना चाहती भी है या नहीं।
-बेदिल

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