December 08, 2016

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दिल्ली सरकार ने कहा, ग्रेवाल को शहीद बताना नीतिगत मामला

दिल्ली सरकार ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और यह मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास जाएगा।

Author नई दिल्ली | November 8, 2016 03:06 am
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का बड़ा आरोप। (ANI Photo)

दिल्ली की आप सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने उस फैसले का बचाव किया जिसमें पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिजनों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही गई थी। दिल्ली सरकार ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और यह मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास जाएगा। ग्रेवाल ने हाल में ओआरओपी के मुद्दे पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ के समक्ष इन याचिकाओं का दिल्ली सरकार ने विरोध करते हुए इन्हें अपरिपक्व बताया और कहा कि इसमें कोई जनहित शामिल नहीं है। दिल्ली सरकार के वरिष्ठ स्थायी वकील राहुल मेहरा ने पीठ को बताया, ‘इसमें कोई जनहित शामिल नहीं है। ये याचिकाएं अपरिवक्व हैं। फैसले उपराज्यपाल के पास जाएंगे। अगर मंत्रिपरिषद कोई फैसला करती है तो इसे मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास जाना है।’ उन्होंने यह भी कहा कि फैसला नीतिगत मामला है, जो विचाराधीन है। यह सरकार की नीति के दायरे में है। सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने मामले में शामिल जनहित के संबंध में याचिकाकर्ताओं में से एक की तरफ से उपस्थित वकील से कुछ सवाल किए।

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याचिकाकर्ता पूरण चंद आर्य की तरफ से उपस्थित अधिवक्ता अभिषेक चौधरी से पीठ ने पूछा, ‘यह नीतिगत मामला है। इसमें क्या जनहित शामिल है और क्यों अदालत को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए?’इसका जवाब देते हुए चौधरी ने कहा कि सरकार ने ग्रेवाल को शहीद का दर्जा देने का फैसला किया है। उन्हें इस तरह मुआवजा नहीं देना चाहिए क्योंकि यह करदाताओं का धन है। उन्होंने दावा किया, ‘एक व्यक्ति जिसने आत्महत्या की है, उसे पुरस्कृत किया गया है। यह समाज में आत्महत्या को प्रोत्साहन देगा।’

इसी तरह, अधिवक्ता अवध कौशिक की ओर से दायर जनहित याचिकाओं में से एक में ग्रेवाल को शहीद घोषित करने के आप सरकार के निर्णय का भी विरोध किया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आत्महत्या जैसे कृत्य का महिमामंडन नहीं करना चाहिए।
सभी पक्षों की बात सुनने के बाद पीठ ने दोनों याचिकाओं पर फैसला 14 नवंबर तक के लिए टाल दिया। अदालत ने कहा कि वह इनपर विचार करेगी और तब अपना आदेश सुनाएगी।सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार ग्रेवाल ने एक नवंबर को कथित तौर पर ओरआरओपी के मुद्दे को लेकर आत्महत्या कर ली थी। सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ताओं में से एक ने कहा कि सरकार को अपने फैसले पर अदालत के आदेश सुनाने तक आगे बढ़ने से रोकना चाहिए।
पीठ ने हालांकि कहा कि सबकुछ रिकॉर्ड में है और वह दोनों याचिकाओं पर 14 नवंबर को आदेश सुनाएगी।

 

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First Published on November 8, 2016 3:06 am

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