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दिल्ली-एनसीआर में फेफड़ों के लिए मुश्किल घड़ी, धुंध-धुएं का दौर तीन दिन जारी रहेगा

राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के शहर गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं और तीन दिन तक राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं।
Author नई दिल्ली/चंडीगढ़ | November 8, 2017 13:04 pm
यह शोध अमेरिका के 6,654 मध्य आयु वर्ग वाले और बुजुर्गो पर किया गया। (Source: Thinkstock Images)

दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-1 सोमवार को धुंध-धुएं की चपेट में रहा और इस मार्ग पर कई हादसे हुए। इस बीच मौसम विभाग ने कहा है कि धुएं-धुंध का यह दौर अगले तीन दिन भी जारी रहेगा।  राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के शहर गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं और तीन दिन तक राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए पंजाब में भी गहरी से अति गहरी धुंध का अनुमान जताया है। देश के प्रमुख शहरों के बीच दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति सबसे खराब है। सोमवार को राजधानी और एनसीआर क्षेत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय, लोधी रोड, नोएडा और गुरुग्राम सबसे प्रदूषित रहे। मौसम एजंसियों के मुताबिक 8-9 नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर में मौसमी स्थितियां यथावत रहेंगी, लेकिन उसके बाद हवाओं के रुख में बदलाव के कारण थोड़ी राहत मिल सकती है। वहीं तापमान के लिहाज से मौसम इस हफ्ते गुलाबी ठंड का बना रहेगा।

कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब बनी हुई है। सफर (सिस्टम आॅफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अमदाबाद, दिल्ली, पुणे और मुंबई में दिल्ली सबसे ज्यादा प्रदूषित है। निजी मौसम एजंसी स्काइमेट द्वारा साझा किए गए सफर के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय 368 (माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर) पीएम (पर्टिकुलेट मैटर) 2.5 और बाकी पेज 8 पर 277 पीएम 10 के स्तर के साथ दिल्ली-एनसीआर में सबसे प्रदूषित इलाका रहा। इसके बाद घटते प्रदूषण के क्रम में लोधी रोड, नोएडा, गुरुग्राम, मथुरा रोड, पीतमपुरा, धीरपुर, पालम और आयानगर रहा। सिर्फ पूसा में पर्टिकुलेट मैटर का स्तर खराब और मध्यम श्रेणी में रहा, बाकी अन्य जगहों पर प्रदूषण की स्थिति अत्यंत खराब है। पीएम 2.5 के कण अति सूक्ष्म होने के कारण पीएम-10 से ज्यादा घातक हैं क्योंकि ये आसानी से फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं।

भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) ने अगले तीन दिनों के लिए पंजाब में भी गहरी से अति गहरी धुंध का अनुमान जताया है। आइएमडी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ के सती देवी ने कहा कि तीन दिनों तक दिल्ली सहित उत्तर भारत के शेष जगहों (चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी हरियाणा, उत्तरी राजस्थान) में हल्के से मध्यम दर्जे के धुंध के आसार हैं। डॉ देवी ने अगले कुछ दिनों तक तेज हवाओं की संभावना से इनकार किया है। स्काइमेट के वरिष्ठ वैज्ञानिक महेश पलावत ने कहा कि प्रदूषण से तीन-चार दिनों तक राहत नहीं, लेकिन 9 नवंबर से बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब के क्षेत्र के बनने के कारण हवा के रुख पूर्वा हो जाएगा और गति भी तेज होगी। इससे न्यूनतम तापमान का गिरना भी रुकेगा और प्रदूषण में भी थोड़ी राहत आएगी। उन्होंने कहा कि इस समय हवाओं का रुख उत्तर-पश्चिमी है और हवा की गति बहुत कम है जिसके चलते प्रदूषण, धुआं और धूल के कण दिल्ली के निचले वायुमंडल में ही बने हुए हैं। हालांकि दिन में हवा तेज हो जाती है जिससे प्रदूषण में कमी देखने को मिलती है। सुबह और रात में शांत हवा के कारण प्रदूषण बढ़ जाता है। हालांकि, पलावत ने बड़ी राहत के आसार नहीं जताए हैं, न हीं ठंड में बढ़ोतरी की संभावना जताई है। दिल्ली में दिन और रात का तापमान अब तक सामान्य से ऊपर ही बना हुआ है।
सफर ने जारी किए दिशानिर्देश

दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए ‘सफर’ ने दिशानिर्देश जारी कर संवेदनशील लोगों को घरों से बाहर निकलने से मना किया है। लोगों को सुबह-शाम घर से बाहर की गतिविधि कम करने और एन-95 या पी-100 मॉस्क के इस्तेमाल की सलाह दी है। वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (जीएसटीए) ने विद्यार्थियों के लिए सुरक्षा मास्क प्रदान किए जाने की मांग की है। जीएसटीए के महासचिव अजय वीर यादव ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से मांग की है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को दमघोंटू प्रदूषण से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हवा की खराब की गुणवत्ता के कारण स्कूलों में छात्रों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही सरकारी स्कूलों में कच्चे खेल मैदान होने के कारण धूल ज्यादा होती है जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है। अजयवीर यादव ने कहा कि विभागीय आदेश के मुताबिक किसी भी हाल में प्रार्थना होना अनिवार्य है जिससे बच्चों को मजबूरन धूल भरे मैदान में इकट्ठा होना पड़ता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए जीएसटीए ने मास्क उपलब्ध करवाने और स्कूलों के अंदर एअर प्यूरीफायर के इस्तेमाल की मांग की है। कई निजी स्कूलों ने बच्चों की कक्षा से बाहर की गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है।

 

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