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नजीब अहमद के लापता होने में कुछ और हो सकता है, दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से कहा

पिछले 45 दिनों से लापता छात्र नजीब के बारे में अब तक पता नहीं लगने पर चिंता प्रकट करते हुए अदालत ने कुछ सवाल भी उठाए।
Author नई दिल्ली | November 28, 2016 20:32 pm
जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की मां फातिमा नफीस। (फाइल फोटो)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस को सख्ती से ‘तमाम राजनीतिक अवराधों’ से निकलकर जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की तलाश करने को कहते हुए कहा कि उसके लापता होने में ‘कुछ और’ हो सकता है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी के बीचो बीच से कोई इस तरह ओझल नहीं हो सकता। पिछले 45 दिनों से लापता छात्र के बारे में अब तक पता नहीं लगने पर चिंता प्रकट करते हुए अदालत ने कुछ सवाल भी उठाए कि नजीब और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कुछ सदस्यों के बीच कैंपस में कथित झगड़ा क्यों हुआ और नजीब को चोट आयी थी, दिल्ली पुलिस की स्थिति रिपोर्ट में इसका जिक्र क्यों नहीं किया गया। न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने कहा कि अगर एक आदमी राष्ट्रीय राजधानी से लापता हो जाए और अब तक उसका पता नहीं हो तो इससे लोगों में ‘असुरक्षा का भाव’ पैदा होता है। पुलिस से सारे कोणों को खंगालने को कहा गया। उन्होंने पुलिस से कहा, ‘राष्ट्रीय राजधानी, यह भारत का दिल है। यहां से कोई ऐसे लापता नहीं हो सकता। इससे लोगों में असुरक्षा का बोध पैदा होता है। अगर वह लापता हुआ तो उसमें कुछ है। सभी कोणों को खंगाला जाना चाहिए। किसी के भूमिगत होने के लिए 45 दिन लंबी अवधि है।’ पीठ ने पुलिस से यह कहा जिसकी राय है कि नजीब ‘बलपूर्वक अगवा’ नहीं हुआ।

दिल्ली पुलिस की प्रगति रिपोर्ट पर गौर करते हुए अदालत ने पूछा कि अगर नजीब को जो चोट आयी वह नहीं दिख रहा था तो एंबुलेंस में उसे अस्पताल क्यों ले जाया गया क्योंकि यह तथ्य पुलिस रिपोर्ट से गायब है। पीठ ने यह भी कहा कि नजीब और कथित तौर पर एबीवीपी के कुछ सदस्यों के बीच कैंपस में हुए कथित झगड़े के बारे में रिपोर्ट में क्यों कुछ नहीं कहा गया है जिन पर आरोप है कि उसकी निर्ममतापूर्वक पिटाई की गयी और बस इतना जिक्र किया गया कि लापता छात्र ने उनमें से एक को थप्पड़ मारा था। न्यायाधीश ने सवाल किया कि 15 अक्तूबर को लापता होने से पहले 14-15 अक्तूबर की रात नजीब का जिनलोगों के साथ कथित तौर पर झगड़ा हुआ था उनलोगों से पूछताछ करने के लिए पुलिस ने 11 नवंबर तक का इंतजार क्यों किया और उनके खिलाफ 17 अक्तूबर को आपराधिक शिकायत दर्ज करायी गयी।

पीठ ने पुलिस से कहा, ‘सारे राजनीतिक अवरोधों से उच्च्पर उठा जाए। उसे वापस लाया जाए। आपको अपने सवालों का जवाब दो जगहों-जामिया या जेएनयू में मिल जाएगा। अलीगढ़ या दूसरी जगह जाने की जरूरत नहीं है।’ पुलिस ने कहा था कि एक ऑटो ड्राइवर ने नजीब को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छोड़ने का दावा किया था। अदालत लापता छात्र की मां फातिमा नफीस की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वह आज अदालत आयी थीं और सुनवाई के दौरान वह रो रही थीं। उन्होंने अदालत से मांग की कि वह प्राधिकारों को उनके 27 वर्षीय बेटे को तलाश करने का निर्देश दे। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह पुलिस को यह नहीं कहना चाहती कि वह क्या करे, लेकिन वह मामले में शामिल कुछ लोगों पर आसानी से ध्यान केंद्रित कर सकती है ताकि यह पता चले कि क्या चल रहा है और अदालत को ‘निर्भय’ होकर बता सके उसे क्या मिला।

अदालत याचिका की एक प्रति सौंपे जाने के बावजूद मामले में किसी को जिम्मेदारी नहीं सौंपे जाने पर जेएनयू के कुलपति के ‘रुख’ पर भी संतुष्ट नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘उन्हें नहीं लगता कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है ? यह ठीक रवैया नहीं है।’ जेएनयू को महिला की याचिका पर अगली सुनवाई तक जवाब देने का निर्देश दिया गया। अदालत ने विश्वविद्यालय से भी कहा कि नजीब को छात्रावास से निकालने के फैसले पर भी दोबारा विचार करे अगर अब तक ऐसा नहीं किया गया है तो, और अखबार में विज्ञापन दे कि उसके वापस आने पर उसके दंड पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने नजीब की मां से कहा कि वह उसे वापस लौट आने को लेकर एक बयान जारी करें और जेएनयू प्रबंधन तथा छात्रों से उसकी तलाश में पुलिस से सहयोग करने को कहा।

बहस के दौरान पुलिस ने कहा कि उसकी अपराध शाखा नजीब के लापता होने को लेकर सभी कोणों को खंगाल रही है जिसमें कि 2012 के बाद मानसिक अवसाद की बीमारी को लेकर उपचार हुआ था। यह भी राय है कि वह छिपा हुआ है क्योंकि छात्रावास से हटाए जाने को लेकर हो सकता है कि शर्मिंदा हो। फातिमा की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि वह मामले में जांच के तरीके से ‘निराश’ हैं क्योंकि एजेंसी नजीब को अगवा किये जाने की आशंका को खंगाल नहीं रही ऐसा इसलिए कि एबीवीपी के सदस्यों ने उसे कथित तौर पर धमकी दी थी।

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  1. I
    Islamuddin ansari
    Nov 28, 2016 at 4:49 pm
    Jab tak modi sarkar hai tab tak Muslim samaj or dalit samaj ko niyay nahi mileyga kiyon ki modi ki sarkar ki buniyad he muslimo key galey katwaney per tiki hai ...Muslim educated Muslim bewakoofon ki tarah khamosh hai ...mai sabasi deta hoon jab tak kanhiya or Pandey jaisey Hindu ish desh mai hai ...Muslim samaj ko niyay say jiyada din mehroom nahi kiya jaa sakta ..waisey Ab waqt AA a hai Sikh .isae Muslim adhey likhey log uno ko hinduyatwa key nam per kesariya atankwad ko rakh hastaxap kary
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग