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मुश्किलों का चौथा सप्ताहांत: ढाई हजार रुपए के लिए घंटों गुजारे कतार में

अखबारों और न्यूज चैनलों में बैंकों से कितनी भी रकम निकालने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जा रही हैं। जबकि हकीकत उससे उलट है।
Author नोएडा | December 12, 2016 03:45 am
बैंक के सामने मौजूद भीड़।

करोड़ों रुपए के कालेधन और बड़ी तादात में नई करंसी की धरपकड़ के बीच पेंशन और तनख्वाह निकाल पाने में नाकाम लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। महज 2500 रुपए के लिए कई घंटों की कतार और नकदी को लेकर आपातकाल जैसे हालात के बीच तीन दिनों बैंकों की छुट्टी को लेकर शुरुआत में नोटबंदी के फैसले का समर्थन करने वाले भी अब खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। यह आलम तब है जब दिसंबर, 2016 के आखिर तक ही 500 और 1 हजार रुपए के पुराने नोट जमा होने हैं। नोटबंदी के चौथे सप्ताहांत भी हालात में सुधार नहीं आया है। लोगों के मुताबिक, दिक्कत केवल तनख्वाह या खाते में जमा रकम को निकालने भर की नहीं है। ज्यादातर एटीएम बूथों के लगातार बंद रहने और 40 फीसद सही एटीएम बूथों पर दिन-रात लंबी कतार के बीच रुपए निकालना संभव नहीं है। जबकि बैंकों में कई दिनों तक लाइन में लगने के बाद 2-3 हजार रुपए बड़ी मुश्किल से मिल रहे हैं। ऐसे में बैंक खातों से जरूरत भर रुपए निकालने के अलावा पुराने रुपयों को जमा कराने भी चिंता तारीख बढ़ने के साथ बढ़ रही है।

सेक्टर-6 के एटीएम बूथ पर 2500 रुपए निकालने का इंतजार कर रहे अरविंद झा ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधक ग्राहकों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। यदि वे इतने ही ईमानदार हैं, तो देश के विभिन्न हिस्सों में करोड़ों-अरबों की नई करंसी कैसे मिल रही है। वहीं, रविवार को सेक्टर-12 के एटीएम बूथ के बाहर दो घंटे से लाइन में लगी सावित्री वर्मा ने झल्ला कर बताया कि मोदी की पूरी योजना फेल हो चुकी है। अखबारों और न्यूज चैनलों में बैंकों से कितनी भी रकम निकालने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जा रही हैं। जबकि हकीकत उससे उलट है। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि नोटों को लेकर उतनी ज्यादा कमी नहीं है, जितनी दिखाई दे रही है। इसकी वजह यह है कि जिनके पास 10, 20, 50, 100 या 2000 रुपए के नोट हैं, वे उन्हें खर्च नहीं कर रहे हैं। दिसंबर के अंत में जब पुराने नोट जमा कराने का सिलसिला थम जाएगा, तब नए या चालू नोटों को जमा कराने के लिए लोग आगे आएंगे और हालात में सुधार आएगा।

3 लाख से ज्यादा खुले जनधन खातों पर निगाहजैसे- जैसे पुराने नोट जमा कराने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे जांच एजंसियां भी अपनी सख्ती बढ़ाने लग गई हैं। जनधन योजना के तहत जिले में खुले करीब 3 लाख से ज्यादा खातों के रेकार्ड खंगाले जा रहे हैं, जिसका मकसद इन खातों में जमा हुई रकम को बाहर निकालना है। सूत्रों के मुताबिक, आरबीआइ की रपट में मांग के अनुरूप नई करंसी उपलब्ध कराई जा रही है। खातों में जमा रकम के बाहर नहीं निकलने की वजह से भी लोगों को नोटों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

नाराज लोगों को मनाएगा भाजपा युवा मोर्चानोटबंदी से नाराज लोगों को मनाने की भाजपा युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। रविवार को भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा की तरफ से सेक्टर-12 के सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में युवा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं को बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश् के विकास के लिए जनधन, मुद्रा, ई बटुआ जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं लाए हैं। जिनके जरिए न केवल देश भर से भ्रष्टाचार खुद खत्म हो जाएगा बल्कि भ्रष्ट कारोबार खुद ही मिट जाएगा। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश मौजूद थे।

 

 

 

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