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नोटबंद के ख़िलाफ़ याचिका, दिल्ली हाई कोर्ट ने अनिश्चितकाल के लिए की स्थगित

शीर्ष अदालत ने 16 दिसंबर को कहा था कि विमुद्रीकरण से संबंधित मुद्दों पर देश में कोई अन्य अदालत किसी रिट याचिका पर विचार नहीं करेगी।
Author नई दिल्ली | December 22, 2016 18:29 pm
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि सभी प्राधिकारों ने विचार दिया है कि वायु प्रदूषण की बड़ी वजह गाड़ियां हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह सूचना मिलने पर विमुद्रीकरण के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए गुरुवार (22 दिसंबर) को स्थगित कर दी कि उच्चतम न्यायालय ने मुद्दे पर विभिन्न अदालतों में लंबित सभी कार्यवाही स्थगित कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय मुद्दे पर विचार कर रहा है और विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित विमुद्रीकरण से संबंधित अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कार्यवाही को भी स्थगित कर दिया है और कहा है कि केवल वही सुनवाई करेगा।’ पीठ ने आगे कहा कि क्योंकि याचिकाकर्ता उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार अपनी याचिकाओं को वापस नहीं ले रहे हैं, इसलिए ‘मामले को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाता है।’ शीर्ष अदालत ने 16 दिसंबर को कहा था कि विमुद्रीकरण से संबंधित मुद्दों पर देश में कोई अन्य अदालत किसी रिट याचिका पर विचार नहीं करेगी।

यह निर्देश आठ नवंबर को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा एक हजार और 500 रुपए के पुराने नोट बंद करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं तथा केंद्र की उस याचिका पर आया जिसमें उसने आग्रह किया था कि विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित मुद्दों को या तो शीर्ष अदालत या फिर उच्च न्यायालयों में से किसी एक में स्थानांतरित कर दिया जाए। शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा था, ‘हम यह स्पष्ट करते हैं कि उच्च न्यायालयों में याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप के आग्रह के लिए स्वतंत्र हैं।’ दिल्ली उच्च न्यायालय दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था । एक याचिका में दो हजार रुपए के नए नोट को बंद किए जाने का आग्रह किया गया था, जबकि दूसरी याचिका में केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया था कि सभी एटीएम में पैसे हों और लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

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