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सोशल साइटों पर चीनी सामान के बहिष्कार से खुदरा बाजार 40 फीसद तक प्रभावित

फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में चीनी सामानों के खुदरा कारोबार में 40 से 50 फीसद की कमी आई है। वहीं दशहरा के मौके पर खुदरा का करोबार जितना होना चाहिए इस साल नहीं हो पाया है।
Author नई दिल्ली | October 12, 2016 12:24 pm
प्रतीकात्मक तस्वीर

दशहरा-दिवाली के मौके पर सोशल साइटों और सामाजिक संगठनों के जरिए चीनी सामानों के बहिष्कार की अपील को लेकर एक महौल चारों तरफ बना हुआ है। इसका असर अभी चीनी सामानों के खुदरा कारोबार पर देखा जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी के सदर बाजार के कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में चीनी सामानों के खुदरा कारोबार में 40 से 50 फीसद की कमी आई है। वहीं दशहरा के मौके पर खुदरा का करोबार जितना होना चाहिए इस साल नहीं हो पाया है। जबकि इस साल 30 हजार करोड़ से ज्यादा के चीनी माल बाजार में पहुंच चुके हैं। हालांकि कारोबारियों का मानना है कि यह असर खुदरा कारोबारियों के स्तर पर देखा जा रहा है। अभी लोगों का पूरा रुख बाजार की तरह नहीं हो पा रहा है। जब लोग स्थानीय बाजार में आएंगे तभी इस बहिष्कार का स्थाई असर बता पाना संभव होगा।

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फेडरेशन आॅफ सदर बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव का कहना है कि चीनी सामानों की खरीदारी के बहिष्कार को लेकर एक मनोवैज्ञानिक असर खुदरा कारोबारियों पर अभी दिख रहा है। हालांकि इस त्योहारी सीजन में 20 दिन का कारोबार और बचा हुआ है। दिवाली तक कैसा माहौल रहता है यह भी देखना होगा। उनका कहना था कि दशहरा-दिवाली के त्योहार को देखते हुए थोक कारोबारी चीन से थोक सामान जून-जुलाई में ही आर्डर कर देते हैं जिसे करीब दो महीने भारत आने में लगते हैं। यानी सितंबर-अक्तूबर में पूरा माल भारत के थोक बाजार में पहुंच जाता है।

भारतीय उद्योग व्यापर मंडल के महासचिव हेमंत गुप्ता का कहना है कि बहिष्कार का जज्बात लोगों में कितना रहता है, यह कह पाना मुश्किल है क्योंकि हमारे बाजार में चीनी सामानों का दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। लोग कहां जाएंगे? मान लीजिए कुछ लोग पटाखे नहीं खरीदेंगे, कुछ लोग मिट्टी के दीए जला लेंगे। लेकिन उपहार के लिए सभी को चीनी सामान ही खरीदना पड़ेगा। क्योंकि बाजार में उपहार का तो कोई विकल्प है ही नहीं। इसके लिए सरकार को लंबी योजना पर काम करना पड़ेगा। हेमंत का कहना था कि हमारा बाजार 90 फीसद चीनी सामानों के निर्यात पर टिका है। एकाएक बाजार से चीन को बेदखल करना संभव नहीं है। गणेश की प्रतिमा से लेकर लाइटिंग, मोमबत्ती और उपहार तक चीन से भारत आते हैं। चीन में सस्ते दामों पर इनके उपलब्ध होने से पूरा कारोबार वहीं से होता है। जबकि भारत में लागत और कर अधिक होने से यहां उत्पादन करने पर दाम अधिक हो जाते हैं।

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  1. D
    Dinesh Sharma
    Oct 12, 2016 at 7:37 am
    this is wrong says shopkeepers
    (0)(0)
    Reply
    1. N
      Navin Mange
      Oct 12, 2016 at 2:38 pm
      भरष्टाचार मे लिप्त custams के अधिकारियो की जांच हो ओर सीबीआई को प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधा निर्देश दिये जाये ओर खुदरा ओर होलसेल ओर इंपोर्टर की खुफिया जांच हो ओर जिस भी सरकारी अधिकारी की सांठगांठ से यह फुलफाल रहा है उस पे अंकुश लगे
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      Reply
      1. R
        raj
        Oct 12, 2016 at 6:02 am
        Its still shameful to our dependency on Chinese markets
        (0)(0)
        Reply
        सबरंग