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क्लोजर रिपोर्ट पर सफाई के लिए सीबीआइ ने मांगी मोहलत

नई दिल्ली। कोल ब्लॉक आबंटन में फंसे उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के बाबत क्लोजर रपट दर्ज करने की जल्दीबाजी में सफाई के लिए अदालत से और समय की मांग की। उसने अदालत को बताया कि वह किसी कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाले के मामले में फिलहाल कोई और अंतिम रिपोर्ट […]
Author September 23, 2014 09:07 am
कोयला घोटाला: सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में पेश की प्रगति रिपोर्ट

नई दिल्ली। कोल ब्लॉक आबंटन में फंसे उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के बाबत क्लोजर रपट दर्ज करने की जल्दीबाजी में सफाई के लिए अदालत से और समय की मांग की। उसने अदालत को बताया कि वह किसी कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाले के मामले में फिलहाल कोई और अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं करेगी।

विशेष लोक अभियोजक आरएस चीमा ने विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पराशर को बताया कि जांच एजंसी इस मामले में अंतिम पूरक रिपोर्ट के साथ तैयार है जिसमें राज्यसभा सांसद विजय दर्डा और अन्य शामिल हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से (उसे पेश करने पर) रोक लगाई गई है।अदालत की ओर से यह पूछे जाने पर कि क्या पूरक रिपोर्ट पेश करने पर भी रोक लगाई गई है, अभियोजक ने कहा कि शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि एजंसी को अगले आदेश तक कोयला घोटाला मामलों में कोई और आरोपपत्र या क्लोजर रिपोर्ट नहीं पेश करनी चाहिए। और समय की मांग की दलील पर विशेष लोक अभियोजक आरएस चीमा ने विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पाराशर को बताया कि संबंधित पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक उपलब्ध नहीं हैं इसलिए उन्हें मामले में दलील पेश करने के लिए और समय की जरूरत है। अदालत ने चीमा का अनुरोध मंजूर कर लिया और मामले की अगली सुनवाई की तिथि 13 अक्तूबर तय की।

न्यायाधीश ने कहा कि विशेष लोक अभियोजक ने दलील पेश करने से पहले और समय की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर तय की जाए। अदालत बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में सीबीआइ की ओर से दायर क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई कर रही थी। 12 सितंबर को अदालत ने सीबीआइ से पूछा था कि उस मामले को बंद करने की जल्दबाजी क्यों है जिसमें बिड़ला, पारेख और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अदालत की ओर से यह टिप्पणी तब आई है जब मामले के जांच अधिकारी ने दलील दी कि उस स्क्रीनिंग कमेटी का मूल ब्योरा ‘गुम’ है जिसमें बिड़ला के स्वामित्व वाली हिंडाल्को कंपनी की कोयला ब्लॉक आबंटन के अनुरोध वाली अर्जी पर विचार विमर्श किया गया था। जांच एजंसी ने अदालत को बताया था कि उसने गुम दस्तावेजों के संबंध में प्रारंभिक जांच पहले ही दर्ज कर ली है। सीबीआइ ने 28 अगस्त को मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।बिड़ला, पारेख और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी पिछले साल अक्तूबर में सीबीआइ ने दर्ज की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि पारेख ने हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक का आबंटन खारिज करने का अपना निर्णय कुछ महीने में ही पलट दिया था। ऐसा कोई वैध आधार या परिस्थितियों में परिवर्तन के बिना किया गया था और इसमें ‘अनुचित पक्ष लिया गया था।’ प्राथमिकी 2005 में तालाबिरा दो और तीन कोयला ब्लॉकों के आबंटन से संबंधित है। सीबीआइ ने बिड़ला, पारेख और हिंडाल्को के अन्य अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था जिसमें आपराधिक साजिश और सरकारी अधिकारियों की ओर से आपराधिक कदाचार भी शामिल था।

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