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बीजेपी के शत्रु ने खोले राज- पार्टी मुख्यालय नहीं जाने की क्यों खाई थी कसम?

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'अब लगता है कि हम सब खामोश हो गए हैं। देश में जो माहौल चल रहा है, उसमें सब कोई खामोश है'।
दिल्ली में रविवार 12 नवंबर को साहित्य आजतक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा

सिल्वर स्क्रीन पर मात्र एक शब्द ‘खामोश’ बोलकर लाखों सिने प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि देश के मौजूदा माहौल में सब खामोश हैं। न्यूज चैनल आजतक के कार्यक्रम साहित्य आजतक में बीजेपी के चिर बागी और अभि‍नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी किताब एनीथिंग बट खामोश पर चर्चा की। सिन्हा ने कहा कि लगता है कि हिन्दुस्तान के इस माहौल में जो चल रहा है उसमें सभी लोग चुप्पी साधे हुए हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘ ‘अब लगता है कि हम सब खामोश हो गए हैं। देश में जो माहौल चल रहा है, उसमें सब कोई खामोश है’। बिहार के पाटलिपुत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले सिन्हा ने अपनी किताब के बारे में कहा कि उन्होंने अपनी किताब सबसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसलिए नहीं दे सका, क्योंकि तब तक ये आई नहीं थी’।
क्यों खाई बीजेपी ऑफिस नहीं जाने की कसम?

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह लाल कृष्ण आडवाणी के कहने पर राजनीति में आए। आडवाणी के आदेश पर मध्यावधि चुनावों में राजेश खन्ना के खिलाफ चुनाव लड़कर राजनीतिक पारी की शुरुआत की। शत्रुघ्न ने बताया कि इस चुनाव में हारने के बाद किन हालात में उन्होंने अशोक रोड स्थित बीजेपी ऑफिस नहीं जाने की कसम खाई। शत्रुघ्न सिन्हा लालकृष्ण आडवाणी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं और पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने आडवाणी को राष्ट्रपति बनाने की पुरजोर पैरवी की थी।

मैं पहला फिल्मी विलेन जिस पर तालियां बजीं

फिल्मों में खलनायक के रोल से अपनी पहचान बनाने पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘मैंने विेलेन के रोल में होकर कुछ अलग किया। मैं पहला विलेन था, जिस के परदे पर आते ही तालियां बजती थीं। ऐसा कभी नहीं हुआ। विदेशों के अखबारों में भी ये आया कि पहली बार हिन्दुस्तान में एक ऐसा खलनायक उभरकर आया, जिस पर तालियां बजती हैं। अच्छे अच्छे विलेन आए, लेकिन कभी किसी का तालियों से स्वागत नहीं हुआ।’ ये तालियां मुझे प्रोड्यूसर्स-डायरेक्टर्स तक ले गईं।’ सिन्हा ने बताया, ‘मैंने रोल को कभी विलेन के तौर पर नहीं, रोल की तरह ही देखा। मैं विलेन में सुधरने का स्कोप भी देखा करता था।’

पाकिस्तान में भी बच्चे कहते हैं ‘खामोश बोलो’

अपने डायलॉग की लोकप्रियता पर उन्होंने कहा कि आज खामोश सिग्नेचर टोन बन गया है। पाकिस्तान जाता हूं तो बच्चे कहते हैं एक बार खामोश बोलकर दिखाओ। आगे उन्होंने कहा, अपनी वास्तविकता को मत खोओ। शत्रु ने कहा कि फिल्म ‘शोले’ और ‘दीवार’ ठुकराने के बाद ये फिल्में अमिताभ बच्चन ने की और वह सदी के महानायक बन गए। शत्रु ने कहा कि ये फिल्में न करने का अफसोस उन्हें आज भी है लेकिन खुशी भी है कि इन फिल्मों ने उनके दोस्त को स्टार बना दिया। शत्रुघ्न के मुताबिक यह फिल्में ना करना उनकी गलती थी और इस गलती को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कभी भी इन दोनों फिल्मों को नहीं देखा।

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  1. G
    Girish
    Nov 13, 2017 at 9:48 am
    Nirmala Seetharaman from south especially from TN being defense minister as good as rank of Dy.Prime minister will be more beneficial for BJP to create base in TN with her strong potentials to win TN Assy elections , If presently BJP re designates her immediately as Dy.PM some damaged things in BJP as well senior leaders un happiness with Narendra Modi will ease some extent of his wrong decisions , as well party is running with mainly on Modi Shaha others are side lined , Presently BJP is going on the path of Congress policy , Earlier party president used to become PM same way Modi is following path as though Amit is president of BJP for name sake rest decisions R of PM entire in party , in long run this is very risk , BJP always adopted Dy.PM post in government as there was never unity in party ,same situations are also today , to avoid this Dy.PM post much needed when BJP can keep 2 Dy.CM's in UP why not in Center ? to reduce interference of Modi, BJP pa
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