June 23, 2017

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नोटबंदी पर ममता-केजरीवाल का अल्टीमेटम, मोदी सरकार 3 दिन के अंदर वापस ले फैसला

मोदी पर करारा प्रहार करते हुए केजरीवाल ने कहा कि विमुद्रीकरण स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है जबकि ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी को तानाशाही के माध्यम से देश नहीं चलाना चाहिए।

Author नई दिल्ली | November 17, 2016 20:58 pm
नई दिल्ली के आजादपुर मंडी में विमुद्रीकरण के खिलाफ जनरैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (PTI Photo by Shahbaz Khan/17 Nov, 2016)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी ने नोटबंदी के फैसले को वापस लेने के लिए मोदी सरकार को गुरुवार (17 नवंबर) को तीन दिन की मोहलत दी और चेतावनी दी कि यदि वर्तमान अफरा-तफरी जारी रही तो व्यापक अशांति पैदा हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा प्रहार करते हुए केजरीवाल ने कहा कि विमुद्रीकरण स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है जबकि ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी को तानाशाही के माध्यम से देश नहीं चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ऐसा संकट जो आपातकाल में भी नजर नहीं आया। यहां आजादपुर में एशिया की सबसे बड़ी सब्जी एवं फल मंडी में व्यापारियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल और ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पर कालाधन निकालने के नाम पर आम आदमी पर मुश्किलों का पहाड़ तोड़ने का आरोप लगाया।

दोनों नेताओं ने बाद में संसद मार्ग पर भारतीय रिजर्व बैंक के बाहर प्रदर्शन किया एवं मांग की कि यह केंद्रीय बैंक उन्हें नोटों की उपलब्धता के बारे में बताए। केजरीवाल ने कहा, ‘कालाधन बाजार में फिर बड़ी मात्रा में आ गया है। कुछ लोगों को घर तक नोट पहुंचाये जा रहे है। यह स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। सरकार लोगों को अपना धन बैंकों में जमा करने के लिए बाध्य कर, उनसे 10 लाख करोड़ रूपए जमा करना और इस धनराशि का उपयोग मोदी के मित्रों का ऋण माफ करने के लिए करना चाहती है।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार को तीन दिन में नोटबंदी का फैसला वापस लेना चाहिए। अन्यथा बगावत होगी। मोदीजी ने विजय माल्या को एक ही रात में लंदन भेज दिया जिन पर बड़ा उधार है। उन्होंने लोगों को सड़कों पर ला दिया, जो घंटों लाइन में खड़े हैं।’

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भी सरकार से नोटबंदी तीन दिनों में वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हम कालेधन के खिलाफ संघर्ष का समर्थन करते हैं लेकिन गरीब और वंचित लोग परेशान नहीं होने चाहिएं। हम चुप नहीं रहेंगे और यदि तीन दिन में ऐसा नहीं किया जाता है तो देशवासी आपको नहीं बख्शेंगे।’ दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सीमापार लक्षित हमले के अलावा स्वच्छ भारत और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे मोदी की कई पहलों का खुले दिल से समर्थन किया। यदि यह कालेधन के खिलाफ वाकई संघर्ष है तो वह और उनकी पार्टी अग्रिम मोर्चे पर होते। उन्होंने कहा, ‘लोग ठगे जा रहे हैं। आईटी ने पूर्व भाजपा मंत्री जी जर्नादन रेड्डी पर छापा क्यों नहीं मारा जिन्होंने अपनी बेटी की शादी पर 500 करोड़ रुपए खर्च किए और वे चाहते हैं कि हम आम लोग शादी पर ढाई लाख रुपए ही खर्च करें।’

उनका इशारा शादी वाले परिवारों के लिए ढाई लाख रुपए तक निकालने की अनुमति देने संबंधी सरकारी फैसले की ओर था। केजरीवाल ने यह सवाल करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी प्रहार किया कि क्या उन्होंने हाल ही में अपनी बेटी की शादी पर बस 2.5 लाख रुपए ही खर्च किए? उन्होंने कहा, ‘मोदीजी, लाइन में खड़ा रहने को राष्ट्रभक्ति कहकर लोगों को बेवकूफ मत बनाइए। लाइनों में खड़ा रहकर हुई 40 लोगों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है?’ दिल्ली के मुख्यमंत्री ने मोदी पर गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के सिलसिले में भी कुछ आरोप लगाए और दावा किया कि वित्त मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा उन्हें प्रदत्त दस्तावेजों पर उनके आरोप आधारित हैं।

लोगों के वास्ते अपना संघर्ष जारी रखने पर जोर देते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी, ‘मैं डरी हुई नहीं हूं। मैं अपना संघर्ष जारी रखूंगी। यदि आपमें साहस है तो मुझे जेल में डाल दीजिए, मुझे गोली मार दीजिए।’ विमुद्रीकरण के खिलाफ अपनी लड़ाई को ‘देश, गरीबों एवं भूखे लोगों को बचाने’ का संघर्ष करार देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आपातकाल में भी ऐसा संकट नहीं देखा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह फैसला देश को 100 साल पीछे ले जा सकता है। सरकार हर रोज एक फैसले के साथ सामने आती है। परसों कहा गया था कि नोट बदलने की सीमा 4500 होगी और आज आप कहते हें कि यह 2000 रुपए है।’

उन्होंने इस दलील का मजाक उड़ाया कि लोगों को प्लास्टिक मनी का उपयोग करना चाहिए एवं कहा कि भारत में महज चार फीसदी विनिमय के लिए कार्ड का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा, ‘दूसरे दिन, यह कहा गया कि अंगुलियों पर स्याही लगायी जाएगी। यह चल क्या रहा है? क्या हम नौकर हैं, क्या हम चोर हैं और आप ईमानदार? क्या हर व्यक्ति चोर है?’ वैसे उन्होंने विमुद्रीकरण की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की कुछ विपक्षी दलों की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि ऐसी समितियों से अतीत में कोई नतीजा निकला नहीं। कालेधन पर रोक पर सरकार की कटिबद्धता पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने पूछा कि विदेशों में रखे गए कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

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First Published on November 17, 2016 8:56 pm

  1. डॉ प्रकाश
    Nov 18, 2016 at 5:44 am
    मोदी पर ऊँगली उठाने वालों पहले अपने गिरेबान म झाँको
    Reply
    1. L
      lalan kumar
      Nov 18, 2016 at 11:37 am
      फैसला वापस तो कटाई नहीं लिया जाना चाहिए, हाँ गलत तरीका अपनाने और आम जनता को परेशानी में डालने के लिए मोदी जी को वापस जरूर बुला लिया जाना चाहिए...बीजेपी इस पर गौर करे !
      Reply
      सबरंग