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कांग्रेस: बवाना में करारी शिकस्त के बाद पार्टी में घमासान

शीला दीक्षित ने इसी पर कहा -चुनाव जीतने के लिए लड़ा जाता है न कि वोट औसत बढ़ाने के लिए
Author नई दिल्ली | August 31, 2017 03:44 am
कांग्रेस नेता अजय माकन की फाइल फोटो।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लगातार 15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के बवाना उपचुनाव के नतीजों के बाद दिए बयान ने दिल्ली कांग्रेस के नेताओं के जले पर नमक छिड़कने जैसा काम किया है। उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार रामचंद्र ने भाजपा उम्मीदवार वेद प्रकाश को 24 हजार से ज्यादा मतों के से पराजित कर दिया है। कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार तीसरे नंबर पर रहे। चुनाव नतीजे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने वोट औसत बढ़ने पर संतोष जताया। वहीं शीला दीक्षित ने इसी पर कहा -‘चुनाव जीतने के लिए लड़ा जाता है न कि वोट औसत बढ़ाने के लिए।’ पिछले कई चुनावों से इसी तरह के दावे किए जा रहे हैं। खीज इस बात से भी है कि शीला के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद प्रदेश कांग्रेस की गतिविधियों से न केवल उन्हें दूर कर दिया गया है बल्कि किसी चुनाव में उन्हें चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं बुलाया जाता है।

शीला ने उस बात को ही दोहराते हुए कहा कि उन्हें चिंता किसी व्यक्ति विशेष के बजाए कांग्रेस की है। इससे कांग्रेस कमजोर हो रही है। हालांकि उनके बयान पर दिल्ली कांग्रेस के नेता सीधी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। एक नेता ने बताया कि पार्टी के एक महासचिव ने उन्हें चुनाव प्रचार में चलने को कहा था लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अगर वह कांग्रेस की इतना हितैषी हैं तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी कुछ बोलतीं। वैसे वास्तविकता ये है कि 2013 से पहले मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी नगर निगम चुनावों में उनकी भूमिका नाम की ही होती थी। उसके बाद तो वह या उनके सांसद पुत्र संदीप दीक्षित दिल्ली कांग्रेस के आयोजनों में गलती से दिखे।

बवाना के नतीजों का सीधा मतलब आप की भारी जीत और भाजपा की हार है। आप सत्ता में थी। कई चुनाव हार कर भी पार्टी के चेहरा माने जाने वाले अरविंद केजरीवाल ने दो महीने बवाना में जमे रहे। लोगों को विकास का भरोसा दिया। भाजपा के लिए भी ऐसा कहने का मौका था वह निगम और केंद्र की सरकार में हैं। लेकिन भाजपा ऐसा नहीं कह सकी। भाजपा अध्यक्ष के भय से पार्टी प्रमुख अमित शाह से टिकट पाए आप से आने वाले वेद प्रकाश का सभी ने आधे मन से प्रचार किया। भाजपा ने अनोखा प्रयोग करते हुए दिल्ली उत्तर-पश्चिम लोकसभा के अधीन आने वाली इस सीट का प्रभारी दिल्ली पश्चिम के सांसद प्रवेश वर्मा को बनाया। वेद प्रकाश को लेकर गांवों के लोगों में नाराजगी थी। जिसका लाभ भी कांग्रेस नहीं उठा पाई। मुसलिमों ने कांग्रेस को गिनती के वोट दिए। सबसे बुरा हाल तो कांग्रेस का अपने गढ़ अनधिकृत कॉलोनियों वाले बेगमपुर और रोहिणी-सी वाले इलाके में हुआ। बेगमपुर में तो कांग्रेस को दस फीसद वोट मिले। कहा जा रहा है कि अनधिकृत कॉलोनियों में यह मुद्दा बन गया कि तीन बार के विधायक सुरेंद्र कुमार ने तो बसी बसायी कॉलोनियों में काम करवाए। वेद प्रकाश ने इलाके में काम न होने देने के लिए आप सरकार पर आरोप लगाया। जिसका असर उल्टा हुआ।

 

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