December 10, 2016

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दिल्ली: एटीएम के सॉफ्टवेयर बदलने की रफ्तार बेहद धीमी, लोग हो रहे हैं परेशान

सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया और टाटा इंडिकैश की हालत सबसे खस्ता हैं। इन बैंकों के दर्जनों एटीएम नांगलोई, किराड़ी, कुंवर सिंह नगर, निहार विहार में नए नोटों की नकदी के लिए तरस रहे हैं।

Author नई दिल्ली | November 20, 2016 05:26 am
एटीएम।

पुराने नोटों के बदलने के फैसले की कड़ी में दस दिन बीतने के बाद भी मुश्किलें बनी हुई हैं। अब पांच सौ, एक हजार और दो हजार के नए नोटों के लिए लोगों को इसलिए परेशानी हो रही है क्योंकि बैंकों के एटीएम में नए नोटों के मुताबिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में तेजी से बदलाव नहीं किए जा पा रहे हैं। पिछले दो दिनों से दिल्ली-एनसीआर में रोजाना 25 से 30 फीसद एटीएम ही नई तकनीक से संशोषित हो रहे हैं। तकनीक संशोधन में तेजी नहीं होने से नकद डालने वाली कंपनियों की गाड़ियां नए नोटों की खेप लेकर आगे बढ़ जा रही हैं। इससे दिल्ली के दूरदराज के इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं।

नांगलोई, किराड़ी, कुंवरसिंह नगर, निहार विहार इलाकों में ज्यादातर एटीएम से नए नोट नहीं निकल पा रहे हैं। वहीं नकदी डालने वाली एक कंपनी का कहना है कि पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों के अमान्य करने से पहले की तुलना में अभी 30 फीसद एटीएम में नए नोटों की नकदी डाल पाए हैं। नकदी की गाड़ी नोटों का बंडल लेकर अपने दिन भर के टारगेट पर निकलती हंै। उन्हें तय रास्ते में पड़ने वाले एटीएम में पैसे डालने की जिम्मेदारी होती है। लेकिन कंफीग्रेशन कम होने से अभी 10 में से तीन से चार एटीएम में ही नए नोट डाल पा रहे हैं। एटीएम में कैश डालने का काम करने वाले एक व्यक्ति ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि दोपहर 12 बजे के करीब 10 एटीएम में पैसे डालने को लेकर निकले हैं। शाम छह बजे तक केवल तीन एटीएम में ही पैसे डाल सके। जबकि पुराने नोटों को बदलने से पहले रोजाना 20 से 22 एटीएम में पैसे देता था।

उसका कहना था कि इसके पीछे का कारण वे कंपनियां हैं जिनके पास एटीएम में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर बदलने का काम है। उनकी रफ्तार सुस्त है। एक आंकड़े के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में तकरीबन आठ हजार एटीएम हैं और इनमें से एसआइपीएल (सिक्युरीट्रांस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) के पास 950 एटीएम में नकदी डालने की जिम्मेदारी है। एसआइपीएल के एक ब्रांच मैनेजर संजय रावत ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में लगी मशीनें अलग-अलग कंपनियों की है। इन कंपनियों को अपनी एटीएम मशीनों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर बदलने हैं।

संजय का कहना था कि एसआइपीएल के अंतर्गत नकदी जमा होने वाले 950 एटीएम में से 150 एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर कंपनियां रोजाना बदल रही हैं। पिछले दो दिनों से इनकी तरफ से कंफीग्रेशन का काम शुरू किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले तीन-चार दिन में उनके सभी एटीएम नए नोटों के मुताबिक बदल दिए जाएंगे। जबकि उन्होंने बताया कि इस समय दिल्ली-एनसीआर में एसबीआइ के 70 फीसद, पीएनबी के 50 फीसद, एक्सिस, आइसीआइसीआइ और कोटक महिंद्रा बैंक के 40 फीसद एटीएम में नए नोटों के लिए बदलाव हो चुके हैं। वहीं उन्होंने बताया कि सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया और टाटा इंडिकैश की हालत सबसे खस्ता हैं। इन बैंकों के दर्जनों एटीएम नांगलोई, किराड़ी, कुंवर सिंह नगर, निहार विहार में नए नोटों की नकदी के लिए तरस रहे हैं।

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First Published on November 20, 2016 5:26 am

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