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चार साल बाद हुई DUSU में NSUI की वापसी

इसके अलावा 2015, 2014 में सभी सीटों पर परिषद ने जीत हासिल की थी। 2013 के डूसू में परिषद ने तीन और एनएसयूआइ ने एक पद हासिल किए थे।
Author नई दिल्ली | September 14, 2017 03:25 am
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के लिए चुनाव।

कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआइ) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में शानदार वापसी करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया है। एनएसयूआइ के रॉकी तुसीद डूसू के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। मजबूत आधार वाली भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को सचिव और सयुक्त सचिव की दो सीटें मिलीं हैं। डूसू चुनाव में मुकाबला कांटे का रहा। रॉकी तुसीद ने 1,590 मतों के अंतर से अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। उन्हें 16,299 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रजत चौधरी को 14,709 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर पार्टी के कुणाल सहरावत ने एबीवीपी उम्मीदवार पार्थ राणा को 181 मतों से हराया। कुणाल को 16,437 वोट जबकि राणा को 16,250 वोट मिले ।

एबीवीपी की महामेधा नागर ने सचिव के पद पर एनएसयूआइ की मीनाक्षी मीणा को 2,624 मतों के अंतर से हराया। दोनो को क्रम से 17,156 व 14,532 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद के परिषद के उम्मीदवार उमा शंकर ने एनएसयूआइ के अविनाश यादव को 342 मतों से हराया। इन्हें क्रम से 16,691 और 16,349 वोट मिले। मंगलवार को हुए डूसू चुनाव में कुल 43 फीसद मतदान हुआ था। चार साल बाद एनएसयूआइ को अध्यक्ष पद हासिल हुआ है। बीते साल एबीवीपी ने तीन पदों पर जीत दर्ज की थी जबकि एनएसयूआइ ने संयुक्त सचिव पद जीता था। इसके अलावा 2015, 2014 में सभी सीटों पर परिषद ने जीत हासिल की थी। 2013 के डूसू में परिषद ने तीन और एनएसयूआइ ने एक पद हासिल किए थे। डूसू चुनाव में पारदशर््िाता लाने के लिए इस बार कैंपस में एक बड़ी स्क्रीन की व्यवस्था की गई थी। इस स्क्रीन में मतगणना का सीधा प्रसारणदिखाया गया। उम्मीदवार और छात्र स्क्रीन पर चुनाव की मतगणना देख पा रहे थे।
यह चुनाव हस्तक्षेप के नजरिए से भी अब तक के चुनावों से अलग रहा। डीयू ने अध्यक्ष पद पर एनएसयूआइ के उम्मीदवार रॉकी तुसीद का पर्चा रद्द कर दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने फैसले को पलट दिया और रॉकी तुसीद को चुनाव लड़ने की अनुमति दी। इसने दिलचस्प मोड़ ले लिया।

48 घंटे में तीन बार एनएसयूआइ ने अपने अध्यक्ष पद के उम्मीदवार घोषित किए। एक घंटे पहले तक अध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआइ की तरफ से प्रचार करती रहीं अलका सहरावत को अपरोक्ष रूप से बैठाया गया। तुसीद दोबारा मैदान में उतरे। अदालत के फैसले से एनएसयूआइ का हौसला बढ़ा। हालांकि प्रचार के लिए उन्हें समय नहीं मिला। डीयू ने वोट का समय बढ़ाने की उनकी मांग भी नहीं मानी। एनएसयूआइ ने इसे मुद्दा बनाया और छात्र वोटरों की अदालत में इसे उठाया। अंतिम फैसला उनके पक्ष में आया। तुसीद की अगुवाई में छात्रों ने एनएसयूआइ को डूसू में पहुंचाया। डूसू में आइसा भी चारो पदों पर मैदान में थी। अध्यक्ष पद पर आइसा की पारुल चौहान को 4,895 वोट मिले। सचिव पद की दावेदार जयश्री को 8,035 वोट हासिल हुए।

 

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